गतिहीन जीवनशैली, आहार में गड़बड़ी और कई अन्य कारकों के चलते पिछले एक दशक में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं काफी बढ़ गई हैं। थायराइड विकार उनमें से एक हैं। गले के निचले हिस्से में स्थित तितली के आकार की थायराइड ग्रंथि के सामान्य कार्य में होने वाली दिक्कत के कारण लोगों को इस तरह की समस्या होती है। भारत में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण सांख्यिकी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार साल 2013 तक हर 2000 में एक व्यक्ति थायराइड की बीमारी से ग्रसित होता था, पिछले कुछ वर्षों में यह आंकड़ा और बढ़ा है। थायराइड विकार के कारण लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिनका समय पर निदान और उपचार आवश्यक माना जाता है।
आज का हेल्थ टिप्स: थायराइड विकार में इन तीन बातों का रखें विशेष ख्याल, वरना बढ़ सकती है आपकी समस्या
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धूम्रपान की आदत बढ़ा सकती है बीमारी
सिगरेट के धुएं में विषाक्त पदार्थ होते हैं जो आपके थायराइड ग्रंथि को प्रभावित कर सकते हैं। सिगरेट के धुएं में थायोसाइनेट नामक एक यौगिक पाया जाता है जो आयोडीन के अवशोषण को बाधित कर देता है। इस स्थिति में थायराइड हार्मोन का उत्पादन अवरुद्ध हो जाता है। सामान्यतौर पर, धूम्रपान थायराइड-उत्तेजक हार्मोन (TSH) के स्तर में कमी का कारण बन सकता है।
आहार में गड़बड़ी हो सकती है समस्याकारक
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए स्वस्थ आहार का सेवन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, वहीं यदि आपको पहले से ही थायराइड विकार की समस्या है तो यह और भी आवश्यक हो जाता है। ऐसे लोगों को प्रोसेस्ड फूड्स, चीनी और नमक का बहुत संतुलित मात्रा में सेवन करना चाहिए। ये चीजें आंतों में सूजन का कारण बन सकती हैं जिसके कारण शरीर में हार्मोनल असंतुलन बढ़ जाता है।
स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण जरूरी
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायर्नमेंटल हेल्थ साइंसेज के अनुसार, वातावरण की समस्याएं भी थायराइड विकार को बढ़ावा दे सकती हैं। वातावरण में बढ़ते रसायन और प्रदूषण के कारण यह समस्या ट्रिगर हो सकती है। कई वातावरणीय कारक थायराइड हार्मोन के स्तर में असंतुलन का कारण बन सकते हैं। नियमित व्यायाम और ताजी हवा में घूमने से आपको लाभ मिल सकता है।
तनाव को करें प्रतिबंधित
अधिक तनाव लेने का शरीर पर कई तरह से नकारात्मक प्रभाव हो सकता है, यह थायराइड विकारों को भी बढ़ावा दे सकती है। तनाव लेने से तो प्रत्यक्ष रूप से थायराइड विकार नहीं होता है, लेकिन यह स्थिति को और खराब कर सकती है। तनाव का असर आपके शरीर के मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है जिसके कारण जटिलताएं बढ़ सकती हैं। सभी लोगों को तनाव प्रबंधन के उपाय करते रहने चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।