भारतीय बच्चों में बढ़ती कई गंभीर बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव अपूर्व चंद्रा ने कहा, देश में एक लाख से अधिक बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित हैं जिन्हें निरंतर ब्लड ट्रांसफ्यूजन (खून बदलते रहने) की जरूरत होती है। थैलेसीमिया एक गंभीर समस्या है और ट्रांसफ्यूजन बहुत ही कठिन प्रक्रिया है, ऐसे में आवश्यक है कि बच्चों में इसकी रोकथाम को लेकर गंभीरता से ध्यान दिया जाए।
MoHFW: देश में एक लाख से अधिक बच्चे इस गंभीर बीमारी के शिकार, बार-बार पड़ती है खून बदलने की जरूरत
थैलेसीमिया के बारे में जानकारी और रोकथाम
#WATCH | Delhi: Secretary, Ministry of Health & Family Welfare (MoHFW) Apurva Chandra says, "...There are more than 1 lakh children who are having Thalassaemia and transfusion is a very difficult process...So, the best way is prevention - that we should try to avoid birth of… pic.twitter.com/OwSQb1X3FQ
स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव ने कहा इस गंभीर बीमारी का इलाज और देखभाल दोनों ही काफी कठिन हैं। कई राज्य इस रोग की रोकथाम के लिए सिकल सेल के साथ कुछ परीक्षण कर रहे हैं। जन्म से पहले से इस तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का अंदाजा लग जाने से बच्चों को जानलेवा बीमारी से बचाया जा सकता है।
आइए जानते हैं कि थैलेसीमिया क्या है और इसे इतनी गंभीर बीमारी के तौर पर क्यों देखा जा रहा है?
थैलेसीमिया के बारे में जानिए
थैलेसीमिया वंशानुगत रक्त विकार है जिसमें शरीर की हीमोग्लोबिन और स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन करने की क्षमता को प्रभावित हो जाती है। जिन लोगों को थैलेसीमिया की समस्या होती है उनमें एनीमिया जैसे लक्षणों का अनुभव होते रहना काफी सामान्य हो जाता है। थैलेसीमिया के कारण बनी रहने वाली एनीमिया की समस्या के कारण लगातार सांस लेने में दिक्कत बने रहने, ठंड लगने, चक्कर आते रहने और त्वचा में पीलापन बढ़ने की समस्या हो सकती है।
माता-पिता के जीन में दोष के कारण बच्चों में इस गंभीर बीमारी के विकसित होने का खतरा हो सकता है। यही कारण है कि गर्भावस्था के दौरान जांच में इस समस्या का पता लगाकर आवश्यक उपचार की मदद से बच्चों में इस जोखिम को कम किया जा सकता है।
थैलेसीमिया हो जाए तो क्या करें?
जिन बच्चों में थैलेसीमिया का निदान किया जाता है उनमें उपचार के तौर पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन, बोन मैरो ट्रांस्प्लांट के साथ दवाएं दी जा सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं बच्चों के लिए ये प्रक्रिया कठिन हो सकती है, यही कारण है स्वास्थ्य मंत्रालय जन्म से पहले ही इस समस्या के निदान और इसके उपचार को लेकर प्रयास करने पर ध्यान दे रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ब्लड ट्रांसफ्यूजन की प्रक्रिया न सिर्फ आर्थिक तौर पर कठिन होती है साथ ही बार-बार खून बदलने के दौरान संक्रमण होने का भी खतरा बना रहता है।
क्या थैलेसीमिया को रोका जा सकता है?
डॉक्टर कहते हैं, आप थैलेसीमिया को रोक नहीं सकते हैं, लेकिन आनुवंशिक परीक्षण से जरूर ये पता चल सकता है कि माता-पिता में ऐसे जीन तो नहीं हैं जिससे उनके बच्चों में इसका जोखिम हो सकता है। डॉक्टर कहते हैं यदि आप गर्भधारण करने की योजना बना रही हैं तो इस बारे में डॉक्टर से बात जरूर कर लें ताकि परीक्षणों के माध्यम से जोखिम कारकों का पता लगाने और इस रोग को रोकने में मदद मिल सके।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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