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MoHFW: देश में एक लाख से अधिक बच्चे इस गंभीर बीमारी के शिकार, बार-बार पड़ती है खून बदलने की जरूरत

Fri, 10 May 2024 06:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 10 May 2024 06:37 PM IST
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thalassemia in children What happens if a child has thalassemia and how to treat it
बच्चों में थैलेसीमिया की समस्या - फोटो : istock

भारतीय बच्चों में बढ़ती कई गंभीर बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव अपूर्व चंद्रा ने कहा, देश में एक लाख से अधिक बच्चे  थैलेसीमिया से पीड़ित हैं जिन्हें निरंतर ब्लड ट्रांसफ्यूजन (खून बदलते रहने) की जरूरत होती है। थैलेसीमिया एक गंभीर समस्या है और ट्रांसफ्यूजन बहुत ही कठिन प्रक्रिया है, ऐसे में आवश्यक है कि बच्चों में इसकी रोकथाम को लेकर गंभीरता से ध्यान दिया जाए।



स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, थैलेसीमिया के जोखिमों को कम करने के लिए जरूरी है कि गर्भावस्था में ही महिलाओं की विशेष निगरानी और उपयुक्त जांच की जाए जिससे बच्चे के थैलेसीमिया के साथ पैदा होने के जोखिमों को कम करने में मदद मिल सके।

थैलेसीमिया खून से संबंधित गंभीर बीमारी है, जिन लोगों को ये समस्या होती है उन्हें नियमित अंतराल पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराते रहने की जरूरत होती है। आइए बच्चों में होने वाली इस बीमारी के कारण और इससे बचाव के लिए आवश्यक उपायों के बारे में जानते हैं।

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थैलेसीमिया के जोखिम कारकों के बारे में जानिए - फोटो : istock

थैलेसीमिया के बारे में जानकारी और रोकथाम

स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव ने कहा इस गंभीर बीमारी का इलाज और देखभाल दोनों ही काफी कठिन हैं। कई राज्य इस रोग की रोकथाम के लिए सिकल सेल के साथ कुछ परीक्षण कर रहे हैं। जन्म से पहले से इस तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का अंदाजा लग जाने से बच्चों को जानलेवा बीमारी से बचाया जा सकता है।
 



आइए जानते हैं कि थैलेसीमिया क्या है और इसे इतनी गंभीर बीमारी के तौर पर क्यों देखा जा रहा है?

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खून से संबंधित विकार - फोटो : istock

थैलेसीमिया के बारे में जानिए

थैलेसीमिया वंशानुगत रक्त विकार है जिसमें शरीर की हीमोग्लोबिन और स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन करने की क्षमता को प्रभावित हो जाती है। जिन लोगों को थैलेसीमिया की समस्या होती है उनमें एनीमिया जैसे लक्षणों का अनुभव होते रहना काफी सामान्य हो जाता है। थैलेसीमिया के कारण बनी रहने वाली एनीमिया की समस्या के कारण लगातार सांस लेने में दिक्कत बने रहने, ठंड लगने, चक्कर आते रहने और त्वचा में पीलापन बढ़ने की समस्या हो सकती है।

माता-पिता के जीन में दोष के कारण बच्चों में इस गंभीर बीमारी के विकसित होने का खतरा हो सकता है। यही कारण है कि गर्भावस्था के दौरान जांच में इस समस्या का पता लगाकर आवश्यक उपचार की मदद से बच्चों में इस जोखिम को कम किया जा सकता है।

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रक्त से संबधित समस्याएं (सांकेतिक) - फोटो : istock

थैलेसीमिया हो जाए तो क्या करें?

जिन बच्चों में थैलेसीमिया का निदान किया जाता है उनमें उपचार के तौर पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन, बोन मैरो ट्रांस्प्लांट के साथ दवाएं दी जा सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं बच्चों के लिए ये प्रक्रिया कठिन हो सकती है, यही कारण है स्वास्थ्य मंत्रालय जन्म से पहले ही इस समस्या के निदान और इसके उपचार को लेकर प्रयास करने पर ध्यान दे रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ब्लड ट्रांसफ्यूजन की प्रक्रिया न सिर्फ आर्थिक तौर पर कठिन होती है साथ ही बार-बार खून बदलने के दौरान संक्रमण होने का भी खतरा बना रहता है।

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थैलेसीमिया की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : istock

क्या थैलेसीमिया को रोका जा सकता है?

डॉक्टर कहते हैं, आप थैलेसीमिया को रोक नहीं सकते हैं, लेकिन आनुवंशिक परीक्षण से जरूर ये पता चल सकता है कि माता-पिता में ऐसे जीन तो नहीं हैं जिससे उनके बच्चों में इसका जोखिम हो सकता है। डॉक्टर कहते हैं यदि आप गर्भधारण करने की योजना बना रही हैं तो इस बारे में डॉक्टर से बात जरूर कर लें ताकि परीक्षणों के माध्यम से जोखिम कारकों का पता लगाने और इस रोग को रोकने में मदद मिल सके।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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