टीवी इंडस्ट्री से बॉलीवुड में अपना मुकाम बनाने वाले मशहूर अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी की खबर से देशभर में लोग स्तब्ध हैं। मुंबई पुलिस के मुताबिक सुशांत पिछले कई दिनों से तनाव से जूझ रहे थे और कई महीने से डिप्रेशन का इलाज भी करवा रहे थे। कोरोना वायरस के कारण महामारी के समय में दुनियाभर से कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी है। हताशा और निराशा के बीच व्यक्ति की कोशिश जल्द से जल्द उबरने की होनी चाहिए। मनोचिकित्सक अक्सर सलाह देते हैं कि डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति को अपनों का साथ जरूरी होता है। उन्हें काउंसिलिंग की जरूरत होती है। देश भर में कई संस्थाएं लोगों को डिप्रेशन से उबरने में मदद करती है।
डिप्रेशन में हैं तो इन हेल्पलाइन नंबरों पर करें कॉल, निराशा या अवसाद नहीं जिंदगी चुनें
कोरोना महामारी के बीच इस मौजूदा समय में बहुत सारे लोगों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ी है। बहुत सारे लोगों को नौकरी से निकाला तो नहीं गया है, लेकिन उनकी सैलरी रुकी हुई है या फिर काट ली गई है। बड़ी संख्या में लोगों का पलायन हुआ है। मजदूरों की स्थिति तो देख ही चुके हैं। मनोचिकित्सकों के मुताबिक, ऐसे हालात में बहुत सारे लोग डिप्रेशन झेल रहे होंगे। ऐसे में अगर कोई हमारा करीबी निराशा या हताशा महसूस करता है, तो हमारी कोशिश होती है उसकी मदद की जाए। ऐसे हालात में ही मदद के लिए कई संस्थाएं काम करती है।
देश में लॉकडाउन के बीच पिछले दिनों केंद्र सरकार ने भी माना है कि लोग डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं। इसी डिप्रेशन की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, जहां कॉल कर सलाह ली जा सकती है। मानसिक अवसाद, चिंता या अन्य किसी मानसिक उलझन को दूर करने के लिए जारी टोल फ्री नंबर पर लोग बेझिझक कॉल कर सकते हैं और अपनी उलझन दूर कर सकते हैं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस (NIMHANS) के डॉक्टरों ने टोल फ्री नंबर 08046110007 जारी किया है। इस नंबर पर डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति कॉल कर अपनी समस्या बता सकते हैं, जहां डॉक्टर उन्हें जरूरी सलाह देंगे और समाधान बताएंगे। लॉकडाउन में डिप्रेशन बड़ी समस्या नहीं बन जाए, इसके लिए डॉक्टरों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। डॉक्टरों को टेलीमेडिसिन की भी ट्रेनिंग दी जा रही है।
हेल्पलाइन संस्थाओं की लें मदद
मानसिक तनाव से जूझ रहे लोग डिप्रेशन बढ़ने की स्थिति में उल्टे-सीधे कदम उठाने के बारे में सोचने लगते हैं। यहां तक कि कुछ लोग खुदकुशी के बारे में भी सोचने लगते हैं। उन्हें लगता है कि उनके लिए जीवन में कुछ बचा नहीं है और हर तरफ से हताशा और निराशा उन्हें घेर लेती है। ऐसे लोगों की मदद के लिए कई स्वयंसेवी संस्थाएं और अस्पताल सहायता उपलब्ध कराते हैं। इन हेल्पलाइन सुविधाओं के जरिए लोग खुल कर अपनी बात और समस्याएं बता पाते हैं। कई संस्थाएं फोन कॉल के जरिए निर्धारित समय तक सेवा देती है तो कई संस्थाएं 24x7 यानी पूरे सप्ताह 24 घंटे यह सुविधा देती हैं।