Medically Reviewed by Dr. Vijayant Kumar Sachan
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम.एस (जनरल सर्जरी), डीएनबी (सर्जरी गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी)
अनुभव- 8 वर्ष
डायबिटीज के मरीजों के लिए चीनी युक्त और मीठे पेय पदार्थों का सेवन खतरनाक हो सकता है, ये तो आप जानते होंगे। अब एक नए अध्ययन में यह दावा किया जा रहा है कि शुगर ड्रिंक की वजह से किशोरों और युवा वयस्कों में कोलोरेक्टल कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। दरअसल, आंत का कैंसर (कॉलन कैंसर) और मलाशय कैंसर (रेक्टल कैंसर) एक साथ हो सकते हैं, जिसे 'कोलोरेक्टल कैंसर' कहा जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि पिछले कुछ सालों में इसके मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। मेडिकल जर्नल गट में प्रकाशित नए अध्ययन में कोलोरेक्टल कैंसर और शुगर ड्रिंक के बीच के संबंधों के बारे में बताया गया है। इस अध्ययन में 94,464 नर्सों को शामिल किया गया था। इसमें 41,272 वैसे नर्सों की शारीरिक समस्याओं को बारीकी से देखा गया, जिन्होंने 13 से 18 साल के बीच चीनी युक्त और मीठे पेय पदार्थों के सेवन का रिकॉर्ड रखा था। इसमें सॉफ्ट ड्रिंक से लेकर अलग-अलग तरह की शुगर-टी (चाय) और सेब, संतरा, अंगूर जैसे फलों के जूस का सेवन शामिल है।
अध्ययन में दावा: शुगर ड्रिंक बढ़ा रहा कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा, लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अध्ययन के मुताबिक, करीब 24 साल के फॉलोअप के बाद शोधकर्ताओं को नर्सों में कोलोरेक्टल कैंसर के 109 मामले मिले। अध्ययन में यह पाया गया कि जो महिलाएं हफ्ते में केवल एक शुगर युक्त ड्रिंक लेती थीं, उनकी तुलना में हफ्ते में दो या दो से अधिक बार शुगर युक्त ड्रिंक लेने वाली महिलाओं में कैंसर का खतरा दोगुना था।
अध्ययन के मुताबिक, शुगर युक्त पेय पदार्थ की हर एक सर्विंग के साथ कैंसर का खतरा 16 फीसदी तक बढ़ जाता है। वही, 13 से 18 साल की उम्र के किशोर और युवा वयस्क अगर एक दिन में एक शुगर युक्त ड्रिंक लेते हैं, तो उनमें कैंसर का खतरा 32 फीसदी तक बढ़ जाता है। लेकिन अगर इसकी जगह पर कॉफी या कम वसा वाले दूध का सेवन किया जाए तो कैंसर का खतरा 17 से 36 फीसदी तक कम हो सकता है।
कोलोरेक्टल कैंसर के अन्य जोखिम कारक क्या हैं?
- डायबिटीज
- मोटापा
- शारीरिक निष्क्रियता
- धूम्रपान और शराब का सेवन
कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षण क्या हैं?
- लगातार कमजोरी या थकान महसूस करना और भूख न लगना
- वजन कम होना
- शरीर में खून की कमी (एनीमिया)
- पेट में दर्द या बेचैनी
- मल में लाल या काले रंग का खून का धब्बा
- लगातार दस्त, कब्जियत
हालांकि यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि इनमें से कई लक्षण अन्य बीमारियों में भी हो सकते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि इस संबंध में डॉक्टर से सलाह लें।
स्रोत और संदर्भ:
Sugar-sweetened beverage intake in adulthood and adolescence and risk of early-onset colorectal cancer among women
https://gut.bmj.com/content/early/2021/05/09/gutjnl-2020-323450
नोट: यह लेख मेडिकल जर्नल गट में प्रकाशित रिसर्च रिपोर्ट और डॉ. विजयंत कुमार सचान से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं।
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