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Study: अक्सर पीते हैं कॉफी या फ्रूट जूस तो हो जाइए सावधान, कहीं ये बढ़ा न दें स्ट्रोक का खतरा?

Mon, 07 Oct 2024 07:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 07 Oct 2024 07:30 PM IST
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study says drinking too much coffee or carbonated beverages increases risk of stroke
कॉफी पीना फायदेमंद है या हानिकारक - फोटो : Freepik.com

ऑफिस में बैठे-बैठे अगर आप भी दिनभर में तीन-चार कप कॉफी पी जाते हैं तो अब जरा सावधान हो जाइए। आपकी ये आदत कहीं जानलेवा न साबित हो जाए? असल में एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने कुछ पेय पदार्थों से होने वाले गंभीर दुष्प्रभावों को लेकर लोगों को सावधान किया है। शोधकर्ताओं ने कहा, जो लोग कार्बोनेटेड पेय पदार्थ जैसे कोल्ड ड्रिंक्स या सोडा, पैक्ड फलों का जूस या कॉफी का अधिक सेवन करते हैं उनमें स्ट्रोक होने का जोखिम अधिक हो सकता है। स्ट्रोक को दुनियाभर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है।



जर्नल ऑफ स्ट्रोक में प्रकाशित शोध के अनुसार दिन में चार कप से ज्यादा कॉफी पीने से स्ट्रोक का जोखिम 37% बढ़ जाता है। कार्बोनेटेड पेय पदार्थों के लगातार सेवन से स्ट्रोक का जोखिम 22% और पैक्ड फलों के जूस से 37% बढ़ जाता है।

अगर आप भी अक्सर इन पेय पदार्थों का सेवन करते हैं तो सावधान हो जाइए। 

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ब्रेन स्ट्रोक का खतरा - फोटो : Freepik.com

कुछ पेय पदार्थ बढ़ा रहे हैं स्ट्रोक का खतरा

असल में खाने-पीने की आदतों का सेहत पर किस तरह से असर होता है, इसे समझने के लिए शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया। 

आयरलैंड के गैलवे विश्वविद्यालय में क्लिनिकल महामारी विज्ञान के प्रोफेसर एंड्रयू स्मिथ कहते हैं, एक डॉक्टर और स्ट्रोक के जोखिम पर शोध करने वाले व्यक्ति के रूप में, मैं सभी लोगों को फिजी ड्रिंक्स, पैक्ड जूस का सेवन कम से कम करने की सलाह देता हूं। हमारे अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रतिदिन एक कार्बोनेटेड पेय पदार्थ पीने से आपमें स्ट्रोक का जोखिम 22% तक बढ़ सकता है। पैक्ड जूस पीने से स्ट्रोक का खतरा महिलाओं में सबसे अधिक देखा गया है।

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फलों के जूस - फोटो : freepik.com

क्यों नुकसानदायक हैं पैक्ड जूस?

असल में बाजार में मिलने वाले फलों के पैक्ड जूस में अधिक मात्रा में एडेड शुगर और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं, इसी वजह से इन्हें खतरनाक पाया गया है। ये तत्व पैक्ड जूस में मौजूद फलों के लाभ को भी कम कर देते हैं। प्रोफेसर एंड्रयू स्मिथ कहते हैं, जूस पीना चाहते हैं तो हमेशा ताजे फलों का जूस लें, पैक्ड नहीं।

इसी तरह ज्यादा कॉफी भी हानिकारक है। तीन-चार कप रोजाना कॉफी पीना आपके जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है।

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कॉफी पीने के नुकसान - फोटो : Freepik.comAl

ज्यादा कॉफी भी ठीक नहीं

पेय पदार्थों को लेकर हुए एक अन्य अध्ययन में स्ट्रोक के खतरे को कम करने के तरीके भी बताए गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कॉफी-पैक्ड जूस की जगह चाय पीना अच्छा विकल्प हो सकता है। चाय के सेवन से स्ट्रोक के खतरे को 27% से 29% तक कम किया जा सकता है,  हालांकि चाय में दूध मिला देने से  ये लाभ कम हो जाते हैं।

दिन में तीन से चार कप ब्लैक टी या ग्रीन टी पीना अच्छा माना जा सकता है। ब्लैक टी पीने वालों में स्ट्रोक के जोखिम में 29% की कमी देखी गई है। इसी तरह दिन में तीन से चार कप ग्रीन-टी पीने से स्ट्रोक का जोखिम 27% कम हो सकता है।

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पैक्ड जूस है नुकसानदायक - फोटो : Freepik.com

पैक्ड जूस को लेकर पहले भी किया गया है सावधान

ये अध्ययन अवलोकन पर आधारित हैं। हालांकि इससे पहले के भी कई अध्ययनों में पैक्ड जूस पीने से होने वाले दुष्प्रभावों को लेकर सावधान किया जाता रहा है। यूएस में 45 प्रकार के पैक्ड जूस के परीक्षण में पाया गया कि इनमें से कई में लेड का स्तर बहुत अधिक था। ये धातुएं बच्चों में न्यूरोडेवलपमेंटल समस्याओं का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा पैक्ड जूस में एडेड शुगर की भी मात्रा अधिक होती है जिससे टाइप-2 डायबिटीज और क्रोनिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।


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स्रोत और संदर्भ
Carbonated Beverage, Fruit Drink, and Water Consumption and Risk of Acute Stroke: the INTERSTROKE Case-Control Study

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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