नमक और चीनी के सेवन को संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए कई प्रकार से हानिकारक माना जाता रहा है। इसके अधिक सेवन से डायबिटीज, शरीर में इंफ्लामेशन से लेकर ब्लड प्रेशर और हार्ट की बीमारियों का खतरा हो सकता है। हालांकि नमक-चीनी से सेहत को होने वाले नुकसान यहीं तक सीमित नहीं हैं, इससे कैंसर होने का खतरा भी काफी बढ़ सकता है।
अध्ययन में खुलासा: भारतीय ब्रांड वाले नमक और चीनी में पाए गए माइक्रोप्लास्टिक्स, कैंसर का बढ़ सकता है खतरा
नमक और चीनी में माइक्रोप्लास्टिक
इस अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने भारत में बिकने वाले टेबल सॉल्ट, सेंधा नमक, समुद्री नमक और स्थानीय कच्चा नमक जैसे 10 प्रकार के नमकों पर अध्ययन किया। इसके साथ ऑनलाइन और स्थानीय बाजारों से खरीदी गई पांच प्रकार की चीनी का भी परीक्षण किया गया। अध्ययन में सभी नमक और चीनी के सैंपल में फाइबर और छोटे टुकड़ों सहित विभिन्न रूपों में माइक्रोप्लास्टिक्स की उपस्थिति का पता चला। इन माइक्रोप्लास्टिक्स का आकार 0.1 मिमी से 5 मिमी तक था। आयोडीन युक्त नमक में माइक्रोप्लास्टिक्स की उच्चतम मात्रा पाई गई।
इस आकार के माइक्रोप्लास्टिक्स गंभीर रूप से सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले हो सकते हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
टॉक्सिक्स लिंक के संस्थापक-निदेशक रवि अग्रवाल ने बताया, हमारे अध्ययन का उद्देश्य माइक्रोप्लास्टिक पर मौजूदा वैज्ञानिक डेटाबेस में योगदान देना था। माइक्रोप्लास्टिक और इसके कारण होने वाले स्वास्थ्य जोखिम बड़ी चिंता का कारण रहे हैं।
अध्ययन में सभी नमक और चीनी के सैंपल में माइक्रोप्लास्टिक पाया जाना चिंताजनक है। मानव स्वास्थ्य पर माइक्रोप्लास्टिक के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों पर तत्काल, व्यापक शोध की आवश्यकता है। नमक के सैंपलों में माइक्रोप्लास्टिक की सांद्रता प्रति किलोग्राम सूखे वजन में 6.71 से 89.15 टुकड़े तक थी। ये मात्रा हमारी सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने के लिए काफी है।
चीनी में भी पाई गई मात्रा
चीनी के सैंपलों में माइक्रोप्लास्टिक की सांद्रता 11.85 से 68.25 टुकड़े प्रति किलोग्राम तक थी, जिसमें सबसे अधिक सांद्रता नॉन-ऑर्गेनिक चीनी में पाई गई। चूंकि हमारे घरों में नमक और चीनी दोनों का रोजाना सेवन किया जाता रहा है इसलिए जोखिमों को लेकर अलर्ट रहना बहुत जरूरी है।
अध्ययनों में पाया गया था कि औसत भारतीय हर दिन 10.98 ग्राम नमक और लगभग 10 चम्मच चीनी खाता है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की अनुशंसित सीमा से बहुत अधिक है। इसमें माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी और भी चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है।
माइक्रोप्लास्टिक के हो सकते हैं कई नुकसान
हाल ही में किए गए शोध में फेफड़े, हृदय जैसे मानव अंगों और यहां तक कि स्तन के दूध और अजन्मे शिशुओं में भी माइक्रोप्लास्टिक पाया गया है।
शोधकर्ताओं ने कहा अगर आप भी प्लास्टिक की बोतल में पानी पीते हैं तो भी सावधान हो जाइए। प्लास्टिक की बोतल में प्रत्येक लीटर पानी में प्लास्टिक के 100,000 से अधिक सूक्ष्म टुकड़े हो सकते हैं। केवल एक बोतल पानी पीने से हम 10 गुना अधिक मात्रा में प्लास्टिक को शरीर में प्रवेश की अनुमति दे रहे होते हैं। प्लास्टिक के छोटे-छोटे टुकड़े जो बोतलों की परतों से निकालते हैं उन्हें माइक्रोप्लास्टिक्स और नैनोप्लास्टिक्स कहा जाता है। ये समय के साथ शरीर में कई बीमारियों का कारक हो सकते हैं।
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स्रोत और संदर्भ
Microplastic pollution in table salt and sugar: Occurrence, qualification and quantification and risk assessment
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