अलर्ट: कोरोना काल में इस गलती के कारण सामने आए नए सुपरबग, भविष्य में गंभीर संक्रमणों का बढ़ा खतरा
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इंफेक्शन एंड ड्रग रजिस्ट्रेशन जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में दावा किया गया है कि भारत में एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग बढ़ गया है, इसके गंभीर असर देखने को मिल सकते हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के माइक्रोबायोलॉजिस्ट कामिनी वालिया कहती हैं देश पहले से ही एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस का सामना कर रहा है। इस बीच कोरोना के समय में अत्यधिक एंटीबायोटिक दवाओं (विश्व स्वास्थ्य संगठन जिसे सबसे मुश्किल समय में इस्तेमाल की सलाह देता है) का इस्तेमाल इसे और गंभीर बना सकता है।
शोधकर्ताओं ने भारत के दस अस्पतालों में भर्ती 17,563 संक्रमित मरीजों के आंकड़ों का अध्ययन किया। इन मरीजों को पिछले साल एक जून से 30 अगस्त तक भर्ती कराया गया था। डेटा अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि 640 रोगियों को कोई एक अन्य संक्रमण था। इसके अलावा 28 फीसदी कोरोना के मरीजों में बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन भी पाए गए। विशेषज्ञों मे बताया कि आधे से ज्यादा मरीजों के शरीर में मल्टीड्रग्स रेजिस्टेंस ऑर्गनिज्म देखा गया जोकि इस तरह की समस्याओं का कारण माना जा सकता है।
अमर उजाला से बातचीत के दौरान डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेल मेडिसिन के डॉ विक्रमजीत सिंह बताते हैं कि सुपरबग एक तरह के बैक्टीरिया होते हैं। नए सुपरबग एंटीबायोटिक दवाओं के प्रभाव को कमजोर कर सकते हैं। कोविड के समय में लोग घबराकर कई तरह की हाई पावर एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन कर रहे हैं जिसकी वजह से शरीर में रेजिस्टेंस बैक्टीरिया बढ़ रहे हैं।
एंटीबायोटिक दवाओं के कारण अतिरिक्त संक्रमण के चलते 60 फीसदी से अधिक कोविड रोगियों की मृत्यु के मामले सामने आए हैं। वहीं जिन लोगों में इस तरह की दिक्कतें नहीं पाईं गई उनकी मृत्युदर 11 फीसदी के करीब देखी गई है। शोधकर्ताओं ने पाया कि मरने वाले ज्यादातर मरीज मधुमेह, उच्च रक्तचाप समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित थे जिससे उनकी हालत और खराब हो गई।
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स्रोत और संदर्भ:
Secondary Infections in Hospitalized COVID-19 Patients: Indian Experience
अस्वीकरण नोट: यह लेख इंफेक्शन एंड ड्रग रजिस्ट्रेशन जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। अमर उजाला राउटर्स के इस रिपोर्ट को लेकर कोई दावा नहीं करता है।