World Food Safety Day: पाचन से संबंधित समस्याएं अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार से सेहत को प्रभावित कर सकती हैं। पाचन तंत्र, भोजन में मौजूद पोषक तत्वों का ब्रेक डाउन करके ऊर्जा के उत्पादन में मदद करता है, जिससे शरीर ठीक तरीके से काम करता रह सके। हालांकि आहार और लाइफस्टाइल में गड़बड़ी के कारण पाचन स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।
World Food Safety Day: गर्मियों में बढ़ जाती है पाचन की समस्या, जानिए पेट खराब है तो क्या खाएं और क्या नहीं?
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गर्मियों में पाचन की समस्याएं
दिल्ली स्थित अस्पताल में गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ रिजवान खान बताते हैं, गर्मियों में पेट फूलने और गैस की समस्या काफी बढ़ जाती है। गर्मी के दिनों में खान-पान को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है। इन दिनों में ज्यादा तेल मसाले, तली हुई चीजों के सेवन से बचाव करना जरूरी है। अगर आपको अक्सर पेट फूला हुआ महसूस होता है, पेट में दर्द रहता है और शौच से संबंधित दिक्कतें रहती हैं तो यह पाचन संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है।
आइए जानते हैं कि पाचन की समस्याओं से बचे रहने के लिए क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?
पाचन ठीक रखने के लिए क्या खाएं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, पाचन को बेहतर बनाने के लिए फाइबर जैसे पोषक तत्वों से भरपूर चीजों के सेवन को सबसे लाभकारी माना जाता है। दलिया, सेब, हरी सब्जियों और केले जैसे घुलनशील फाइबर, पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। गैस-अपच और पेट दर्द की समस्याओं के जोखिमों को कम करने में भी इससे लाभ पाया जा सकता है।
- गेहूं, जौ जैसे साबुत अनाज प्रोबायोटिक्स से भरपूर होते हैं, जो पेट में स्वस्थ बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं। पोषक तत्वों और फाइबर से भरपूर साबुत अनाज मल त्याग को आसान बनाने और कब्ज को रोकने में मदद करते हैं।
- सेब, नाशपाती, केला, अनानास और पपीता जैसे फल आपके पेट के लिए सबसे अच्छे माने जाते हैं।
- फलों में फाइबर की मात्रा अधिक होती है और ये विटामिन और खनिजों से भरपूर होते हैं जो पाचन में सहायता करते हैं।
पाचन को ठीक रखने के लिए इन चीजों से बनाएं दूरी
कुछ प्रकार के खाद्य पदार्थों का पाचन काफी कठिन होता है, इससे कब्ज और अपच की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। तली हुई चीजों में फाइबर कम होता है और इससे कब्ज-दस्त हो सकते हैं।
- प्रोसेस्ड फूड्स में पोषक तत्वों की कमी होती है और इसमें प्रिजर्वेटिव होते हैं। ये कब्ज और अन्य पाचन समस्याओं को बढ़ा सकते हैं।
- शराब पाचन तंत्र के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। इससे पेट में एसिड उत्पादन भी बढ़ जाता है जिससे पाचन विकारों का जोखिम हो सकता है।
- ज्यादा कॉफी पीना भी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट के लिए नुकसानदायक है। अत्यधिक मात्रा में कैफीन लेने से दस्त और पाचन विकारों का जोखिम हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।