मानव शरीर के हर अंग की अपनी भूमिका और विशेषता होती है। कोई भी एक अंग खराब हो, या फिर उसमें किसी तरह की समस्या हो तो पूरे शरीर पर इसका असर पड़ता है। कुछ अंग तो ऐसे हैं, जिनमें समस्या होने पर हमारा उठना-बैठना और यहां तक कि हिल पाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसा ही एक खास अंग है, हमारा मेरुदंड यानी हमारी रीढ़ की हड्डी। मानव शरीर की संरचना में इसकी अहम भूमिका रहती है। मेरुदंड (spine or backbone) हमारे मस्तिष्क के पिछले भाग से नीचे गुदा के पास तक जाती है। इसमें 33 खंड होते हैं। मेरुदंड के भीतर मेरुनाल(spinal canal) में ही मेरुरज्जु(spinal cord) सुरक्षित रहता है। मेरुदंड की हड्डियां अच्छी हालत में हो यानी कि उनकी सेहत अच्छी हो तो यह रीढ़ के लिए बहुत अच्छा होता है। आइए विशेषज्ञों से जानते हैं कि रीढ़ की हड्डी का ख्याल कैसे रखा जाए:
Spinal Awareness: अपनी रीढ़ की हड्डी के बारे में कितना जानते हैं आप, कैसे रखें इनका ख्याल, चार विशेषज्ञों से जानें
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स्पाइन एंड न्यूरो सर्जरी, पारस अस्पताल, गुरुग्राम के निदेशक डॉ. सुमित सिन्हा का कहना है कि कोरोना काल में वर्क फ्रॉम होम की आदत ने हमारी रीढ़ की हड्डी की समस्या को बढ़ा दिया है। पिछले कुछ महीनों में रीढ़ की हड्डी की समस्या बढ़ी है। पहले जहां बुजुर्गों को और दुर्घटनाग्रस्त लोगों तक यह समस्या सीमित रहती थी, अब आम हो गई है। कोरोनो काल में पता चला है कि इससे अब बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं। रीढ़ से संबंधित समस्या को दूर रखने के लिए हमें सामान्य व्यायाम और पेट-पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने वाली फिजिकल एक्टिविटी यानी शारीरिक गतिविधि करने की जरूरत है।
कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल, गाजियाबाद के आर्थोपेडिक-कंसल्टेंट डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने कहा, "सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे में 'पीक बोन मास' यानी हड्डी का सबसे ज्यादा द्रव्यमान हो। जब हड्डियां अपनी अधिकतम ताकत और घनत्व तक पहुंच जाती है, तो यह उनके लिए ग्रोथ माइलस्टोन साबित होता है। हमें बच्चों की हड्डियों को स्वस्थ रूप से विकसित करना सुनिश्चित करना चाहिए। जिस बच्चे की हड्डी का बोन मॉस अच्छा होता है, लेकिन बोन मिनरल डेंसिटी कम होती है, उनमें ऑस्टियोपीनिया या ऑस्टियोपोरोसिस का विकास अपेक्षाकृत जल्दी होता है। इससे रीढ़ की सेहत भी प्रभावित हो सकती है।
डॉ. वर्मा बताते हैं कि 18 साल की उम्र में लड़कियों में पीक बोन मॉस हो जाता है और लड़कों में 20 साल की उम्र में पीक बोन मॉस होता है। लाइफस्टाइल से एडल्ट में पीक बोन मास 40 फीसदी तक प्रभावित होता है। बच्चों को एक्टिविटी कराना बहुत जरूरी होता है भले ही आप घर के अंदर हो, बच्चे को कुछ न कुछ फिजकल एक्टिविटी कराते रहें। इसके साथ ही उन्हें प्रोटीन से भरपूर खाना भी खिलाएं यह स्पोंजी हड्डियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विटामिन डी की कमी को पूरा करने के करने के लिए बच्चों को हल्की धूप में खेलने के लिए भी प्रोत्साहित करना चाहिए।
जिंदल नेचरक्योर इंस्टीट्यूट के मुख्य योग पदाधिकारी डॉ. राजीव राजेश कहते हैं कि योग करने से आप अपनी रीढ़ को स्वस्थ बना सकते हैं। इससे एक उम्र के बाद होने वाले दर्द और ऐंठन को दूर भी कर सकते हैं। मानव की रीढ़ की बनावट बहुत जटिल होती है। इसमें हड्डियां, मांस, टेंडनन्स (कंडरा), लिगामेंट (स्नायुबंधन) और नसें एक साथ बंधी होती हैं। रीढ़ ही हमें सीधे खड़े होने की ताकत देता है। उम्र के ढलान के साथ ही रीढ़ की समस्या शुरू हो जाती है। अक्सर लोग इसे तब तक महसूस नहीं करते जब तक यह दर्द नहीं देने लगती है। इससे बचने के लिए दिनचर्या में योग को शामिल करना जरूरी है।