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Sleep apnea: जानलेवा हो सकती है नींद की यह समस्या, जानिए किन उपायों से पा सकते हैं आराम?

Tue, 06 Sep 2022 08:02 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 06 Sep 2022 08:02 PM IST
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स्लीप एपनिया एक गंभीर समस्या है - फोटो : iStock

नींद से संबंधित समस्याएं शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। रात में नींद न पूरी होने की समस्या आपमें डायबिटीज, हृदय रोग, चिंता-तनाव जैसी परेशानियों के जोखिम को बढ़ाने वाली हो सकती है। पर क्या आप जानते हैं कि कुछ नींद विकार जानलेवा तक हो सकते हैं?



स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, स्लीप एपनिया ऐसी ही एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो अक्सर लोगों में गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण बनती है, कुछ स्थितियों में इसके कारण जान जाने का भी खतरा हो सकता है। नींद से संबंधित इस विकार को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी  लोगों को सावधान रहने की सलाह देते हैं। 

स्लीप एपनिया एक गंभीर स्लीपिंग डिसऑर्डर है जिसमें सोते समय अक्सर कुछ सेकेंड्स के लिए सांस बंद हो जाती है। यदि आप जोर-जोर से खर्राटे लेते हैं या पूरी रात की नींद के बाद भी आपको थकान महसूस होती रहती हैं, तो इसे स्लीप एपनिया का संकेत माना जा सकता है। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया की समस्या लोगों में अधिक देखी जाती है। अगर आपको लगता है कि आपको स्लीप एपनिया हो सकता है, तो अपने डॉक्टर से जरूर मिलें। समय पर उपचार के माध्यम से लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा आपमें  हृदय  और अन्य जटिलताओं को रोकने में भी इससे मदद मिल सकती है। 

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नींद विकारों के बारे में जानिए - फोटो : istock

स्लीप एपनिया के लक्षणों के बारे में जानिए

स्लीप एपनिया नींद से संबंधित एक खतरनाक विकार है जिसके बारे में जानकारी रखते हुए सभी लोगों को सावधानी बरतते रहना चाहिए। यदि आपको भी इसके लक्षण महसूस हो रहे हैं तो समय पर डॉक्टर से मिलकर इलाज जरूर प्राप्त करें। इन लक्षणों में से दो से अधिक समस्याओं का अनुभव होते रहना स्लीप एपनिया हो सकता है। 

  • जोर से खर्राटे लेना।
  • नींद के दौरान अचानक सांस बंद होने की समस्या, यह अक्सर दूसरे लोग ही देख पाते हैं। 
  • नींद के दौरान हांफना
  • सुबह उठने के साथ अक्सर मुंह का सूखा रहना। 
  • सुबह अत्यधिक सिरदर्द बना रहना।
  • सोने में कठिनाई (अनिद्रा)
  • दिन में बहुत नींद आना (हाइपरसोमनिया)
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वजन को कंट्रोल में रखना बहुत आवश्यक - फोटो : iStock

स्लीप एपनिया से बचने के लिए वजन करें कंट्रोल

अधिक वजन की समस्या वाले लोगों में स्लीप एपनिया की दिक्कत अधिक देखने को मिलती रही है। इससे बचाव के लिए वजन कम करना आपको लाभ दे सकता है।  कुछ मामलों में वजन कम कर लेने से स्वत: ही स्लीप एपनिया की दिक्कत ठीक हो जाती है। वजन को कंट्रोल में रखकर आप कई अन्य तरह की हृदय और डायबिटीज जैसी जटिलताओं से भी खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

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व्यायाम से मिलता है लाभ - फोटो : istock

नियमित व्यायाम बहुत आवश्यक

नियमित व्यायाम की आदत को स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्लीप एपनिया की समस्या वाले लोगों में लाभकारी पाया है। रोजाना कम से कम 30 मिनट के मध्यम गति वाले व्यायाम को करने से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है और यह नींद विकारों को दूर करने में भी आपके लिए सहायक है। व्यायाम करने वाले लोगों में वजन बढ़ने का खतरा कम रहता है, जिसे इस तरह के विकारों को दूर करने के लिए आवश्यक माना जाता है।  

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सोने के तरीके का स्लीप एपनिया पर असर - फोटो : Pixabay

पेट के बल सोने से मिलता है लाभ

पेट के बल सोने की आदत आपको बेहतर तरीके से सांस लेने में मदद करती है। इससे फेफड़ों को आराम मिलता है और आप अच्छी तरह से सांस ले सकते हैं। स्लीप एपनिया की समस्या में सोने के तरीके का भी विशेष प्रभाव होता है। कुछ लोगों ने पाया है कि उन्हें एक करवट सोने से भी सांस लेने में आसानी होती है। अपनी सुविधा के अनुसार सोने का तरीका बनाएं। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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