एक मशीन लर्निंग एल्गोरिथम, जो आत्महत्या के प्रयास की भविष्यवाणी करता है, हाल ही में इसका वेंडरबिल्ट मेडिकल सेंटर में परीक्षण किया गया, यह वही संस्था है, जहां इसे विकसित किया गया था। अप्रैल 2020 में समाप्त होने वाले इस अध्ययन पर लगातार 11 महीनों से, आत्महत्या के प्रयास की इन भविष्यवाणियों पर चुपचाप काम किया जा रहा था क्योंकि वयस्क रोगियों को वेंडरबिल्ट विश्वविद्यालय मेडिकल सेंटर में देखा गया था। अगली स्लाइड्स से जानिए शोध से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।
अमेरिका में मशीन लर्निंग एल्गोरिथम से पता लगाया आत्महत्या के प्रयासों का स्तर, सुसाइड की दरों में आ सकेगी कमी
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इस तरह करता है काम-
इस एल्गोरिथ्म से वेंडरबिल्ट सुसाइड अटैंप्ट और आइडिएशन लाइकलीहूड मॉडल को डब किया गया जो कि आत्महत्या के प्रयास और विचार की संभावनाओं पर काम करता है। इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड से आत्मघाती विचारों की विस्तृत रूप में नियमित जानकारी लेकर यह मॉडल आत्महत्या के प्रयास के 30 दिन के भीतर के जोखिम की गणना करता है।
अमेरिका की स्थिति चिंताजनक है
अमेरिका में एक विशेष पीढ़ी में आत्महत्या की संख्या चिंताजनक है। प्रतिवर्ष एक लाख लोगों में 14 लोग आत्महत्या करते हैं, यही कारण है कि इस देश में मौतों का यह दसवां सबसे प्रचलित कारण बन चुका है। कुल आत्महत्याओं में 8.5 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है। यही वजह है कि कॉलिन वॉल्श, एमडी, एमए और सहकर्मियों ने इस एल्गोरिदम के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया और जेएमए नेटवर्क ओपन में अध्ययन की सूचना दी।
एक-तिहाई लोग आत्महत्या करना चाहते थे
एल्गोरिथ्म द्वारा निकाले गए जोखिम स्कोर के अनुसार आठ समूहों में वयस्क रोगियों को अलग करने पर, शीर्ष परत में ही लगभग एक तिहाई से अधिक लोग आत्महत्या के लिए तैयार थे,लगभग सभी मामलों में आधे लोगों के दिमाग में आत्महत्या के विचार थे। इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड में लिखित साक्ष्य के रूप में यह दर्ज किया गया है कि उच्च जोखिम वाले समूह में 23 व्यक्तियों में से एक में आत्मघाती विचारों की रिपोर्ट की और 271 में से एक ने आत्महत्या का प्रयास किया।
हर मरीज की स्क्रीनिंग संभव नहीं है
बायोमेडिकल इंफॉर्मेटिक्स, मेडिसिन और साइकियाट्री के सहायक प्रोफेसर वाल्श ने कहा, "आज मेडिकल सेंटर में हम हर मरीज को आत्महत्या के जोखिम में नहीं डाल सकते हैं और न ही हमें यह करना चाहिए।" "लेकिन हम जानते हैं कि कुछ व्यक्ति ऐसे भी हैं जिनमें वे कारक हैं लेकिन उनके लिए जोखिम न हो इसलिए उनकी स्क्रीनिंग नहीं हो सकती। यह जोखिम मॉडल उस स्क्रीनिंग पर एक पहला पास है और सुझाव दे सकता है कि कौन से रोगियों को ऐसी सेटिंग्स में स्क्रीन करना है जहां आत्महत्या की अक्सर चर्चा नहीं होती है।"