भारत सहित दुनिया के ज्यादातर हिस्सों से कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामलों में कमी की खबरें सामने आ रही हैं। बेहद संक्रामक माने जा रहे इस वैरिएंट के कम होते केस राहत देने वाले हैं, हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय लापरवाही बरतनी भारी पड़ सकती है। असल में ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर किए जा रहे अध्ययनों में इसके कारण होने वाले रि-इंफेक्शन के मामलों में बढ़ोतरी को लेकर अलर्ट किया गया है। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि कोरोना के तमाम वैरिएंट्स की तुलना में ओमिक्रॉन वैरिएंट से रि-इंफेक्शन का खतरा पांच गुना तक अधिक हो सकता है। दुनिया के तमाम देशों से कोविड से पुन: संक्रमित लोगों की संख्या में वृद्धि के मामले भी रिपोर्ट किए जा रहे हैं।
अध्ययन में दावा: ओमिक्रॉन से रि-इंफेक्शन का खतरा पांच गुना अधिक, जानिए इसके कारण और लक्षणों के बारे में विस्तार से
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बढ़ गया है रि-इंफेक्शन रेट
नेचर जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में ओमिक्रॉन के कारण दोबारा संक्रमण के जोखिम पर जोर दिया गया है। यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार ओमिक्रॉन का पता चलने से पहले अन्य वैरिएंट्स के कारण रि-इंफेक्शन का रेट एक फीसदी के करीब था। हालांकि अब ओमिक्रॉन के कारण यह दर बढ़कर 10 फीसदी तक पहुंच गई है। तमाम देशों से लोगों के ओमिक्रॉन से दोबारा संक्रमित होने मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं।
क्यों हो रहे हैं रि-इंफेक्शन?
कोरोना वायरस के रि-इंफेक्शन के खतरे को लेकर ऑस्ट्रेलिया स्थित डीकिन विश्वविद्यालय में महामारी विज्ञानी डॉ कैथरीन बेनेट कहती हैं, ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण संक्रमण के मामले काफी अधिक देखे गए, संभवत: यही कारण है कि इससे दोबारा संक्रमण का खतरा भी अधिक है। यह वैरिएंट तेजी से फैलता है इसे भी एक कारण के तौर पर देखा जा रहा है। कई अध्ययनों में यह भी पता चलता है कि कोरोना का यह वैरिएंट आसानी से प्रतिरक्षा को चकमा दे सकता है, इसकी यह प्रकृति भी पुन: संक्रमण के जोखिम को बढ़ा देती है।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य संगठन?
ओमिक्रॉन के कारण रि-इंफेक्शन के बढ़ते खतरे को लेकर यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है, "रि-इंफेक्शन का मतलब, एक व्यक्ति जो पहले संक्रमित था उसके पूरी तरह से ठीक होने का बाद उसका फिर बाद में संक्रमित होना है। संक्रमण की शुरुआत में माना जा रहा था कि एक बार वायरस से संक्रमित होने के बाद शरीर में अगले संक्रमण से सुरक्षा के लिए प्रतिरक्षा निर्मित हो जाती है, हालांकि कोविड-19 के मामले में रि-इंफेक्शन के केस देखने को मिल रहे हैं।
ओमिक्रॉन रि-इंफेक्शन को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कहता है, प्रारंभिक साक्ष्य से पता चलता है कि ओमिक्रॉन के साथ पुन: संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसके जोखिम कारकों को लेकर अध्ययन किए जा रहे हैं।
पहले संक्रमण से कितने अलग होते हैं रि-इंफेक्शन के लक्षण?
अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि वैसे तो ओमिक्रॉन के कारण होने वाले संक्रमण में लक्षणों को हल्का माना जाता है, हालांकि इससे दोबारा संक्रमण की स्थिति में गंभीर लक्षण भी हो सकते हैं। अब तक के आंकड़ों से पता चलता है कि पहले संक्रमण और रि-इंफेक्शन के लक्षणों में फिलहाल बहुत अंतर नहीं है। प्रारंभिक संक्रमण के तीन महीनों के बाद दोबारा संक्रमण हो सकता है। सभी लोगों को लगातार कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर सावधानियां बरतती रहनी चाहिए।
----------------
स्रोत और संदर्भ
Daily briefing: Why COVID-19 reinfections are surging
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।