गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस दौरान खान-पान अच्छा रखने का सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु के सेहत पर पड़ता है। यही कारण है कि इस दौरान महिला को अपने सेहत का विशेष ख्याल रखते हुए पौष्टिक आहार के सेवन की सलाह दी जाती है। गर्भावस्था जितना महत्वपूर्ण समय होता है, माँ और बच्चे दोनों के लिए यह उतना ही नाजुक भी होता है। इस दौरान अस्वस्थ आदतें बच्चे पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती हैं। इतना ही नहीं गर्भकाल के दौरान महिलाओं को दवाइयों के सेवन के प्रति भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, क्योंकि गलत दवाओं का असर बच्चे के स्वास्थ्य को तमाम प्रकार के जोखिम में भी डाल सकता है।
अध्ययन: गर्भावस्था में इस दवा का सेवन बच्चे को बना सकता है मानसिक रोगी, इन बातों का भी रखें ध्यान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गर्भावस्ता में पैरासिटामोल का सेवन
यूरोपियन जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामोल का ज्यादा सेवन बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इससे बचपन में अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) की समस्या हो सकती है। 70,000 से अधिक बच्चों पर किए गए अध्ययन के आधार पर विशेषज्ञ इस नतीजे पर पहुंचे हैं।
बच्चों में ऑटिज्म की समस्या
अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं ने पैरासिटामोल (एसिटामिनोफेन) का ज्यादा सेवन किया उनके बच्चों में मानसिक रोगों की समस्या देखने को मिली। जो बच्चे जन्म से पहले पैरासिटामोल के संपर्क में आए उनमें से 19 फीसदी बच्चों को ऑटिस्टिक स्पेक्ट्रम कंडीशन (एएससी) वहीं 21 फीसदी बच्चों में एडीएचडी के लक्षण देखे गए।
बच्चों के मानसिक सेहत पर असर
अध्ययन के लेखक जोर्डी सनयर बताते हैं कि इस अध्ययन के आधार पर यह कहा जा सकता है कि गर्भवती महिलाओं या बच्चों को पैरासिटामोल का सेवन तभी करना चाहिए, जब इसकी बहुत ज्यादा जरूरत हो। छोटी-छोटी समस्याओं में पैरासिटामोल का सेवन बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। इससे बच्चों को चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित न कर पाने, चीजों को भूल जाने जैसी तमाम तरह की समस्याएं हो सकती हैं।
महिला रोग विशेषज्ञ बताती हैं कि गर्भकाल में महिलाओं को स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखने की जरूरत होती है। यह पांच बातें सभी को ध्यान में रखनी चाहिए।
- गर्भावस्था के दौरान होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों के कारण महिलाओं को ऊर्जा में कमी महसूस हो सकती है। छोटी-छोटी नींद लेने से भी इस तरह की समस्याओं को कम किया जा सकता है। गर्भावस्था में पर्याप्त नींद मां और बच्चे दोनों की सेहत को ठीक रखने के लिए बेहद जरूरी है।
- गर्भावस्था के दौरान शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद आवश्यक है, समय-समय पर पानी पीती रहें।
- गर्भावस्था के दौरान कैफीन के अधिक सेवन से बचना चाहिए, यह बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है।
- गर्भवती महिलाओं को धूम्रपान बिल्कुल नहीं करना रहना चाहिए।
- व्यायाम करने से मानसिक सेहत और गर्भावस्था के कारण होने वाली जटिलताओं को कम किया जा सकता है। किसी विशेषज्ञ की सलाह पर नियमित रूप से हल्के स्तर के व्यायाम जरूर करें।
स्रोत और संदर्भ:
Prenatal and postnatal exposure to acetaminophen in relation to autism spectrum and attention-deficit and hyperactivity symptoms in childhood: Meta-analysis in six European population-based cohorts
अस्वीकरण नोट: यह लेख यूरोपियन जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। इसमें बताई गई किसी भी दवा के उपयोग को लेकर अमर उजाला कोई दावा नहीं करता है।