केले, भारत में सबसे पसंदीदा फलों में से हैं जो हर मौसम में उपलब्ध होते हैं। केलों को सेहत के लिए कई प्रकार से लाभकारी पाया गया है। इस फल को खाने से होने वाले फायदों को जानने के लिए किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि यह आपके कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप को नियंत्रण में रखने में मदद कर सकता है। शरीर में सूजन को कम करने और इसमें इसमें मौजूद फाइबर के कारण पाचन स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए भी केले खाना फायदेमंद माना जाता रहा है।
हेल्थ टिप्स: कच्चा या पका केला, सेहत के लिए कौन है ज्यादा फायदेमंद?
कच्चे और पके केले दिखने में एक जैसे होते हैं, लेकिन पकने के साथ इनमें मौजूद स्टार्च और शुगर की संरचना बदल जाती है। पका केला मीठा और आसानी से पचने वाला होता है, जबकि कच्चे केले में प्रतिरोधी स्टार्च अधिक होता है। डायबिटीज वालों को केला चुनते समय खास सावधानी रखनी चाहिए।
पके केले और इसके फायदे
पके केले सबसे ज्यादा सेवन किए जाते हैं। कच्चे केले की तुलना में पके केले मीठे और स्वाद में बेहतर होते हैं। इनमें लगभग 8 प्रतिशत स्टार्च और लगभग 91 प्रतिशत शुगर की मात्रा होती है। कच्चे केले में मौजूद प्रतिरोधी स्टार्च केले के पकने के साथ साधारण शुगर के रूप में बदल जाता है।
- कच्चे केले की तुलना में पके केले पचाने में आसान होते हैं क्योंकि इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है।जब केले पूरी तरह से पक जाते हैं, तो वे ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर (टीएनएफ) नामक पदार्थ का उत्पादन करते हैं और यह यौगिक कैंसर रोधी गुणों के लिए जाना जाता है।
- हालांकि पके केले, कच्चे की तुलना में अधिक मीठे होते हैं, इसलिए टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों के लिए यह दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है।
हालांकि, यही बढ़ी हुई मिठास टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों के लिए चिंता का कारण बन सकती है। ऐसे लोगों को केले की मात्रा और पकने की अवस्था पर ध्यान देना चाहिए।
कच्चे केले में ऐसा क्या खास है?
कच्चा केला आमतौर पर फल की तरह खाने के बजाय सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी सबसे खास बात इसमें मौजूद प्रतिरोधी स्टार्च की अधिक मात्रा है। यह स्टार्च सामान्य स्टार्च की तरह पूरी तरह जल्दी नहीं पचता और आंतों तक पहुंच सकता है।
- इसी वजह से कच्चे केले को ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ने से रोकने वाली डाइट का हिस्सा माना जाता है। इसमें ऐसे घटक भी पाए जाते हैं जो आंत में अच्छे बैक्टीरिया के लिए उपयोगी हो सकते हैं और पाचन तंत्र की सेहत को सहारा दे सकते हैं।
- कच्चे केले में करीब 40 प्रतिशत तक स्टार्च हो सकता है। लेकिन यही अधिक स्टार्च कुछ लोगों के लिए परेशानी भी पैदा कर सकता है। इसे खाने के बाद पेट फूलना, गैस या भारीपन जैसी शिकायत हो सकती है।
तो आखिर कौन सा केला ज्यादा फायदेमंद?
आहार विशेषज्ञ कहते हैं, दोनों प्रकार के केले अलग-अलग सेट के लाभ वाले होते हैं। अगर आपको डायबिटीज है तो पके केले से परहेज करना चाहिए है। अपनी सेहत के हिसाब से आप केले का चयन कर सकते हैं। दोनों में एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर होता है, दोनों कई प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं ऐसे में यह आपकी सेहत पर निर्भर करता है कि आपको किस केले का चुनाव करना चाहिए।
- अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज या ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या है, तो केले का चुनाव करते समय उसके पकने की अवस्था पर ध्यान देना जरूरी है। पके केले में शुगर की मात्रा ज्यादा होती है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कच्चे केले से अधिक होता है।
- वहीं, कच्चे केले में प्रतिरोधी स्टार्च ज्यादा होने के कारण ब्लड शुगर पर इसका असर अपेक्षाकृत अलग हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि डायबिटीज वाले हर व्यक्ति के लिए कच्चा केला बिना किसी सीमा के सुरक्षित है। मात्रा और पूरी डाइट दोनों मायने रखते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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