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सावधान: बारिश के मौसम में तेजी से फैलती है ये बीमारी, लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
डॉ राजेश मुंडेजा
जनरल फिजीशियन, उजाला सिग्नस अस्पताल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम डी
बारिश के मौसम में तरह-तरह की बीमारियों के होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसमें डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया आदि शामिल हैं। इसके साथ-साथ इस मौसम में लोग 'हे फीवर' का शिकार भी हो जाते हैं। 'हे फीवर' को परागण बुखार भी कहा जाता है। ये बुखार तब होता है, जब बारिश के मौसम में चलने वाली हवाओं के साथ-साथ धूल में फूलों और घास-फूस के कण मिलकर शरीर पर हमला करते हैं। जिन लोगों को धूल, परागण से एलर्जी होती है, उन्हें 'हे फीवर' ज्यादा परेशान करता है। इस बुखार का नाम 'हे फीवर' रखने के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। कहा जाता है कि 19वीं सदी में लोगों को लगता था कि ताजा कटी घास की वजह से ये बुखार लोगों को जकड़ता है। इसीलिए इसे 'हे फीवर' नाम दिया गया। आइए जानते हैं इसके लक्षण और बचाव के उपाय के बारे में...
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
बारिश में क्यों बढ़ जाता है 'हे फीवर' का खतरा?
'हे फीवर' को मेडिकल भाषा में एलर्जिक राइनाइटिस भी कहा जाता है, यानी यह एक तरह से एलर्जी से होने वाली बीमारी है। विशेषज्ञ कहते हैं कि बारिश से एलर्जी की परेशानी बढ़ सकती है। तेज बारिश होने पर फूलों से पराग कण निकल कर हवा में मिल जाते हैं और ऐसे में 'हे फीवर' का खतरा बढ़ जाता है।
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दिन के समय ज्यादा परेशान करता है ये बुखार
विशेषज्ञ कहते हैं कि 'हे फीवर' के शिकार लोगों के दि में खुली हवा में निकलने से परेशानी और बढ़ सकती है। दरअसल, दिन में हवा गर्म होने से परागण ऊपर हवा में उठ आते हैं, जबकि रात में तापमान गिरने पर ये जमीन पर बैठ जाते हैं। अगर आपके आसपास ज्यादा परागण वाले पौधे हैं, तो उससे परेशानी और बढ़ जाएगी।
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'हे फीवर' के लक्षण क्या हैं?
लगातार बेवजह छींक आना
नाक और शरीर में खुजली होना
गले में खराश
नाक बहना
आंख से पानी आना
अधिक थकान महसूस होना
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'हे फीवर' से बचाव के उपाय क्या हैं?
धूल-मिट्टी के संपर्क में आने से बचें
घर से बाहर निकलें तो मुंह और नाक को अच्छी तरह से कवर करें
रोएं वाले जानवरों से दूरी बनाएं
एकदम गर्म से ठंडे और ठंडे से गर्म माहौल में जाने से बचें
साफ-सफाई का ख्याल रखें
नोट: डॉक्टर राजेश मुंडेजा, सऊदी अरब, मॉरीशस, मालदीव और भारत सहित विभिन्न देशों में काम करने के साथ 25+ वर्षों के अनुभव वाले एक जाने-माने चिकित्सक हैं। इन्होंने बीकानेर के एसपी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और एमडी की डिग्री प्राप्त की है। इसके साथ इन्होंने सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय में चिकित्सा विशेषज्ञ के रूप में काम किया है और उजाला सिग्नस अस्पताल में शामिल होने से पहले आजमगढ़ उत्तर प्रदेश के महामृत्युंजय अस्पताल में निर्देशक, वरिष्ठ सलाहकार चिकित्सक और चिकित्सा विभाग के प्रमुख रहे हैं।
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