फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Lung Disease & Blindness: आंखों की रोशनी खतरे में, फेफड़ों की बीमारी बढ़ा सकती है अंधेपन का जोखिम

Thu, 11 Sep 2025 03:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 11 Sep 2025 03:52 PM IST
सार

  • विशेषज्ञों ने एक हालिया अध्ययन में पाया है कि फेफड़ों की बीमारी को अनदेखा करना या इसका इलाज न करा पाना गंभीर दिक्कतों का कारण तो बनता ही है साथ ही इसके चलते अंधेपन का भी जोखिम बढ़ सकता है।

विज्ञापन
pulmonary fibrosis cause changes in vision and blindness how lungs affects eyes
फेफड़ों की बीमारी का आंखों पर असर - फोटो : Freepik.com
loader

आजकल की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में कई प्रकार की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। फेफड़ों की समस्याएं उनमें से एक हैं। स्वाथ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वायु प्रदूषण, धूम्रपान, संक्रमण और गलत जीवनशैली ने फेफड़ों को कमजोर कर दिया है। इसके कारण कम उम्र के लोगों में अस्थमा, फेफड़ों में संक्रमण जैसी कई प्रकार की समस्याएं बढ़ती जा रही है। पल्मोनरी फाइब्रोसिस भी ऐसी ही एक बीमारी है, जो धीरे-धीरे एक बड़ी आबादी को अपना शिकार बनाती जा रही है।

विशेषज्ञों ने एक हालिया अध्ययन में पाया है कि फेफड़ों की इस समस्या को अनदेखा करना या इसका इलाज न कराना गंभीर दिक्कतों का कारण तो बनता ही है साथ ही इसके चलते अंधेपन का भी जोखिम बढ़ सकता है।

ब्रिटेन में डॉक्टर्स की एक टीम ने बताया कि पल्मोनरी फाइब्रोसिस से पीड़ितों को आमतौर पर सांस लेने में तकलीफ, सूखी खांसी, थकान-कमजोरी और हाथ-पैरों की उंगलियों में जकड़न महसूस होती है। हालांकि इसके एक लक्षण से दुनिया अब भी अनजान है। अगर इस बीमारी का समय पर इलाज न हो पाए तो यह अंधापन का कारण बन सकती है।

pulmonary fibrosis cause changes in vision and blindness how lungs affects eyes
पल्मोनरी फाइब्रोसिस- फेफड़ों की गंभीर समस्या - फोटो : Adobe Stock

फेफड़ों की बीमारी आपकी आंखों को कैसे प्रभावित करती है, इस बारे में जानने से पहले पल्मोनरी फ्राइब्रोसिस की समस्या को जान लेना जरूरी है।
 

पल्मोनरी फाइब्रोसिस की समस्या

आंकड़े बताते हैं कि दुनियाभर में पल्मोनरी फाइब्रोसिस लाखों लोगों को प्रभावित करता है। हाल के अनुमानों के अनुसार लगभग 3 से 5 मिलियन (30-50 लाख) लोग इस समस्या से ग्रस्त हैं, जिसमें फेफड़ों में स्कार्स की दिक्कत हो जाती है। यह रोग प्रगतिशील है और अक्सर वृद्धों को प्रभावित करता है। वैश्विक स्तर पर इसके मामले और व्यापकता बढ़ रही है, धीरे-धीरे ये युवाओं को भी अपना शिकार बनाती जा रही है। 

पल्मोनरी फाइब्रोसिस का एक प्रकार इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस आमतौर पर युवाओं में देखी जाने वाली समस्या है। पल्मोनरी फाइब्रोसिस के कारण होने वाली फेफड़ों की समस्याओं को ठीक नहीं किया जा सकता है। दवाइयों और उपचार के माध्यम से जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिल सकती है।

pulmonary fibrosis cause changes in vision and blindness how lungs affects eyes
आंखों की जा सकती है रोशनी - फोटो : Freepik.com

फेफड़ों की बीमारी के कारण आंखों पर असर

पल्मोनरी फाइब्रोसिस के रोगियों को लेकर किए गए एक अध्ययन में विशेषज्ञों ने बताया कि अगर इसका समय रहते इलाज न किया जाए तो इससे आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा हो सकता है।पल्मोनरी फ्राइब्रोसिस को मुख्य रूप से फेफड़ों की बीमारी माना जाता है, लेकिन अक्सर डॉक्टरों और मरीजों को यह एहसास नहीं होता कि इससे आंखें भी प्रभावित हो सकती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फेफड़ों में होने वाली समस्या के कारण रक्त में ऑक्सीजन की कमी होना सामान्य है। ऑक्सीजन की कमी रेटिना और ऑप्टिक तंत्रिका को प्रभावित कर सकती है, जिससे समय के साथ दृष्टि में बदलाव आ सकता है। यही कारण है कि इस बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए नियमित नेत्र परीक्षण भी महत्वपूर्ण हैं। समस्याओं का जल्द पता लगाने से इलाज के माध्यम से गंभीर जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
pulmonary fibrosis cause changes in vision and blindness how lungs affects eyes
आंखों की नियमित जांच जरूरी - फोटो : Freepik.com

क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉक्टरों ने बताया कि जिन लोगों में पल्मोनरी फाइब्रोसिस की दिक्कत होती है उनमें दृष्टि में परिवर्तन, धुंधली दृष्टि से लेकर गंभीर मामलों में रेटिना की क्षति तक की समस्या हो सकता है। शरीर में ऑक्सीजन की कमी, आंखों में रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करने लगती है जिसका आंखों पर असर देखा जा सकता है।

इसके अलावा डॉक्टरों ने कहा कि इस समस्या के इलाज के लिए आमतौर पर कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स को प्रयोग में लाया जाता है। अध्ययन में पाया गया है कि इसके इस्तेमाल से मोतियाबिंद होने का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसको लेकर डॉक्टर्स को भी सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।

ब्रिटेन स्थित ऑप्टिकल एक्सप्रेस में ऑप्टोमेट्रिस्ट और क्लिनिकल सर्विसेज के निदेशक डॉ. स्टीफन हन्नान कहते हैं, अपनी आंखों की रोशनी को बचाए रखने के लिए पल्मोनरी फाइब्रोसिस वाले लोगों को नियमित रूप से आंखों की जांच करवानी चाहिए। ऑक्सीजन के स्तर की निगरानी करना, हाइड्रेटेड रहने और डॉक्टर्स की सलाह पर आई ड्रॉप्स के इस्तेमाल से आंखों की क्षति को रोका जा सकता है।


-----------------------------
नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed