दुनिया के तमाम देशों में पिछले कुछ हफ्तों से कोविड-19 के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। हालिया रिपोर्टस के मुताबिक यूरोपीय देशों में पिछले महीने कोरोना के मामलों में 50 फीसदी का इजाफा हुआ है। रूस जैसे देशों में हालात एक बार फिर से गंभीर होते दिख रहे हैं, यहां पिछले कुछ दिनों से रोजाना 35 हजार से ज्यादा कोरोना के मामले दर्ज किए जा रहे हैं। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां हालात फिलहाल नियंत्रण में हैं, हालांकि एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया के हालिया बयान ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
अध्ययन: इस वजह से कोविड-19 के गंभीर मामलों और मृत्यु दर का बढ़ गया है खतरा, जानिए कैसे करें बचाव?
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प्रदूषण और कोविड-19 के गंभीर मामले
Pollution has a huge effect on respiratory health especially on ppl with lung diseases, asthma as their disease worsens. Pollution can also lead to more severe cases of Covid. Should wear mask as it'll help in protection from both Covid & pollution: Dr Randeep Guleria, AIIMS Dir pic.twitter.com/T02hYub3ku
शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा, वायु प्रदूषण का श्वसन स्वास्थ्य पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। विशेष रूप से यह फेफड़ों और अस्थमा के
रोगियों के लिए बड़ी मुसीबत का कारण बन सकता है। इतना ही नहीं यह भी चिंताजनक बात है कि प्रदूषण के कारण कोविड-19 के गंभीर मामलों की संख्या में भी इजाफा हो सकता है। इन खतरों से बचे रहने के लिए लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। मास्क पहनना आपके लिए बेहद आवश्यक है, यह कोविड-19 और प्रदूषण दोनों से सुरक्षा देने में मदद करेगा।
क्या कहते हैं अध्ययन
अध्ययनों से पता चलता है कि प्रदूषण का बढ़ा हुआ स्तर कोविड-19 रोगियों के लिए बड़ी समस्या का कारण बन सकता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि हवा में प्रदूषकों के साथ कोरोना के वायरस लंबे समय मौजूद रह सकते हैं, यही कारण है कि कोरोना के एयरबोर्न डिजीज का खतरा बढ़ रहा है। यह कोरोना के मामलों को बढ़ाने के साथ गंभीर मामलों का भी कारण बन सकता है।
मृत्यु दर बढ़ने का खतरा
साल 2003 में हुए एक अन्य अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि बढ़ा हुआ प्रदूषण फेफड़ों में सूजन का कारण बनता है। 2003 में अमेरिका और इटली जैसे देशों में सार्स के प्रकोप के दौरान हुए शोध के आधार पर वैज्ञानिक कहते हैं कि जिन हिस्सों में प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक होता है, वहां कोविड-19 के रोगियों के लिए समस्याएं और अधिक बढ़ सकती है। चूंकि प्रदूषण के कारण फेफड़ों में सूजन हो जाती है, ऐसे में प्रदूषण और कोविड-19 के संयोजन से मृत्यु दर बढ़ सकता है।
राजधानी में प्रदूषण के कारण बिगड़े हालात
दीपावली के बाद से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़े प्रदूषण ने हालात बिगाड़ दिए है। पिछले दो दिनों से यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक "गंभीर" श्रेणी में पहुंच गया है, इसके अलावा दिल्ली के कई हिस्सों में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 की कॉसंट्रेशन 999 प्रति क्यूबिक मीटर मापी गई। डॉ रणदीप गुलेरिया ने सभी लोगों से प्रदूषण से बचाव के लिए सभी आवश्यक उपाय करते रहने की अपील की है। कोरोना के साथ-साथ बढ़े हुए प्रदूषण से बचाव के लिए मास्क पहनकर रखना सबसे प्रभावी विकल्प हो सकता है।
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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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