दुनिया भर में पिछले डेढ़ साल से कोरोना का कहर है। अब तक आई कोरोना की दो लहरों, विशेषकर दूसरी लहर में लोगों को तमाम तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। दूसरी लहर में कोरोना के लक्षणों में भी बदलाव देखने को मिले, संक्रमितों को स्वाद-गंध न आना भी ऐसा ही एक लक्षण था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना से ठीक होने के बाद कुछ दिनों में स्वाद और गंध सामान्य हो जाती है। हालिया रिपोर्टस के मुताबिक कोरोना से ठीक होने के बाद लोगों का स्वाद और गंध तो वापस आ जाता है लेकिन कुछ लोगों ने इससे संबंधित अजीबो-गरीब शिकायतें की हैं।
अचरज: कोविड से ठीक होने के बाद कॉफी से आने लगी गैस की बदबू, ब्रश से प्याज का स्वाद, जानिए क्या है यह समस्या?
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इस तरह के कई मामले आ चुके हैं सामने
न्यूयार्क पोस्ट में छपी रिपोर्ट में अमेरिका की मार्सल कुत्तब के मामले का जिक्र किया गया है। कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद एक दिन ब्रश करते समय मार्सल को ब्रश से अजीब सी गंध महसूस हुई। उन्होंने इस समस्या से निजात पाने के लिए बारी-बारी अपना ब्रश और टूथपेस्ट बदल दिया। उन्होंने बताया कि ब्रश करते समय उन्हें प्याज और लहसुन की बदबू आ रही थी। इतना ही नहीं कॉफी से उन्हें गैस की बदबू आती थी। ऐसे ही एक अन्य मामले से कोविड से ठीक होने के बाद व्यक्ति ने फलों से साबुन जैसा स्वाद आने की शिकायत की।
क्यों हो रही है इस तरह की दिक्कत?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की समस्याओं का मुख्य कारण फैंटोस्मिया को माना जा रहा है। यह एक ऐसी समस्या है जिसमें लोगों को किसी वस्तु की असली गंध से अलग तरह की खुशबू या बदबू आने लगती है। ऐसे ही अलग स्वाद आने की समस्या को पारोस्मिया के नाम से जाना जाता है। किसी गंभीर संक्रमण से ठीक होने के बाद इस समस्या के होने का खतरा रहता है।
कोरोना संक्रमण के बाद बढ़ गए हैं ऐसे मामले
फिलाडेल्फिया स्थित मोनेल केमिकल सेंसेज सेंटर की वाइस प्रेसिडेंट नैसी ई रॉसन कहती हैं कि कोरोना महामारी से पहले पारोस्मिया के मामले काफी कम थे, हालांकि अब कोरोना से ठीक हो रहे लोगों में इसके मामले देखने को मिल रहे हैं। वायरस के कारण ओलफक्ट्री न्यूरॉस को हो रही क्षति के कारण लोगों को ऐसी शिकायत हो रही है। बुजुर्गों में इस तरह की समस्या विकसित होने की खतरा अधिक होता है। इसके अलावा बहुत ज्यादा धूम्रपान करने या रसायनों के संपर्क में रहने वाले लोगों को भी इस समस्या के होने की आशंका अधिक होती है।
कैसे ठीक की जाती है यह दिक्कत?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यदि पारोस्मिया पर्यावरणीय कारकों, दवाओं, कैंसर के उपचार, या धूम्रपान के कारण होता है, तो इन समस्याओं के उपचार के साथ पारोस्मिया की भी दिक्कत ठीक हो जाती है। कोरोना वायरस के मामले में भी ऐसा ही है, संक्रमण का असर शरीर से पूरी तरह से ठीक होने पर यह दिक्कत स्वत: ठीक हो जाती है। इसके अलावा कुछ लोगों को एंटीबायोटिक, जिंक या विटामिन ए की खुराक देकर भी पारोस्मिया की दिक्कत को ठीक किया जा सकता है। हालांकि सभी लोगों में इसके उपचार का तरीका अलग-अलग हो सकता है।
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नोट: यह लेख मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है। बीमारी के बारे में ज्यादा जानकारी यहां से प्राप्त की गई है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।