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Organ Donation: भारत सरकार का प्रयास लाया रंग, एक दशक में तीन गुना तक बढ़े सालाना अंगदान के मामले

Thu, 03 Aug 2023 05:15 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 03 Aug 2023 05:15 PM IST
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Over 15,000 organ donations are now made annually in india says Health Minister Mansukh Mandaviya
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया - फोटो : पीटीआई

भारत सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप पिछले कुछ वर्षों में अंगदान में विशेष सुधार हुआ है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने गुरुवार को बताया कि 2013 में 5,000 अंगदान की तुलना में अब देश में हर साल 15,000 से अधिक अंग दान किए जा रहे हैं। 13वें भारतीय अंगदान दिवस (आईओडीडी) समारोह को लेकर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, इंसानियत के लिए इससे बड़ी कोई सेवा नहीं हो सकती है। लोगों में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाई गई जिसके परिणाम देखे जा रहे हैं।



गौरतलब है कि भारत में हर साल मरने वाले 95 लाख लोगों में से कम से कम एक लाख संभावित दानकर्ता होते हैं, इसके बावजूद हर साल देश में ऑर्गन फेलियर के कारण लाखों लोगों की मौत हो जाती है। अनुमान के मुताबिक ऑर्गन फेलियर के चलते हर दिन लगभग 300 और हर साल लगभग एक लाख से अधिक मौतें हो जाती हैं। इस खतरे को कम किया जा सकता है, अगर हर साल अंगदान को बढ़ावा दिया जा सके।

Over 15,000 organ donations are now made annually in india says Health Minister Mansukh Mandaviya
भारत में अंग प्रत्यारोपण में हुआ सुधार - फोटो : istock

तीन गुना तक बढ़े अंगदान

आईओडीडी समारोह उन परिवारों को सम्मानित करने के लिए आयोजित किया गया था जिन्होंने अपने प्रियजनों के अंगों को दान करने का फैसला किया था। सभा को संबोधित करते हुए, मंडाविया ने कहा कि उन सभी लोगों के योगदान को पहचानना और उनकी सराहना करना महत्वपूर्ण है जो इस प्रयास का हिस्सा रहे हैं।

भारत सरकार ने अंगदान को बढ़ावा देने के प्रयास किए हैं जिसके सुखद परिणाम देखे जा रहे हैं। एक दशक पहले की तुलना में अब अंगदान में विशेष सुधार हुआ है, इसमें करीब तीन गुना की बढ़ोतरी आई है। आगे इसे और भी बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

Over 15,000 organ donations are now made annually in india says Health Minister Mansukh Mandaviya
अंग प्रत्यारोपण से बचाई जा सकती है जान - फोटो : istock

अंगदान को बढ़ावा देने के प्रयास

साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार साल 2013 में लगभग 5,000 लोग स्वेच्छा से अंगदान के लिए आगे आए थे, अब सालाना 15,000 से अधिक अंग दानकर्ता हैं। सरकार ने देश में अंग दान को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं, अंगदान करने के लिए 65 वर्ष की आयु सीमा हटा दी गई है। सरकार देश में अंग दान को लोकप्रिय बनाने के लिए और अधिक नीतियां और सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है। अंगदान को बढ़ावा देकर हर साल लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है। 

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Over 15,000 organ donations are now made annually in india says Health Minister Mansukh Mandaviya
भारत में अब भी अंग दाताओं में कमी - फोटो : iStock

अब भी अंगदान में कमी विशेष समस्या

इससे पहले देश में अंगदान की कमी को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई थी। डॉक्टरों के मुताबिक मांग और प्रत्यारोपण के बीच बड़ा अंतर है, जो देश में हजारों मौतों का कारण बन रहा है। सिर्फ हृदय और लीवर ही नहीं, किडनी, कॉर्निया और फेफड़ों के प्रत्यारोपण के लिए भी इंतजार कर रहे मरीजों की एक लंबी सूची है।

एसजीपीजीआई लखनऊ की एक रिपोर्ट के मुताबिक दानदाताओं और प्राप्तकर्ताओं के बीच व्यापक अंतर के कारण, भारत में सालाना अनुमानित दो लाख मरीज लिवर फेलियर या लिवर कैंसर के कारण मर जाते हैं। उनमें से लगभग 10-15% को समय पर लीवर प्रत्यारोपण से बचाया जा सकता था। भारत में सालाना लगभग 25,000-30,000 लिवर प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, लेकिन केवल 1,500 ही किए जा रहे हैं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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