भ्रामक और अप्रमाणित जानकारियों के कारण सेहत को कई तरह से नुकसान हो सकता है, दुर्भाग्यवश विज्ञापनों और सोशल मीडिया पर इस तरह की जानकारियों की भरमार है। सरकार अब इसपर सख्त रुख अख्तियार कर रही है। मसलन अब अगर आप विज्ञापनों, वीडियो आदि के माध्यम से सेहत से संबंधित कोई दावा कर रहे हैं, जानकारियां साझा कर रहे हैं तो यह बताना आवश्यक होगा कि क्या आप वास्तव में इसके विशेषज्ञ हैं? भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम को लेकर यह कदम उठाया गया है।
स्वास्थ्य सुरक्षा: सोच-समझकर दें विज्ञापन, वेबसाइट और सोशल मीडिया पर सेहत का ज्ञान, सरकार की सख्ती
भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम को लेकर कदम
पिछले साल 9 जून को भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए गए थे, उसी को आगे बढ़ाते हुए इन सुझावों को शामिल किया गया है। सरकार की तरफ से साफ किया गया है कि खुद को स्वास्थ्य विशेषज्ञ या चिकित्सक के तौर पर पेश करने वाली हस्तियों, इंफ्लूएंसर्स अगर स्वास्थ्य संबंधी कोई भी दावा करते हैं तो उन्हें पहले अपने बारे में स्पष्ट घोषणा देनी होगी जिससे न सिर्फ विज्ञापन या दावे को प्रमाणित माना जा सके, साथ ही लोग इसपर विश्वास कर सकें।
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक स्वास्थ्य और आयुष मंत्रालय के साथ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) और एडवटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इण्डिया (एएससीआई) से विस्तृत चर्चा के बाद ये दिशानिर्देश जारी किया गया है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापन या वीडियो में अगर आप किसी खाद्य पदार्थ से होने वाले फायदे, किसी बीमारी के उपचार और रोकथाम या इम्युनिटी बढ़ाने वाले उपायों के बारे में बता रहे हैं तो उससे पहले अपनी प्रमाणिता बताएं।
ठोस तथ्यों के बगैर न करें कोई दावा
हस्तियों, प्रभावशाली लोगों और डिजिटल इंफ्लूएंसर को अपनी निजी राय और पेशेवर सलाह के बीच स्पष्ट अंतर रखने और ठोस तथ्यों के बगैर खास तरह के स्वास्थ्य दावे करने से बचने की भी नसीहत दी गई है। स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से इसे आवश्यक माना जा रहा है। अगर इन दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया जाता है तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 और कानून के अन्य प्रावधानों के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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