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Children Obesity: बच्चों में बढ़ते मोटापे का पता चल गया कारण, सिर्फ जंक फूड्स ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं

Sat, 20 Apr 2024 08:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 20 Apr 2024 08:52 PM IST
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बच्चों में मोटापे की समस्या - फोटो : istock

मोटापे की समस्या को सभी उम्र के लोगों के लिए खतरनाक माना जाता है। अध्ययनों में इसे क्रोनिक बीमारियों जैसे डायबिटीज-हृदय रोग, मेटाबॉलिज्म विकारों के साथ कैंसर तक के जोखिमों को बढ़ाने वाला पाया गया है। इतना ही नहीं जिन लोगों को पहले से ही हार्ट की समस्या है, अगर उनमें मोटापा बढ़ जाता है तो इससे हार्ट अटैक जैसी जानलेवा स्थितियों का भी जोखिम अधिक हो सकता है। यही कारण है कि सभी उम्र के लोगों को वजन को कंट्रोल में रखने के लिए निरंतर प्रयास करते रहने की सलाह दी जाती है।



स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है जो कम उम्र में ही कई प्रकार की बीमारियों का कारण बन सकती है। सामान्यतौर पर जंक और प्रोसेस्ड फूड्स के अधिक सेवन को मोटापा बढ़ाने का प्रमुख कारक माना जाता रहा है। पर हालिया अध्ययनों में शोधकर्ताओं ने बताया कि बच्चों के मोटापे के लिए सिर्फ यही एक कारण नहीं है, लाइफस्टाइल की एक गड़बड़ी मोटापे को तेजी से बढ़ाने का कारण बनती जा रही है।

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मोटापे का बढ़ता खतरा - फोटो : istock

भारतीय बच्चों में बढ़ता खतरा

हाल के वर्षों में हुए कई अध्ययनों के आधार पर शोधकर्ताओं का अनुमान है कि साल 2030 तक 10 मोटापे से ग्रस्त बच्चों में से एक भारत से होगा। चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद भारत में इस समस्या का खतरा अधिक देखा जा रहा है। इसी तरह से मार्च 2024 में द लैंसेट में प्रकाशित एक रिपोर्ट से पता चला कि वैश्विक स्तर पर मोटापा 1990 से 2022 तक 4.5 गुना बढ़ गया है और इसके और भी अधिक बढ़ने का जोखिम हो सकता है।

शोधकर्ताओं ने बताया कि जंक-प्रोसेस्ड फूड्स के अलावा बच्चों का बढ़ा हुआ स्क्रीन टाइम इस समस्या का प्रमुख कारक हो सकता है।

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स्क्रीनटाइम से होने वाली समस्याएं - फोटो : istock

अध्ययन में क्या पता चला?

जो बच्चे-किशोर टीवी देखने, मोबाइल या कंप्यूटर पर अधिक समय बिताते हैं, उनमें व्यायाम के दौरान ऑक्सीजन का उपयोग कम होने, उच्च रक्तचाप और मोटापे का खतरा देखा जाता रहा है। इस थ्योरी को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने न्यूजीलैंड में सैकड़ों बच्चों पर नजर रखना शुरू किया और जब तक वे 45 वर्ष के नहीं हो गए, तब तक उनका अनुसरण किया गया।

अध्ययन के लेखक डॉ. बॉब हैनकोक्स का कहना है कि जिन बच्चों का स्क्रीन टाइम अधिक था उनकी शारीरिक सक्रियता भी कम थी, साथ ही खान-पान की आदतें भी गड़बड़ हुईं।

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स्क्रीन टाइम के दुष्प्रभाव - फोटो : istock

स्क्रीन टाइम को कम करने के लिए उपाय जरूरी

अध्ययन के साक्ष्यों से पता चलता है कि स्क्रीन के अधिक संपर्क में रहने के दौरान बच्चे-किशोर हाई कैलोरी वाली चीजें (चिप्स-कुकीज) भी अधिक खाते हैं, शारीरिक सक्रियता कम हो जाता है जिसे मोटापा बढ़ाने वाला कारक माना जाता रहा है। इसके अलावा स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी से नींद प्रभावित होती है जिसके कारण भी वजन बढ़ने से संबंधित समस्या हो सकती है।
 
बच्चों के साथ युवाओं-वयस्कों की सेहत पर भी इसी प्रकार के दुष्प्रभाव देखे जाते रहे हैं।

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वजन को कंट्रोल करने के लिए करें उपाय - फोटो : istock

दिनचर्या में करना होगा सुधार

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, बढ़े हुए स्क्रीन टाइम और इसके कारण होने वाले मोटापे और अन्य दुष्प्रभावों को कम करने के लिए दिनचर्या में खेल-बाहर खेलने, साइकिल चलाने जैसी शारीरिक सक्रियता पर अधिक ध्यान देना चाहिए। मोटापे का खतरा कम हो और बच्चों की सेहत ठीक रहे इसके लिए यह महत्वपूर्ण है कि बच्चे कम उम्र से ही सक्रिय होने में रुचि लें। वजन को कंट्रोल में रखने और इसे बढ़ने से रोकने के लिए आवश्यक है कि आप नींद की गुणवत्ता में भी सुधार करें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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