कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर को कोमोरबिडिटी वाले लोगों के लिए काफी खतरनाक माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों को पहले से ही हृदय रोग, डायबिटीज, सांस की परेशानी और अन्य गंभीर दिक्कतें हैं, उनमें कोरोना संक्रमण होने का खतरा दूसरे लोगों की तुलना में अधिक होता है। इन तमाम रोगों के साथ मोटापा से ग्रस्त लोगों में भी विशेषज्ञों ने कोरोना का अधिक खतरा पाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि दुबले और फिट लोगों की तुलना में मोटापा से ग्रस्त लोगों को न सिर्फ कोविड-19 संक्रमण होने का खतरा ज्यादा होता है साथ ही ऐसे लोगों में कोविड के कारण होने वाली दीर्घकालिक जटिलताओं का डर भी अधिक होता है।
अध्ययन: मोटापा ग्रस्त लोगों में कोविड संक्रमण और दीर्घकालिक जटिलताओं का खतरा अधिक, जानिए खास बातें
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कोविड-19 और मोटापे के संबंध को जानने से पहले भारत में मोटापा के शिकार लोगों की स्थिति के बारे में जान लेते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मोटापे को बड़ी समस्या बताते हुए इसके नियंत्रण और प्रबंधन की आवश्यकता पर ध्यान देने पर जोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में साल 2012 में मोटापा ग्रस्त लोगों की संख्या 25.2 मिलियन (2.52 करोड़) थी जोकि साल 2016 में बढ़कर 34.3 मिलियन (3.43 करोड़) से अधिक हो गई है। इस दिशा में गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
डायबिटीज, ओबेसिटी और मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, मोटापे के कारण लोगों में लॉन्ग टर्म कोविड-19 जटिलताएं देखने को मिल रही हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक में कोविड-19 से ठीक हो चुके 2,839 रोगियों पर किए गए अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं। प्रमुख शोधकर्ता अली अमीनियन बताते हैं कि अध्ययन के दौरान हमने मोटापा से ग्रसित लोगों में कोविड-19 के कारण होने वाली जटिलताएं, अन्य लोगों की तुलना में अधिक देखी हैं।
अध्ययन के दौरान 2,839 लोगों के बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के आधार पर 5 समूहों के परिणामों की तुलना की गई। 18.5-24.9 बीएमआई (सामान्य), 25-29.9 बीएमआई (अधिक वजन), 30-34.9 बीएमआई (हल्का मोटापा), 35-39.9 बीएमआई (मध्यम मोटापा), और 40 बीएमआई या अधिक (गंभीर मोटापा) को समूहों में बांटा गया। अध्ययन के निष्कर्षों से पता चलता है सामान्य बीएमआई वाले लोगों की तुलना में, मध्यम मोटापा ग्रस्त लोगों के अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम 28 फीसदी और गंभीर मोटापा ग्रस्त लोगों में 30 फीसदी अधिक था।
दीर्घकालिक जटिलताओं का खतरा भी अधिक
क्लीवलैंड क्लिनिक के एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष और अध्ययन के एक अन्य शोधकर्ता बार्टोलोम बरगुएरा कहते हैं कि मोटापे के साथ इंफ्लामेशन, कमजोर इम्यूनिटी और अन्य कोमोरबिडिटी, दिक्कतों को और बढ़ा सकती हैं। इन स्थितियों से मोटापे के रोगियों में कोविड-19 के कारण गंभीर समस्याओं की खतरा हो सकता है साथ ही इन रोगियों में लॉन्ग टर्म कोविड-19 जटिलताओं का खतरा भी बढ़ जाता है।