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New Covid Treatment Guidelines: इन दवाओं के इस्तेमाल पर रोक, खांसी बने रहने पर करना होगा यह काम

Tue, 18 Jan 2022 04:12 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 18 Jan 2022 04:12 PM IST
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new treatment guidelines for the management of Covid-19, Remdesivir for only critical care
कोरोना संक्रमण में इलाज - फोटो : Pixabay

पिछले एक महीने में देशभर में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का संक्रमण तेजी से बढ़ा है। कोरोना के इस संक्रामक वैरिएंट के कारण पिछले एक हफ्ते से रोजाना के संक्रमितों के आंकड़े में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना के 2.38 लाख से ज्यादा नए मामले रिकॉर्ड किए गए, वहीं ओमिक्रॉन के केस भी 8 हजार के आंकड़े को पार कर गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फिलहाल राहत की बात यह है कि ज्यादातर संक्रमितों में हल्के-मध्यम लक्षण ही देखे जा रहे हैं और बिना अस्पताल जाए भी लोग आसानी से ठीक हो रहे हैं। ओमिक्रॉन संक्रमितों को फिलहाल विशिष्ट उपचार की भी जरूरत नहीं हो रही है।



इस बीच सोमवार को देश की शीर्ष चिकित्सा अनुसंधान संस्था इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने कोविड-19 के प्रबंधन के लिए नए उपचार दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसमें इलाज के लिए अब तक प्रयोग में लाई जा रही कुछ दवाओं में कटौती की गई है। नई गाइडलाइंस के मुताबिक कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए रेमेडिसविर और इम्यूनोसप्रेसिव दवा टोसीलिज़ुमैब के इस्तेमाल में कटौती की गई है। रेमेडिसविर दवा की, कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मांग काफी बढ़ गई थी। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि कोविड रोगियों के इलाज के लिए अब नए नियम क्या हैं?

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रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर नई गाइडलाइंस - फोटो : iStock

सिर्फ गंभीर रोगियों को रेमडेसिविर की जरूरत
कोविड के इलाज के लिए जारी की गई नई गाइडलाइंस के मुताबिक अब हर रोगी को इलाज के दौरान रेमडेसिविर देने की आवश्यकता नहीं है। इसका प्रयोग सिर्फ उन्हीं लोगों पर किया जा सकता है जिनमें लक्षण दिखते हुए 10 दिनों से अधिक का समय बीत गया हो और उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत महसूस हो रही हो। गाइडलाइंस में कहा गया है कि कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज में पांच दिनों के लिए रेमेडिसविर को प्रयोग में लाया जा सकता है। हालांकि पांच दिनों से अधिक के इलाज के लिए इसके लाभ के कोई सबूत नहीं हैं। इसके उपयोग को लेकर विशेष सावधानी बरतने की भी आवश्यकता है।

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संक्रमितों में खांसी की समस्या - फोटो : iStock

खांसी बनी रहे तो कराएं टीबी की जांच
दिशानिर्देशों में यह भी बताया गया है कि यदि हल्के लक्षण वाले रोगियों में भी खांसी की समस्या दो से तीन सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहती है, तो इसके लिए टीबी की जांच कराई जानी चाहिए। नए प्रोटोकॉल में गंभीर बीमारी या मृत्यु दर के लिए उच्च जोखिम वाली श्रेणी के तहत टीबी रोगियों को भी शामिल किया गया है। ऐसे रोगियों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है। 

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स्टेरॉयड के इस्तेमाल को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Pixabay

स्टेरॉयड को लेकर भी बरतें सावधानी
कोविड रोगियों के इलाज के लिए स्टेरॉयड के इस्तेमाल को लेकर भी नए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक जिन रोगियों को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं है उन्हें स्टेरॉयड के इंजेक्शन की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके लाभ के कोई सबूत नहीं मिले हैं। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान स्टेरॉयड की मांग में भी भारी वृद्धि देखने को मिली थी। नए दिशानिर्देशों के अनुसार स्टेरॉयड के उपयोग को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।

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कोरोना संक्रमित रखें खास ख्याल - फोटो : iStock

ब्लड शुगर की भी जांच करा लें
नवीनतम दिशानिर्देशों में गंभीर और मध्यम लक्षण वाले रोगियों के लिए लेबोरेटरी मॉनीटरिंग प्रोटोकॉल के तहत ब्लड शुगर की जांच कराने की भी सलाह दी गई है। इससे पहले के प्रोटोकॉल में सीआरपी और डी-डिमर, पूर्ण रक्त गणना (सीबीसी), किडनी फंक्शन टेस्ट (केएफटी), लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी) और आईएल -6 लेवल मॉनीटरिंग का सुझाव दिया गया था। फिलहाल कोविड के जिन रोगियों में लक्षण बने हुए हैं उन्हें होम आइसोलेशन में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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