वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना महामारी सभी के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। पिछले दो साल से जारी संक्रमण में वायरस के कई तरह के नए वैरिएंट्स देखने को मिले है, इनमें से कुछ की प्रकृति भी एक दूसरे से भिन्न देखी गई है। कोरोना के उभरते नए वैरिएंट्स से बचाव के लिए वैज्ञानिक दो डोज वाली वैक्सीन के बाद लोगों को बूस्टर शॉट देने की सलाह देते हैं, इससे शरीर में नए वैरिएंट्स से मुकाबले के लिए मजबूत प्रतिरक्षा विकसित करने में मदद मिलती है। हालांकि जिस तरह से एक के बाद एक, कोरोना वायरस के नए-नए वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं, इसने विशेषज्ञों की चिंता को और बढ़ा दिया है।
Covid Pandemic: नए वैरिएंट्स पर कितनी असरदार है वैक्सीन, क्या हर साल होगा टीकाकरण? वैज्ञानिक ने किया सबकुछ स्पष्ट
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टीके प्रभावी, पर समय के साथ अपडेशन की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 से बचाव के लिए प्रयोग में लाए जा रहे टीके अब भी नए वैरिएंट्स से होने वाले संक्रमण के गंभीर मामलों और इसके कारण होने वाली मौत से सुरक्षित रखने में सहायक हैं। पर जिस तरह से अधिक संक्रामक नए वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं साथ ही समय के साथ लोगों की प्रतिरक्षा कम होती जाती है, ऐसे में हमें टीकों में अपडेशन को लेकर विचार करना चाहिए।
टीकों के नए फॉर्मूलेशन और अपडेशन का मतलब नए वैरिएंट्स की प्रकृति के आधार पर इसमें बदलाव और वैक्सीन की तीन या चार खुराक देने की आवश्यकता से है।
बार-बार वैक्सीनेशन की होगी जरूरत?
वायरस के प्रति टीकों की प्रतिरोधक क्षमता को लेकर अध्ययन कर रहे वैज्ञानिक ने बताया कि अक्सर यह पूछा जाता रहा है कि भविष्य में लोगों को कितनी बार टीके देने की आवश्यकता हो सकती है? फिलहाल तो यह समझना आवश्यक है कि कोई ऐसा पैरामीटर नहीं है जिसके आधार पर यह तय किया जा सके कि आगे कौन सा नया वैरिएंटस आएगा और भविष्य में ये वैक्सीन, लोगों को सुरक्षित रखने में कितनी सहायक होंगी? इस सवाल के बारे में सिर्फ इतना कहा जा सकता है कि वायरस में म्यूटेशन के साथ हमें वैक्सीन के अपडेशन की जरूरत पर ध्यान देना होगा।
इन्फ्लूएंजा और सार्स-सीओवी-2 की प्रकृति
वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस में म्यूटेशन और उस आधार पर वैक्सीनेशन की जरूरत को समझने के लिए इन्फ्लुएंजा वायरस एक उदाहरण है। यह संक्रमण बार-बार देखने को मिलता रहा है। हर साल विशेषज्ञ इस संक्रमण के कारण होने वाली गंभीर बीमारी के जोखिम को कम करने के लिए फ्लू शॉट के सर्वोत्तम फॉर्मूलेशन को लाने का प्रयास करते हैं। कोरोना के मामले में भी हमें इसी तरह की जरूरत हो सकती है।
वैसे तो इन्फ्लूएंजा और सार्स-सीओवी-2 वायरस की प्रकृति अलग-अलग हैं, पर इन्फ्लूएंजा की तरह ही कोरोना वायरस में हो रहे अपडेशन के साथ-साथ वैक्सीन की प्रभाविकता को ध्यान में रखने की आवश्यकता है।
वैक्सीन अपडेशन की आवश्यकता
वैज्ञानिकों का कहना है कि सार्स-सीओवी-2 का प्रसार जारी है और इसके एंडमिक होने की संभावना है। ऐसे में यह संभव है कि लोगों को निकट भविष्य के लिए समय-समय पर बूस्टर शॉट्स की आवश्यकता हो सकती है। वायरस खुद में म्यूटेशन करके आसानी से मानव कोशिकाओं में प्रवेश कर लेता है, जबकि हमारे पास अभी वायरस के मूल स्ट्रेन के आधार पर ही टीके हैं।
टीके आपके शरीर को एक विशेष स्पाइक प्रोटीन को पहचानने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, चूंकि वायरस का स्पाइक प्रोटीन समय के साथ बदलता जा रहा है, ऐसे में इससे सुरक्षा के लिए हमें वैक्सीनेशन में समय के साथ नए फॉर्मूलेशन की आवश्यकता पर जोर देना होगा।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।