डॉ. निकिता रावल,
प्लेसेंटा यानी मां के गर्भ में बच्चे को सुरक्षा और पोषण दोनों उपलब्ध करवाने वाली जगह। सामान्य शब्दों में कहा जाए तो प्लेसेंटा वह स्थान है जो बच्चे को माँ से जोड़ता है। अक्सर महिलाओं को इस महत्वपूर्ण हिस्से के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती। जिसके चलते कई तरह की भ्रांतियां और डर मां बनने के दौरान महिलाओं को परेशान करते हैं। वहीं कई बार यह भी होता है कि प्लेसेंटा के महत्व को ही नजरअंदाज कर दिया जाता है। जबकि इसकी सेहत और इसके सामान्य होने से जुड़ी होती है मां और बच्चे दोनों की सेहत भी। इस मदर्स डे पर जानिए क्या है प्लेसेंटा, क्यों है प्लेसेंटा का इतना महत्व और कैसे इसको पहुंचने वाला नुकसान गर्भ में पल रहे शिशु के लिए हो सकता है घातक।
Mothers Day 2023: मां के भीतर बच्चे का सुरक्षा कवच प्लेसेंटा, जानें प्रसव और शिशु के लिए क्यों है जरूरी
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प्लेसेंटा क्या है?
प्लेसेंटा एक बड़ा अंग होता है जो गर्भवस्था के दौरान शरीर के भीतर पनपता है और यह आमतौर पर यूटरस की दीवार पर ऊपर की ओर या साइड में जुड़ा होता है। कई बार रेयर केसेस में प्लेसेंटा बच्चेदानी के मुंह पर भी हो सकती है। यह स्थिति प्लेसेंटा प्रिविया कहलाती है और यह मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। शिशु को प्लेसेंटा से जोड़ने का काम करती है अम्बलीकल कॉर्ड या गर्भनाल। मां के शरीर से खून प्लेसेंटा से होकर ही शिशु तक पहुंचता है और ऑक्सीजन, ग्लूकोज और अन्य पोषक तत्व फिल्टर होकर गर्भनाल द्वारा शिशु को मिलते हैं।
शिशु का हानिकारक तत्वों से बचाव:
प्लेसेंटा केवल पोषण को शिशु तक भेजने का जरिया ही नहीं बनती। यह हर उस तत्व को भी फिल्टर करती जाती है जो शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं और शिशु के खून से यह कार्बन डाइऑक्साइड व अन्य कचरे को भी हटा देती है। प्लेसेंटा के भीतर शिशु गर्म और सुरक्षित माहौल में रहता है।
जरूरी हार्मोंस का उत्पादन:
गर्भावस्था के दौरान कुछ विशेष हार्मोन की जरूरत शिशु और मां दोनों के लिए होती है और प्लेसेंटा इनका उत्पादन कर मदद करती है। इन हार्मोंस में लेक्टोजन, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन जैसे महत्वपूर्ण हार्मोंस शामिल हैं। प्लेसेंटा की एक और खासियत है कि यह मां के खून को बच्चे के खून से अलग रखने का काम करती है और इस तरह बच्चे कई प्रकार के संक्रमणों से बच जाते हैं। इतना ही नहीं शिशु के जन्म बाद प्लेसेंटा कुछ एंटीबॉडीज भी शिशु की सुरक्षा के लिहाज से उसके साथ कर देती है। ताकि बच्चे का सुरक्षा कवच जन्म के बाद तक बरकरार रहे।
इन बातों का रखें ध्यान:
गर्भ में बच्चे के आकार लेने के साथ ही प्लेसेंटा की भूमिका बढ़ती जाती है। इसलिए जरूरी है कि शुरुआत से ही इसकी सुरक्षा और सेहत को लेकर भी ध्यान रखा जाए। कुछ चीजें हैं जो प्लेसेंटा को नुकसान पहुंचा सकती है और बच्चे को खतरा पहुंचा सकती हैं। उनको लेकर सतर्कता रखें और कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गौर करें। जैसे:
-अल्कोहल, सिगरेट या अन्य ड्रग्स का सेवन न करें। ये सभी हानिकारक चीजें प्लेसेंटा की दीवार आसानी से भेदकर शिशु तक पहुंच सकती हैं।
-गर्भावस्था के दौरान पूरे समय पोषक तत्वों का सेवन करें और तनाव, एंग्जायटी व स्ट्रेस से दूर रहें। यह सभी आपकी प्लेसेंटा की हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
-अपने डॉक्टर की सलाह से नियमित सामान्य व्यायाम, डीप ब्रीदिंग और मेडिटेशन आदि जैसी गतिविधियों से जुड़ें। डीप ब्रीदिंग के बहुत फायदे हैं। इससे माँ के शरीर में तो ऑक्सीजन का स्तर सुचारू होता ही है। बच्चे के ऑक्सीजन स्तर में भी बहुत सुधार आता है।