दुनियाभर में जारी कोरोना महामारी को दो साल से अधिक का समय बीत गया है, हालांकि यह कब तक जारी रहेगी, इस बारे में अब भी कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है। भले ही ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमण की रफ्तार थम गई है, फिर भी विशेषज्ञ सभी लोगों को अलर्ट रहने की सलाह देते हैं। कई रिपोर्ट्स में ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट बीए.2 का जिक्र किया जा रहा है, जिसको लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन भी चिंता जता चुका है। अध्ययनों में कहा जा रहा है कि कोरोना संक्रमण से बचे रहने का दो ही सबसे बेहतर उपाय है-
Omicron Symptoms: वैक्सीनेटेड और बिना वैक्सीनेशन वाले, दोनों में सामान्य हैं ऐसे लक्षण, न करें अनदेखा करने की भूल
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नाक बहना और गले में खराश
नाक बहना और गले में खराश, कोरोना के सबसे सामान्य लक्षणों में से एक हैं जो टीके लगवा चुके और बिना टीकाकरण वाले, दोनों तरह के लोगों में देखे जा रहे हैं। जोई कोविड एप स्टडी के मुताबिक कोरोनोवायरस संक्रमण के कारण नाक बहने की संभावना अधिक होती है। इसके अलावा चूंकि यह वायरस श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है ऐसे में इसके कारण गले में खराश होने की भी दिक्कत होती है। ओमिक्रॉन से संक्रमण के दौरान लोगों को गले में खरोंच जैसे लक्षणों का अनुभव हो सकता है।
लगातार खांसी आने की दिक्कत
जैसा कि बताया गया कि कोरोना वायरस श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है ऐसे में संक्रमण के दौरान सूखी और लगातार खांसी आने की दिक्कत हो सकती है। खांसी के साथ कुछ लोगों को बलगम भी आ सकती है, हालांकि सूखी खांसी को ज्यादा सामान्य माना जाता है। लगातार खांसी आते रहने के कारण गले में दर्द भी हो सकता है।
मांसपेशियों में दर्द
जोई कोविड एप स्टडी के अनुसार ओमिक्रॉन संक्रमण के दौरान शरीर में दर्द की समस्या को भी सामान्य माना जाता है। वैक्सीनेशन करा चुके लोगों में भी यह लक्षण देखे जा रहे हैं। कोविड-19 से बीमार तीन लोगों में से एक को असामान्य रूप से मांसपेशियों में दर्द हो सकता है। वयस्कों में इस तरह के दर्द को सामान्य माना जाता है। दो फीसदी संक्रमित सिर्फ ऐसे भी पाए गए जिन्होंने संक्रमण के लक्षण के रूप में सिर्फ मांसपेशियों में दर्द की सूचना दी।
सिरदर्द और थकान
वैक्सीनेटेड और जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है, दोनों में ही सिरदर्द और थकान की समस्या को सामान्य पाया गया है। यह दोनों समस्याएं लॉन्ग कोविड में भी देखी जा रही है। ओमिक्रॉन संक्रमण के दौरान भी लोगों को गंभीर सिरदर्द का अनुभव हुआ है। चूंकि संक्रमण से मुकाबले के दौरान शरीर में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी हो जाती है, ऐसे में थकान की भी समस्या देखी जा सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।