लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण कई प्रकार की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। महिला हों या पुरुष या फिर बच्चे, सभी उम्र के लोगों में क्रोनिक बीमारियों का जोखिम देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कई कारण हैं जिसको ध्यान में रखते हुए सभी महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
Alert: महिलाओं में इन चार बीमारियों का खतरा होता है अधिक, कैसे रहें सुरक्षित? कम उम्र से ही शुरू कर दें बचाव
महिलाएं अपनी दिनचर्या, हार्मोनल बदलाव और शरीर की संरचना के कारण कुछ बीमारियों को लेकर विशेष संवेदनशील होती हैं। लिंग आधारित इन समस्याओं के बारे में जानना और कम उम्र से ही इसको लेकर बचाव के उपाय करते रहना बहुत आवश्यक हो जाता है।
स्तन कैंसर का जोखिम
स्तन कैंसर के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं, हर साल इस कैंसर के कारण लाखों महिलाओं की मौत भी हो जाती है। महिलाओं में होने वाला सबसे आम कैंसर है। स्तन की कोशिकाओं में अनियंत्रित रूप से वृद्धि इस कैंसर का खतरा बढ़ा देती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हर साल लगभग 20 लाख महिलाएं स्तन कैंसर का शिकार पाई जा रही हैं।
इस कैंसर से बचे रहने के लिए 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित रूप से मैमोग्राफी कराएं। कम उम्र से ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, संतुलित आहार लें और नियमित व्यायाम करें। यदि आपके परिवार में किसी को पहले से स्तन कैंसर रहा हो तो इस बारे में डॉक्टर से सलाह लें और बचाव के उपाय करें।
ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की समस्या)
ऑस्टियोपोरोसिस के कारण आपकी हड्डियां कमजोर और भंगुर हो जाती हैं, जिससे फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। महिलाओं में यह समस्या रजोनिवृत्ति के बाद अधिक देखी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है और इसकी कमी हड्डियों की सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाली हो सकती है।
नेशनल ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन के अनुसार, 50 वर्ष से अधिक उम्र की लगभग 50% महिलाएं ऑस्टियोपोरोसिस होने का जोखिम रहता है। इससे बचाव के लिए कैल्शियम और विटामिन-डी युक्त आहार लें। अपने आहार में दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें। इसके अलावा नियमित रूप वॉकिंग, योग और वेट ट्रेनिंग जैसे अभ्यास करें।
हृदय रोगों को लेकर भी रहें सावधान
हृदय रोग वैश्विक स्तर पर मृत्यु का प्रमुख कारण रहे हैं। वैसे तो महिला हो या पुरुष सभी में इसका जोखिम देखा जाता रहा है पर विशेष कुछ कारणों से महिलाओं को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, महिलाओं में दिल की बीमारी से मृत्यु का खतरा पुरुषों से अधिक हो सकता है। हालांकि महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से अलग होते हैं, जैसे थकान, जी मिचलाना, पीठ या जबड़े में दर्द।
हृदय रोगों से बचाव के लिए हेल्दी डाइट अपनाएं, ट्रांस फैट और अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थों से बचें। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं साथ ही तनाव कम करने के लिए योग और मेडिटेशन करें।
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस)
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम कम उम्र की महिलाओं में भी होने वाली दिक्कत है जिसको लेकर सभी को सावधानी बरतनी चाहिए। ये एक हार्मोनल समस्या है, जो महिलाओं में अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ने और गर्भधारण में कठिनाई जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है। जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलॉजी के अनुसार, हर 10 में से एक महिला को ये समस्या हो सकती है। अगर समय रहते इसपर ध्यान न दिया जाए तो प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित करने वाली समस्या हो सकती है।
इस बीमारी से बचे रहने के लिए हेल्दी डाइट लें और शुगर व प्रोसेस्ड फूड से बचें। नियमित रूप से व्यायाम करें और वजन नियंत्रित रखें। अगर आपमें इसके कोई लक्षण हैं तो डॉक्टर की सलाह से हार्मोनल बैलेंस के लिए सही उपचार लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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