कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीनेशन को सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत में फिलहाल 53.61 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिल चुकी है। वैक्सीनेशन की प्रभाविकता को बढ़ाने के लिए दुनियाभर में तमाम अध्ययन किए जा रहे हैं। इसी से संबंधित हाल ही में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने भारत में निर्मित कोविशील्ड और कोवैक्सीन के मिक्स डोज को कोरोना के खिलाफ प्रभावशाली होने का दावा किया था, हालांकि सीरम इंस्टीट्यूट के संस्थापक साइरस पूनावाला ने टीकों के मिश्रण पर आपत्ति जताई है।
सलाह: साइरस पूनावाला ने वैक्सीन कॉकटेल को बताया 'बैड आइडिया', बोले- सामने आ सकती है बड़ी मुसीबत
कंपनियों में शुरू हो सकता है ब्लेम-गेम
एसआईआई के संस्थापक साइरस पूनावाला कहते हैं, वैक्सीन का कॉकटेल बनाना कोई अच्छा आइडिया नहीं माना जा सकता है। पहले तो इसकी प्रमाणिकता को लेकर कोई साक्ष्य नहीं है, दूसरा यह दो कंपनियों के बीच ब्लेम-गेम का कारण भी बन सकता है। अगर कॉकटेल वैक्सीनेशन के बाद किसी के साथ कुछ गलत होता है तो दो वैक्सीन निर्माताओं के बीच एक दूसरे के टीके में दोष खोजने की प्रतिस्पर्धा शुरू हो सकती है। ऐसे में किसी भी नजरिए से मिक्स-एंड-मैच वैक्सीन के आइडिया को फायदेमंद नहीं माना जा सकता है।
इस स्थिति में ली जा सकती है अलग-अलग वैक्सीन
पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए पूनावाला कहते हैं, दो डोज में अलग-अलग वैक्सीन लेना सिर्फ एक ही स्थिति में सही माना जा सकता है। जिन लोगों ने वैक्सीन की एक डोज लगवा ली है पर किन्हीं कारणवश दूसरी खुराक के लिए उन्हें उसी कंपनी की वैक्सीन न मिल रही हो, ऐसे में एक विकल्प के रूप में अलग वैक्सीन ली जा सकती है। पर विशेष लाभ प्राप्त करने के लिए ऐसा करने के फायदे नजर नहीं आते हैं। वैक्सीन के संयोजन की प्रभावकारिता और प्रतिरक्षात्मकता, नियामकों द्वारा किए जा रहे अध्ययनों पर निर्भर हैं।
आईसीएमआर ने वैक्सीन कॉकटेल को बताया था असरदार
हाल ही में आईसीएमआर ने बताया था कि दोनों स्वदेशी वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन के मिक्स एंड मैच डोज लेकर शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया। एक एडिनोवायरस वेक्टर प्लेटफॉर्म और दूसरी निष्क्रिय वायरस पर आधारित वैक्सीन के मिक्स डोज को लेकर किए गए इस अध्ययन में न सिर्फ इसे सुरक्षित पाया गया है, साथ ही यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती देने में भी कारगर साबित हो सकती है। हालांकि अब एसआईआई के संस्थापक ने इसे बैड आइडिया बताया है। गौरतलब है कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, स्वदेशी वैक्सीन कोविशील्ड की निर्माता कंपनी है।
मिक्स डोज की प्रभाविकता जानने के लिए अध्ययन
मिक्स-एंड-मैच वैक्सीनेशन की प्रभाविकता जानने के लिए कई देशों में अध्ययन किए जा रहे हैं। रिपोर्टस के मुताबिक हाल ही में सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) वेल्लोर को कोवैक्सिन और कोविशील्ड के मिश्रण की प्रभाविकता को जानने के लिए अध्ययन की मंजूरी दे दी है। ड्रग रेगुलेटर के एक विशेषज्ञ पैनल ने 29 जुलाई को अध्ययन के अनुमति की सिफारिश की थी, जिसे अब हरी झंडी मिल गई है। यह परीक्षण 300 प्रतिभागियों पर किया जाएगा।
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नोट: यह लेख सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के संस्थापक साइरस पूनावाला के हालिया बयान के आधार पर तैयार किया गया है।
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