अध्ययन में दावा: रेमेडिसविर की तरह कोरोना संक्रमितों के लिए प्रभावी हो सकती है यह दवा
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ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार अस्थमा जैसी सांस के रोगियों के इलाज के लिए दी जाने वाली दवा ग्लूकोकॉर्टिकोइड्स, कोविड-19 के रोगियों को तेजी से ठीक करने में सहायक हो सकती है। इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया है कि जो लोग इस दवा के पहले से सेवन कर रहे हैं उनमें कोविड का प्रभाव भी कम देखा जा रहा है।
लैंसेट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि ग्लूकोकॉर्टिकोइड्स को सांस के माध्यम से रोगी को दिए जाने से कोविड में भी लाभ मिल सकता है। इतना ही नहीं इसका उपयोग रोगियों के अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को भी कम कर देता है। इसी तरह चीन, इटली और अन्य देशों ने अपने अध्ययनों में बताया था कि अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) से पीड़ित रोगियों के अस्पताल में भर्ती होने की संभावना कम हो सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन रोगियों को पहले से ही इनहेलर के माध्यम से यह दवा लेने की सलाह दी जाती रही है।
लैंसेट के इस अध्ययन में ब्रिटेन के 146 प्रतिभागियों को शामिल किया गया था। इनमें से आधे लोगों इनहेलर्स के माध्यम से को यह दवा को लेने के लिए कहा गया। शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि थोड़े समय के लिए ही बाइडोनाइड लेने वाले लोगों में कोविड के लक्षणों में भी सुधार देखा गया। इतना ही नहीं यह गंभीर रूप से कोविड से पीड़ितों के इलाज में भी फायदेमंद हो सकता है।
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स्रोत और संदर्भ:
Inhaled budesonide in the treatment of early COVID-19 (STOIC): a phase 2, open-label, randomised controlled trial
https://www.thelancet.com/journals/lanres/article/PIIS2213-2600(21)00160-0/fulltext#%20
अस्वीकरण नोट: यह लेख द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित स्टडी के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। अध्ययन में बताई गई किसी भी दवा या उपचार के लिए अमर उजाला दावा नहीं करता है, आपके लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।