आपने भी अक्सर कई स्थानों पर अचानक से लोगों को बेसुध होकर झूमते देखा होगा, विशेषतौर पर पंडालों या फिर किसी मंदिर में। आमतौर पर इसे भूत-प्रेत के साये के तौर पर मान लिया जाता है, पर क्या वास्तव में ये 'ऊपरी साया' के कारण होने वाली समस्या है या फिर कोई मानसिक स्वास्थ्य की दिक्कत?
Mass Hysteria: स्कूलों में बच्चे करने लगते हैं अजीबो-गरीब व्यवहार, मनोचिकित्सक से जानिए क्या है इसकी असल वजह?
भूत-प्रेत का साया या मानसिक रोग?
स्कूलों में बढ़ते इस तरह के मामले के पीछे क्या कारण है, इसे समझने के लिए अमर उजाला ने भोपाल स्थित मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी से संपर्क किया। डॉ सत्यकांत कहते हैं, वर्षों से इस तरह के मामले देखे जाते रहे हैं, कभी बच्चे तो कभी महिलाएं किसी विशेष आयोजन पर झमने, चीखने-चिल्लाने लग जाती हैं। इसे माता आने या फिर भूत-प्रेत की समस्या मानकर लोग लंबे समय तक अंधविश्वास के चक्कर में झाड़ फूंक कराते रहते हैं। पर असल में इन घटनाओं का भूत-प्रेत से कोई संबंध नहीं होता है बल्कि ये एक प्रकार का मानसिक रोग है जिसे 'मास हिस्टीरिया' के नाम से जाना जाता है।
हिस्टीरिया शब्द का उपयोग अक्सर भावनात्मक रूप से आवेशित व्यवहार के लिए किया जाता है, जिसमें व्यक्ति नियंत्रण से बाहर लगने लग जाता है। अगर ये घटनाएं एक साथ कई लोगों में होने लगें तो इसे मास हिस्टीरिया की समस्या के तौर पर जाना जाता है।
मास हिस्टीरिया के बारे में जानिए
मास हिस्टीरिया को मनोचिकित्सा में 'कलेक्टिव ऑब्सेशनल बिहेवियर' के तौर पर भी जाना जाता है। इसमें किसी समूह के लोग बाध्यकारी रूप में डरावना व्यवहार करना शुरू कर देते हैं। ऐसा सिर्फ भारत में ही नही हैं, यूनाइटेड किंगडम सहित कई अन्य देशों में भी इस तरह के मामले रिपोर्ट किए जाते रहे हैं।
किंग्स कॉलेज लंदन में प्रो. साइमन वेस्ले कहते हैं, मास हिस्टीरिया सनक, घबराहट और असामान्य स्थितियों का वर्णन करने वाली समस्या है, जिसमें एक व्यक्ति को देखकर साथ के लोग भी अनियंत्रित रूप से व्यवहार करना शुरू कर देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं के समूह में ये घटनाएं अधिक देखी जाती रही हैं।
क्या है मास हिस्टीरिया के पीछे की वजह?
किसी समूह में घबराहट-भय के तेजी से फैलने की स्थिति के लिए "मास हिस्टीरिया" शब्द का उपयोग किया जाता है। डॉ सत्यकांत बताते हैं, मनोरोगों के संदर्भ में, यह सामूहिक व्यवहार की श्रेणी में आता है। इसके पीछे अवचेतन मन के तनाव को प्रमुख कारण माना जाता है। ये स्कूल की समस्या, घर परिवार के तनाव के कारण हो सकती है। मन की नकारात्मक स्थितियों के शारीरिक लक्षणों में बदलने की समस्या को हिस्टीरिया के रूप में जाना जाता है।
डॉक्टर बताते हैं, महिलाओं में कोपिंग स्किल और अभिव्यक्ति की कमी देखी जाती रही है, जिससे मन में ही लंबे समय तक कोई समस्या घर करती जाती है और हिस्टीरिया के तौर पर सामने आती है। हिस्टीरिया के शिकार ज्यादातर लोगों में स्ट्रेस, डिप्रेशन जैसी मनोरोग स्थितियों का निदान किया जाता रहा है।
डॉक्टर सत्यकांत कहते हैं, जिन दो राज्यों के स्कूल में ये मामले रिपोर्ट किए गए हैं, वहां बच्चों की काउंसिलिंग की सख्त जरूरत है, जिससे समस्या का समय रहते सही निदान और उपचार किया जा सके। इन घटनाओं को अंधविश्वास या भूत-प्रेत से जोड़कर बिल्कुल नहीं देखा जाना चाहिए। काउंसिलिंग और सामान्य उपचार की विधियों से इन समस्याओं को आसानी से ठीक किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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