कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए सुरक्षात्मक उपायों को प्रयोग में लाने को ही सबसे सुरक्षित तरीका माना जा रहा है। इसके लिए लोगों से बार-बार हाथों को धोने और मास्क पहनने की अपील की जाती रही है। लेकिन क्या आप मास्क पहनकर भी सुरक्षित हैं? ऐसा सवाल इसलिए किया जा रहा है क्योंकि हाल के ही एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि मास्क बनाने के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री और उसके फैब्रिक लेयर्स पर निर्भर करता है कि आप संक्रमण से कितना सुरक्षित रह सकते है? यानी अगर आपके मास्क की क्वालिटी सही नहीं है तो इसे पहनने के बाद भी आप खुद को सुरक्षित नहीं मान सकते हैं।
2 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
अमेरिका के जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने एक हालिया अध्ययन के दौरान मास्क और इसके संक्रमण रोकने की क्षमता का जिक्र किया है। एयरोसोल साइंस एंड टेक्नोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में विशेषज्ञों ने तमाम तरह के फैब्रिक से होकर अत्यंत छोटे कणों के आर-पार निकलने के बारे में बताया है।
3 of 6
Driving with Face Mask
- फोटो : Pexels
विशेषज्ञों का कहना है कि मास्क बनाने में इस्तेमाल सामग्री यानी कि उसका फैब्रिक, मास्क कितना कसा है और साथ ही इसमें इस्तेमाल की गई परतें कोरोना वायरस के प्रसार को प्रभावित कर सकती हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि इंसानों के बाल का व्यास लगभग 50 माइक्रोन होता है, जबकि 1 मिलीमीटर आकार में 1,000 माइक्रोन होता है यानी कि अगर मास्क की क्वालिटी सही नहीं है तो कई तरह के छोटे कण और वायरस उससे आर पार हो सकते हैं।
स्कूल ऑफ केमिकल एंड बायोमोलेक्युलर इंजीनियरिंग एंड स्कूल ऑफ अर्थ एंड एटमॉस्फेरिक साइंसेज में प्रोफेसर नांग ली के मुताबिक हवा में अतिसूक्ष्म कण कई घंटों से लेकर कई दिनों तक रह सकते है, यह आमतौर पर उस स्थान के वेंटिलेशन पर निर्भर करता है। यदि किसी स्थान पर हवा के निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है तो ये छोटे कण बहुत लंबे समय तक रह सकते हैं।
वैज्ञानिकों शोध के दौरान 33 विभिन्न प्रकार के पदार्थों का परीक्षण किया जिनसे मास्क बनाए जाते हैं। इनमें सूती और पॉलिस्टर जैसे एक परत वाले बुने हुए कपड़े भी शामिल थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि एक ही तरह के कपड़े में से भी तमाम प्रकार के तत्वों के निकलने परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं।