देश में पिछले दिनों कुछ ऐसी खबरें सामने आईं जिनमें लोगों को भूलवश पहली और दूसरी डोज में अलग-अलग कंपनी की वैक्सीन लगी दी गई थी। इस खबर ने लोगों में काफी डर का माहौल बना दिया था। चूंकि भारत के वैक्सीनेशन प्रोटोकॉल के तहत वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज में एक ही कंपनी के टीके दिए जाने की सलाह दी गई है, ऐसे में विशेषज्ञ वैक्सीन के 'मिक्स-एंड-मैच' को भारत के लिए उपयुक्त नहीं मान रहे थे। हालांकि हालिया अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टस में बताया जा रहा है कि कई देशों ने अपने लोगों को 'मिक्स-एंड-मैच' वैक्सीन लगवाने की अनुमति दे दी है।
कोरोना से लड़ने का सबसे अलग तरीका, ये देश कर रहे हैं ऐसी वैक्सीन का इस्तेमाल
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टीकों की प्रभाविकता बढ़ाने के लिए कई देश दे रहे हैं' मिक्स-एंड-मैच' वैक्सीन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से कोरोनवायरस का डेल्टा वैरिएंट दुनियाभर में तेजी से फैल रहा है, यह काफी चिंता का विषय है। कई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि कोरोना का यह वैरिएंट उपलब्ध टीकों की प्रभावकारिता दर कम कर सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों डोज में अलग-अलग कंपनी की वैक्सीन को देकर टीकों की प्रभाविकता को और बढ़ाया जा सकता है। हालांकि 'मिक्स-एंड-मैच' वैक्सीन की प्रभाविकता को जानने के लिए फिलहाल और अधिक अध्ययन और नैदानिक परीक्षणों की आवश्यकता है।
किन देशों में दी जा रही है 'मिक्स-एंड-मैच' वैक्सीन
दुनिया के कुछ देशों में 'मिक्स-एंड-मैच' वैक्सीन देने की शुरुआत हो चुकी है। उदाहरण के लिए कनाडा और थाईलैंड जैसे देश वर्तमान में दो खुराक/तीन-खुराक में अलग-अलग टीके लगवाने की अनुमति दे चुके हैं। कोरोना के डेल्टा वैरिएंटस के तेजी से बढ़ते मामलों में वर्तमान की वैक्सीन नीति को प्रभावी न मानते हुए बहरीन, भूटान, इटली, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंट लाइन वर्करों को दोनों डोज में अलग-अलग कंपनी की वैक्सीन लगवाने की अनुमति प्रदान कर दी है।
'मिक्स-एंड-मैच' वैक्सीनेशन के पीछे क्या तर्क है
कोविड की 'मिक्स-एंड-मैच' वैक्सीन देने वाले देशों का मानना है कि इससे शरीर में बनी एंटीबॉडीज की प्रभाविकता को बढ़ाया जा सकता है। हाल के कई अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने बताया है कि मौजूदा समय में दी जा रही कुछ वैक्सीन डेल्टा वैरिएंट्स के खिलाफ असरदार साबित नहीं हो रही हैं ऐसे में दो अलग-अलग वैक्सीन का उपयोग सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया को बढ़ावा दिया जा सकता है। इसी से संबंधित हाल ही में हुए एक क्लीनिकल ट्रायल में विशेषज्ञों ने पाया कि फाइजर और एस्ट्राजेनेका (कोविशील्ड) की मिक्स वैक्सीन, दो फाइजर या दो एस्ट्राजेनेका वैक्सीन डोज के मुकाबले ज्यादा प्रभावी साबित हो सकती है।
क्या है विशेषज्ञों की राय
'मिक्स-एंड-मैच' वैक्सीनेशन को लेकर किए गए कुछ क्लीनिकल ट्रायल्स में भले ही अच्छे परिणाम देखने को मिले हों लेकिन कुछ चिकित्सा विशेषज्ञ और डॉक्टर इस नीति के पक्ष में नहीं हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जब वैक्सीनेशन की शुरुआत हुई थी तब लोगों को एक ही कंपनी के दोनों डोज लेने को कहा गया था। 'मिक्स-एंड-मैच' वैक्सीनेशन को लेकर अभी पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं हैं जिससे यह प्रमाणित हो सके कि यह कितना फायदेमंद है और इसके क्या नुकसान हो सकते है। इसके अलावा 'मिक्स-एंड-मैच' वैक्सीनेशन में पहली डोज से बनी एंटीबॉडीज को बूस्ट होने का मौका नही मिल पाएगा। पर्याप्त अध्ययनों के अभाव में स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस नीति को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मान रहे हैं।
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नोट: यह लेख तमाम मीडिया रिपोर्टस में छपे विशेषज्ञों की राय के आधार पर तैयार किया गया है।
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