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बच्चों का टीकाकरण: कोवाक्सिन के आपात इस्तेमाल की मंजूरी, जानिए अब तक कितने सुरक्षित हैं आपके बच्चे?

Tue, 12 Oct 2021 03:26 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 12 Oct 2021 03:26 PM IST
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many children got antibodies after covid infection, helpful to save from third wave
कोरोना की तीसरी लहर और बच्चे - फोटो : Pixabay

देश में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। कई रिपोर्टस में कहा जा रहा है कि संभावित तीसरी लहर का असर बच्चों पर ज्यादा देखने को मिल सकता है। इसके पीछे बच्चों के लिए वैक्सीन की उपलब्धता न हो पाने को एक कारण के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अब ऐसे सवालों पर पूर्णविराम लग गया है। देश में 2 से 18 साल के बच्चों के लिए पहली वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। मंगलवार को ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने बच्चों के लिए कोवाक्सिन के आपात इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। 


बच्चे कोरोना से कितने सुरक्षित हैं, इस बारे में तमाम सर्वे किए जा चुके हैं। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) ने एक सीरो सर्वे की रिपोर्ट में बताया है कि यहां तकरीबन 51 फीसदी बच्चों में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज मिली है। यह सर्वे 18 साल तक के बच्चों पर किया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इस सर्वे के दो मायने हैं। पहला- मुंबई में 50 फीसदी से ज्यादा बच्चों को कोरोना का संक्रमण हो चुका है और दूसरा जिन बच्चों को संक्रमण हुआ है उनमें कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज पाई गई हैं। ऐसे में अगर तीसरी लहर आती है तो इन बच्चों को  काफी हद तक सुरक्षित माना जा सकता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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मुंबई में आधे से ज्यादा बच्चों में मिली एंटीबॉडीज (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

मुंबई के आधे से ज्यादा बच्चों में पाई गईं सुरक्षात्मक एंटीबॉडीज
इस सीरो सर्वे के लिए मुंबई के 24 वार्ड से 2176 ब्लड सैंपल एकत्रित किए गए थे। 1 अप्रैल 2021 से 15 जून 2021 के बीच यह सर्वे किया गया। सैपल के अध्ययन के दौरान पाया गया कि 10-14 साल की आयु वाले बच्चे सबसे ज्यादा (53.43 फीसदी) संक्रमित हुए। हालांकि सीरो सर्वे का कुल औसत देखा जाए तो 51.18 बच्चों में एंटीबॉडीज पाई गई हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इन बच्चों के शरीर में बनी एंटीबॉडीज अगले संक्रमण से सुरक्षित रखने में मददगार साबित होंगी।

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तीसरी लहर से बच्चों को बचाएगी एंटीबॉडी - फोटो : iStock

10-14 आयु वर्ग वाले बच्चों हुए ज्यादा संक्रमित
बीएमसी का यह चौथा सीरो सर्वे था। इसमें जांचकर्ताओं ने उम्र के आधार पर समूहों को बांटा। जांच में सबसे ज्यादा 10-14 आयु वर्ग वाले 53.43 फीसदी बच्चों को संक्रमित पाया गया। वहीं 
1-4 साल की उम्र वाले बच्चों में 51.04, 5-9 साल के बच्चों में 47.33, 10-14 आयु वर्ग वाले बच्चों में 53.43 जबकि 15-18 आयु वर्ग वाले बच्चों में संक्रमण की दर 51.39 फीसदी की पाई गई। इस हिसाब से एक औसत निकालें तो 18 साल तक 51.18 फीसदी बच्चों को कोरोना से संक्रमित पाया गया। 

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बच्चे कोरोना की तीसरी लहर से कितने सुरक्षित (सांकेतिक) - फोटो : i stock

क्या कहते हैं असम के आंकड़े
मुंबई के अलावा असम से बच्चों के संक्रमण की आई रिपोर्ट में दूसरी लहर के दौरान 34,606 बच्चों को कोरोना से संक्रमित रहने की बात कही जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि दूसरी लहर में 18 वर्ष से कम उम्र के 34 से ज्यादा बच्चों को कोरोना से संक्रमित पाया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, असम की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया है कि 1 अप्रैल से 26 जून के बीच 2.8 लाख कोविड पॉजिटिव मामलों में से 34,606 मामले बच्चों के हैं। 5 साल से कम आयु के कुल 5,755 बच्चे संक्रमित हुए जबकि 6-18 की आयु वर्ग में यह आंकड़ा 28,851 का है।

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तीसरी लहर का बच्चों पर कम प्रभाव डालने की उम्मीद - फोटो : iStock

क्या हैं इन रिपोर्टस के मायने
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक सर्वेक्षण के परिणामों को तीसरी लहर को देखते हुए अच्छा संकेत माना जा सकता है। जो बच्चे अब तक कोरोना से संक्रमित होकर ठीक हो चुके हैं उनमें से अधिकांश बच्चों ने वायरस के खिलाफ प्राकृतिक प्रतिरक्षा विकसित कर ली है जो अगले चार या पांच महीनों तक उनकी रक्षा करेगी। ऐसे बच्चों को तीसरी लहर के खिलाफ काफी हद तक सुरक्षित माना जा सकता है। उम्मीद है कि तीसरी लहर का यह बच्चे आसानी से मुकाबला कर सकेंगे।

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नोट:
यह लेख बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) द्वारा जारी सीरो सर्वे की रिपोर्ट और असम के सरकारी विभाग से मिले आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है।  

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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