अच्छी नींद को सेहत का आधार माना जाता है। अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि जिन लोगों की रात की नींद अच्छी होती है उनमें कम नींद लेने वालों की तुलना में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भी कम होता है। एक रात की भी नींद की समस्या आपको अगले दिन थकान-कमजोरी और चिड़चिड़ेपन का एहसास करा सकती है। वहीं अगर आपको अक्सर ये दिक्कत बनी रहती है यानी आपको अनिद्रा या नींद विकार है तो ये गंभीर रोगों का कारक हो सकती है।
Sleep Quality: नींद में सुधार कर लें तो बुढ़ापे में भी बेहतर रहेगी याददाश्त, इन बीमारियों में भी मिलेगा लाभ
डिमेंशिया का हो सकता है खतरा
नींद विकारों के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जानने के लिए किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि 60 साल से अधिक उम्र के व्यक्तियों में हर साल गहरी नींद में अगर एक फीसदी की भी कमी आती है तो इसके कारण डिमेंशिया होने की आशंका 27 फीसदी तक बढ़ सकती है। अध्ययन में कहा गया है कि अगर कम उम्र से ही गहरी नींद लाने के लिए प्रयास कर लिए जाएं तो बुढ़ापे में याददाश्त जाने वाली इस बीमारी के खतरे को कई गुना तक कम किया जा सकता है। यानी नींद आपके मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए बहुत आवश्यक है।
वजन को कंट्रोल रखने में ये सहायक
अध्ययनों में हर रात 7 घंटे से कम सोने को नींद की समस्या के तौर पर परिभाषित किया गया है। ये वजन बढ़ने और हाई बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के जोखिम को बढ़ाने वाली स्थिति हो सकती है। 2020 के एक विश्लेषण में पाया गया कि जो वयस्क प्रतिरात 7 घंटे से कम सोते थे, उनमें मोटापा विकसित होने का जोखिम 41% बढ़ गया था। यानी कि अगर आप वजन को कंट्रोल रखना चाहते हैं तो नींद में सुधार करना बहुत आवश्यक है।
दिल रहता है स्वस्थ
नींद की गुणवत्ता और अवधि में कमी को हृदय रोगों के खतरे से जोड़कर देखा जाता रहा है। अध्ययनों के विश्लेषण में पाया गया कि प्रतिदिन 7 घंटे से कम सोने से हृदय रोगों से मृत्यु का जोखिम 13% बढ़ जाता है। यदि आप नींद में सुधार करते हैं और रोजाना रात को 7-9 घंटे की निर्बाध नींद लेते हैं तो ये रक्तचाप को कंट्रोल रखने में सहायक है और इससे गंभीर हृदय रोगों के विकसित होने का जोखिम कम हो सकता है।
आप डिप्रेशन से रह सकते हैं सुरक्षित
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे अवसाद और स्ट्रेस के लिए भी खराब नींद की गुणवत्ता और नींद संबंधी विकारों को एक कारण माना जाता रहा है। 2,672 प्रतिभागियों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि रोजाना रात में नींद पूरी न कर पाने वाले लोगों में समय के साथ अवसाद होने का खतरा अधिक हो सकता है। अनिद्रा या ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया जैसी नींद संबंधी विकारों से पीड़ित लोगों में भी अवसाद की दर अधिक होती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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