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Long Covid Study: दो साल तक बनी रह सकती हैं कई तरह की दिक्कतें, वैज्ञानिकों ने ऐसे लोगों में पाया अधिक खतरा

Thu, 12 May 2022 02:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 12 May 2022 02:09 PM IST
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Long covid symptoms two years after infection, Lancet study shows risk of post covid syndrome
कोरोना से रिकवरी के बाद भी बनी रहती हैं दिक्कतें - फोटो : Pixabay

वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना महामारी के कारण संक्रमण की गंभीरता और लॉन्ग कोविड, दोनों ही बड़ी समस्याएं बनी हुई हैं। कोरोना के म्यूटेटेड वैरिएंट्स एक तरफ जहां लोगों में गंभीर रोगों का कारण बन रहे हैं, वहीं कुछ लोगों में संक्रमण से ठीक होने के एक-दो साल बाद तक भी पोस्ट कोविड की समस्या बनी हुई देखी जा रही है।



स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आप संक्रमण के दौरान एसिम्टोमैटिक ही रहे हैं, तो भी ठीक होने के बाद किसी समस्या को इग्नोर नहीं करना चाहिए। लॉन्ग कोविड के जोखिमों को जानने के लिए शोधकर्ताओं ने हाल ही में किए एक शोध में चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। 

मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती रहे आधे से अधिक लोगों में दो साल के बाद तक भी कम से कम एक लक्षण बना हुआ है। शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में पाया कि कोविड-19 संक्रमितों, विशेषकर जिन लोगों को संक्रमण के दौरान अस्पताल में रहना पड़ा, उनमें कई प्रकार के दीर्घकालिक प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। दो साल से अधिक समय तक बने रहने वाले लक्षण गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का कारण बन सकते हैं। आइए आगे इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।

Long covid symptoms two years after infection, Lancet study shows risk of post covid syndrome
लॉन्ग कोविड के जोखिमों को जानिए - फोटो : iStock

लॉन्ग कोविड से ठीक होने में लग सकता है लंबा समय

चीन के वुहान शहर स्थित जिन-इन टैन हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं द्वारा लॉन्ग कोविड के जोखिमों को जानने के लिए किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि कोरोना का संक्रमण लोगों को शारीरिक और मानसिक दोनों ही रूप से प्रभावित कर रहा है। लॉन्ग कोविड के खतरे से उबरने में कई लोगों को दो साल से भी अधिक का समय लग जा रहा है।

पोस्ट कोविड सिंड्रोम के खतरे को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि रोगी और चिकित्सक, दोनों को पोस्ट कोविड के लक्षणों को लेकर विशेष सतर्कता दिखाने और समय पर उपचार की  तत्काल आवश्यकता है।

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लॉन्ग कोविड की समस्याएं - फोटो : Pixabay

अध्ययन में क्या पता चला?

शोधकर्ताओं की टीम ने लॉन्ग कोविड के जोखिम और इसकी गंभीरता को जानने के लिए 7 जनवरी से 29 मई, 2020 के बीच कोविड-19 के गंभीर संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती हुए 1,192 प्रतिभागियों के डेटा का अध्ययन किया। विशेषज्ञों ने कई स्तर पर किए गए इस विश्लेषण के दौरान पाया कि करीब 55 फीसदी लोगों में संक्रमण के दो साल बाद तक कोई न कोई समस्या बनी हुई थी। 68 फीसदी लोगों ने छह महीने बाद तक कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में सूचित किया।

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लॉन्ग कोविड में थकान और कमजोरी की समस्या - फोटो : Pixabay

लॉग कोविड की प्रमुख समस्याएं

अध्ययन के आधार पर शोधकर्ता बताते हैं कि थकान या मांसपेशियों में कमजोरी की समस्या लॉन्ग कोविड में सबसे प्रमुख रूप से रिपोर्ट की जा रही है। संक्रमण से ठीक हो चुके 52 फीसदी लोगों में इस तरह की दिक्कत छह महीने, वहीं 30 फीसदी लोगों में यह दो साल से अधिक समय तक देखी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लॉन्ग कोविड में कुछ लोगों को गंभीर लक्षणों का भी अनुभव हो सकता है, जिसके बारे में सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है। 

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पोस्ट कोविड सिंड्रोम - फोटो : iStock

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

यूके स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर के प्रमुख राहेल इवांस कहते हैं, इस अध्ययन में लॉन्ग कोविड के जोखिमों के बारे में विस्तार से पता चलता है। संक्रमण के दौरान अस्पताल में भर्ती  रह चुके लोगों के पांच महीने से एक साल तक में पूरी तरह से ठीक होने के आंकड़े कम देखे गए हैं। ज्यादातर लोगों में दो साल तक भी समस्याएं बनी रह सकती हैं। लॉन्ग कोविड मानसिक स्वास्थ्य, ऑर्गन डैमेज और जीवन की गुणवत्ता से संबंधित समस्याओं का कारण भी बनता हुआ देखा जा रहा है। 

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