कोरोना वायरस संक्रमण ने हमारे शरीर को कई तरह से प्रभावित किया है। पिछले दो साल से जारी इस वैश्विक महामारी का शरीर के कई अंगों पर गंभीर दुष्प्रभाव देखने को मिला है। अध्ययनों से पता चलता है कि कोरोना वायरस ने फेफड़े और हृदय जैसे अंगों को गंभीर क्षति पहुंचाई है, वहीं हाल ही में सामने आए कोरोना के कुछ वैरिएंट्स के अन्य अंगों पर भी दुष्प्रभावों के बारे में पता चलता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद से वैश्विक स्तर पर लिवर रोगों के मामलों में इजाफा हुआ है, ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या कोरोना संक्रमण लिवर की समस्याओं का भी कारण बन सकता है?
World Liver Day 2022: कोविड-19 ने बढ़ा दी हैं लिवर की समस्याएं, ये लक्षण बताते हैं स्वस्थ नहीं है आपका सबसे महत्वपूर्ण अंग
कोविड-19 और लिवर की समस्याएं
कोविड-19 और लिवर रोगों के जोखिम को जानने के लिए अध्ययन कर रही शोधकर्ताओं की एक टीम ने महामारी के कारण लिवर की समस्याओं में वृद्धि का दावा किया है। लिवर इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित इस शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि महामारी के पहले वर्ष के दौरान जीवनशैली में आए बदलाव के कारण दुनियाभर में लिवर रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी आई है।
जापान में ओसाका सिटी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए अध्ययन से पता चलता है कि कोविड महामारी के बाद से मेटाबॉलिक डिस्फंक्शन के कारण फैटी लिवर डिजीज के मामले काफी बढ़े हैं। शोध में पाया गया कि महामारी के दौरान रात में देर से भोजन करने, शराब के सेवन में वृद्धि के साथ तंबाकू-धूम्रपान जैसे कारकों के चलते फैटी लिवर डिजीज के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक सभी लोगों को फैटी लिवर डिजीज के लक्षणों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
फैटी लिवर के लक्षणों के बारे में जानिए
क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक फैटी लिवर की समस्या में कुछ लोगों में इसके लक्षण लंबे समय तक नजर ही नहीं आते हैं। ऐसे में पेट से संबंधित अन्य संकेतों पर भी विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता होती है। सामान्यतौर पर फैटी लिवर डिजीज के कारण लोगों को इस तरह की दिक्कतों का अनुभव हो सकता है।
- पेट में दर्द, विशेषकर ऊपरी दाहिने हिस्से में।
- मतली, भूख न लगना या वजन कम होना।
- त्वचा और आंखों का पीला होना (पीलिया)।
- पेट और पैर में सूजन की समस्या (एडिमा)।
- अत्यधिक थकान या भ्रम की स्थिति।
- कमजोरी बने रहना।
किन लोगों में होता है अधिक खतरा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ स्थितियां आपमें फैटी लिवर की समस्या को बढ़ा सकती हैं, इस बारे में सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
- पोस्टमेनोपॉजल महिलाओं में फैटी लिवर की समस्या का खतरा बढ़ जाता है।
- पेट की चर्बी बढ़ना, मोटापा।
- हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह या हाई कोलेस्ट्रॉल।
- ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया की समस्या भी फैटी लिवर को बढ़ा सकती है।
फैटी लिवर डिजीज से बचाव कैसे करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक दैनिक जीवन में कुछ साधारण से उपाय करके फैटी लिवर डिजीज की समस्या से बचाव किया जा सकता है।
- शराब से सेवन से परहेज करें।
- अपना वजन नियंत्रित रखें।
- पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें। सेचुरेटेड फैट, ट्रांस फैट और कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करें।
- ब्लड शुगर, ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रबंधित करने के उपाय करते रहें।
- रोजाना कम से कम 30 मिनट के व्यायाम का लक्ष्य रखें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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