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Covid-19: हल्के लक्षणों वाला भी रहा है संक्रमण तो हो जाइए सावधान, 77% लोगों में देखी गई ये स्वास्थ्य समस्या

Thu, 08 Feb 2024 12:23 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 08 Feb 2024 12:23 PM IST
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latest study on covid-19 says even mild case of infection can cause trouble sleeping and insomnia
कोरोना संक्रमण का खतरा - फोटो : iStock

दुनियाभर में कोरोना संक्रमण का खतरा पिछले चार साल से अधिक समय से जारी है। अब तक 70.28 करोड़ से अधिक लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं, 69.80 लाख लोगों की संक्रमण से मौत हो चुकी है। वर्ल्डोमीटर द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 67.37 लोग संक्रमित होने के बाद ठीक भी हो चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में भी कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम देखा जा रहा है, लॉन्ग कोविड की समस्या कई लोगों में एक साल तक भी बनी हुई देखी गई है।



हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया, कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में कई प्रकार के स्वास्थ्य जोखिम देखे जा रहे हैं, यहां तक कि जिन लोगों में संक्रमण के दौरान हल्के लक्षण भी थे, उनमें भी कई प्रकार की दिक्कतें बनी हुई हैं। अस्पतालों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग आ रहे हैं जो संक्रमण से तो ठीक हो चुके हैं पर उनमें स्वास्थ्य समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।

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नींद न आने की समस्या - फोटो : Pixabay

कोरोना के दीर्घकालिक दुष्प्रभाव

कोरोना के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों को जानने के लिए किए गए शोध में विशेषज्ञों ने बताया, कोविड-19 के हल्के लक्षण वाले लोगों को भी लंबे समय तक सोने में परेशानी बनी हुई देखी जा रही है। संक्रमण के शिकार रहे अधिकतर लोग अनिद्रा या नींद से संबंधित कई अन्य प्रकार की समस्याओं के शिकार पाए जा रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पहले के अध्ययनों में भी इस बात को लेकर अलर्ट किया जाता रहा था कि कोविड-19 के कारण नींद विकारों की समस्या हो सकती है, पर ये मामले गंभीर लक्षण वाले उन रोगियों में अधिक थे जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता थी। हालांकि इस शोध में कहा गया है कि हल्के स्तर के संक्रमण के शिकार रहे लोगों में भी नींद की समस्याएं हो सकती हैं।

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कोरोना संक्रमण के दुष्प्रभाव - फोटो : Istock

अध्ययन में क्या पता चला?

फ्रंटियर्स इन पब्लिक हेल्थ जर्नल में इससे संबंधित रिपोर्ट प्रकाशित हई है, जिसमें कोरोना संक्रमण का शिकार रहे लोगों में नींद विकारों के बारे में अलर्ट किया गया है। 1,056 कोविड-19 मरीजों पर ये शोध किया गया, हालांकि ये लोग अस्पताल में भर्ती नहीं थे। इन प्रतिभागियों में अनिद्रा, अवसाद और चिंता जैसी समस्याओं का मूल्यांकन किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि इनमें से 76.1% को अनिद्रा और 22.8% को गंभीर अनिद्रा की दिक्कत थी।

एक तिहाई प्रतिभागियों ने कहा कि उनकी नींद की गुणवत्ता खराब है, नींद की अवधि कम है या फिर उन्हें सोने में दिक्कत होती है। आधे लोगों ने बताया कि संक्रमण के बाद वे रात कम सो पाते हैं। 

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अनिद्रा विकारों की समस्या - फोटो : istock

अधिकतर लोगों में नींद की समस्या

शोधकर्ताओं ने बताया, अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों को पहले से अवसाद या स्ट्रेस की समस्या थी, उनमें अनिद्रा विकसित होने का जोखिम अधिक देखा गया है। पहले से क्रोनिक बीमारियों जैसे- डायबिटीज, हार्ट या मेटाबॉलिज्म की समस्या वाले लोगों में भी इस तरह का खतरा देखा जा रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं, कोविड-19 से ठीक हो चुके लोगों में अनिद्रा की समस्या अगर लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका सेहत पर और भी कई प्रकार से असर हो सकता है।

नींद विकारों की समस्या को हृदय रोगों, ब्लड प्रेशर और मानसिक स्वास्थ्य विकारों को भी बढ़ाने वाला पाया गया है।

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कोविड-19 के दुष्प्रभाव - फोटो : Pixabay

क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
 

अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने कहा, हम महामारी की शुरुआत से ही कई प्रकार की पोस्ट कोविड समस्याओं को देख रहे हैं। अब तक माना जाता रहा था कि लॉन्ग कोविड का खतरा उन लोगों में अधिक होता है जिनमें गंभीर लक्षण रहे हों, पर इस शोध में हल्के स्तर के संक्रमण के शिकार लोगों में भी कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं बनी हुई देखी जा रही है। अगर आप भी कोरोना के शिकार रहे हैं तो इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानना और समय रहते उसका उपचार प्राप्त करना आवश्यक हो जाता है।


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स्रोत और संदर्भ
Sleep quality among non-hospitalized COVID-19 survivors: a national cross-sectional study

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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