वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना महामारी इस समय लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। पिछले कुछ समय से भारत सहित दुनिया के कई अन्य देशों में बढ़ते संक्रमण के मामले डराने वाले हैं। ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स की जिस तरह से संक्रामकता दर देखी जा रही है, वह निश्चित ही चिंता बढ़ाने वाली है। शोध में वैज्ञानिकों का कहना है कि सभी लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाव के उपायों का लगातार पालन करते रहना चाहिए, यही फिलहाल संक्रमण पर काबू पाने में मददगार हो सकता है। इसके साथ ही शोधकर्ता वैक्सीनेशन पर भी लगातार जोर दे रहे हैं। वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों में संक्रमण की स्थिति में गंभीर रोग और इसके कारण होने वाली मौत का खतरा कम होता है।
Lancet Study: कोरोना से बचाव के लिए वैज्ञानिकों ने पता लगा लिया सबसे प्रभावी तरीका, नए वैरिएंट्स पर भी हो सकता है असरदार
बूस्टर डोज से मिल सकती है अतिरिक्त सुरक्षा
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि वैक्सीन की दो डोज की तुलना में अगर तीसरी या बूस्टर डोज लगाई जाए तो इससे अतिरिक्त सुरक्षा मिल सकती है। वहीं शोध में पाया गया है कि इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मिक्स एंड मैच वैक्सीन प्रणाली को प्रयोग में लाना कारगर हो सकता है।
शोध में पाया गया कि जिन लोगों को कोरोनावैक वैक्सीन की पहली दो खुराक लगी थी, उन्हें फाइजर या एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का बूस्टर शॉट देकर संक्रमण और रोग के खिलाफ अधिक प्रभावी ढंग से सुरक्षा दी जा सकती है। वैज्ञानिकों ने पाया कि ऐसा करके कोरोना के अत्याधिक संक्रामक वैरिएंट्स से भी अतिरिक्त सुरक्षा पाई जा सकती है।
अध्ययन में क्या पता चला?
चिली के विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर चिली के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत किए गए इस सर्वे में मिक्स एंड मैच वैक्सीन बूस्टर शॉट की प्रभाविकता के बारे में पता चलता है। इस शोध के लिए 11,174,257 लोगों को शामिल किया गया, जिनमें से 41 लाख से अधिक लोगों को कोरोनावैक वैक्सीन की दो डोज लग चुकी थी।
अध्ययन अवधि के दौरान इन लोगों को वैक्सीन की बूस्टर खुराक देकर इसके प्रभावों को जानने की कोशिश की गई। इनमें से 1,921,340 प्रतिभागियों को एस्ट्राजेनेका, 2,019,260 को फाइजर और 1,86,946 को कोरोनावैक का ही तीसरा शॉट दिया गया।
गंभीर मामलों से बचाव में मददगार है मिक्स एंड मैच बूस्टर शॉट
अलग-अलग वैक्सीन के बूस्टर शॉट के प्रभाव के इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को कोरोनावैक की ही तीसरी खुराक दी गई उनमें कोविड-19 रोगसूचकों को रोकने की प्रभावशीलता 79 प्रतिशत के करीब पाई गई। वहीं जिन लोगों को एस्ट्राजेनेका बूस्टर शॉट दिया गया उन्हें 93 प्रतिशत, जबकि फाइजर बूस्टर शॉट वालों को 97 प्रतिशत तक सुरक्षित पाया गया। इस आधार पर विशेषज्ञों का कहना है कि बूस्टर शॉट में अगर पहले से अलग कंपनी की वैक्सीन दी जाए तो लोगों की रोग के प्रति प्रभावशीलता को बढ़ावा दिया जा सकता है।
बूस्टर शॉट को लेकर जोर
अध्ययन के लेखकों ने बताया कि बूस्टर शॉट के लिए मिक्स एंड मैच वैक्सीन प्रणाली का उपयोग करना, कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती होने, वेंटिलेटर पर जाने और मृत्य के जोखिम को काफी हद तक कम करने में सहायक हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कई अध्ययन इस ओर इशारा करते हैं कि वैक्सीन की दो डोज से बनी प्रतिरक्षा प्रणाली कुछ समय के बाद कम होने लगती है, ऐसे में यह तरीका काफी मददगार हो सकता है।