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वैश्विक चर्चा: कोरोनावायरस प्रयोगशाला से लीक हुआ है या नहीं? अध्ययन में सामने आई यह बड़ी जानकारी

Fri, 09 Jul 2021 07:32 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 09 Jul 2021 07:32 PM IST
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laboratory accident of Coronavirus cannot be entirely dismissed, says scientists
कोरोनावायरस की उत्पत्ति कैसे हुई? - फोटो : PIB

दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के मामले की शुरुआत को डेढ़ साल से ज्यादा का समय बीत गया है। नोवेल कोरोना वायरस की उत्पत्ति कैसे हुए, कहीं यह वायरस मानव निर्मित तो नहीं है? इस बारे में लगातार चर्चा होती रही है, पर इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया था। इसी पहेली को सुलझाने के लिए हाल ही में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बड़ा दावा किया है। मौजूदा वैज्ञानिक साक्ष्यों की समीक्षा के आधार पर वैज्ञानिकों ने वायरस के प्रयोगशाला से लीक होने वाले एंगल की संभावना बेहद कम बताया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वायरस पशुओं से मनुष्यों में फैला है।


प्री-प्रिंट सर्वर ज़ेनोडो पर पोस्ट किए गए इस अध्ययन की समीक्षा में वैज्ञानिकों ने कहा है कि दुर्घटना स्वरूप कोरोना वायरस के प्रयोगशाला से लीक होने की घटना को वैसे तो पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता है, पर इसको प्रमाणित करने के लिए फिलहाल कोई पुख्ता सबूत भी उपलब्ध नहीं हैं।
आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं, वायरस की उत्पत्ति को लेकर वैज्ञानिकों ने किन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला है? 

laboratory accident of Coronavirus cannot be entirely dismissed, says scientists
लैब से कोरोना की उत्पत्ति के सबूत नहीं (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

कोरोना वायरस के स्रोत को जानने के लिए अध्ययन
घातक कोरोना वायरस की उत्पत्ति के बारे में वैश्विक बहस के बीच दुनियाभर के तमाम विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के 21 वैज्ञानिकों ने वायरस के स्रोत को जानने के लिए वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाणों की समीक्षा की। ऑस्ट्रेलिया स्थित सिडनी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एडवर्ड होम्स कहते हैं, "वर्तमान में उपलब्ध आंकड़ों का हमने सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया। हालांकि इस संबंध में हमें ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं जिससे यह स्पष्ट होता हो कि वायरस मानव जनित है या फिर किसी प्रयोगशाला से दुर्घटना स्वरूप लीक हुआ है। तमाम अध्ययनों के विश्लेषण के दौरान हमें वायरस के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से संबंधित होने के भी साक्ष्य नहीं मिले हैं।

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दुनियाभर में कोरोना के बढ़ते मामले (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

भविष्य में आ सकती हैं कई अन्य महामारियां
दिसंबर 2019 में चीन के वुहान में नोवेल कोरोनावायरस के पहले मामले के सामने आने के बाद से यह समझने कोशिशें जारी हैं कि सार्स-सीओवी-2 वायरस इंसानों में किस तरह से पहुंचा? वैज्ञानिकों का कहना है कि  इस बारे में अबतक कुछ स्पष्ट नहीं हो सका है, हमें इसके लिए और अध्ययन और साक्ष्यों की आवश्यकता होगी। फिलहाल हमें दोनों विषयों (प्रयोगशाला और जानवरों से उत्पत्ति) को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ने की जरूरत है। हमें इस बात को भी ध्यान में रखना होगा कि जिस तरह से नए-नए प्रकार के वायरस मिल रहे हैं, ऐसे में दुनिया, भविष्य की महामारियों के प्रति संवेदनशील हो गई है।

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तमाम देश के वैज्ञानिकों ने किए अध्ययन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

तमाम देशों के शोधकर्ताओं ने  किया अध्ययन
ब्रिटेन के एडिनबर्ग विश्वविद्यालय, कनाडा के सस्केचेवान विश्वविद्यालय, अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय बर्कले और पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी, न्यूजीलैंड में ओटागो विश्वविद्यालय और चीन के जियाओतोंग-लिवरपूल विश्वविद्यालय के साथ कई अन्य शीर्ष वैश्विक संस्था के शोधकर्ताओं ने मिलकर तमाम साक्ष्यों की समीक्षा की है। इस अध्ययन का अभी पीर-रिव्यू होना बाकी है।

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मानवजनित नहीं है कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का क्या कहना है?
वायरस मानव निर्मित है या किसी प्रयोगशाला में उत्पन्न किया गया है? इस बारे में जानने के लिए अमर उजाला ने वडोदरा, गुजरात में वरिष्ठ स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ माया वालेचा से बातचीत की। डॉ माया कहती हैं कि इस बारे में विचार करना गलत होगा कि कोरोना वायरस वुहान के किसी प्रयोगशाला से उत्पन्न किया गया है। हमारा विज्ञान अभी उतना भी आगे नहीं बढ़ा है जिसमें वायरस के निर्माण किया जा सके। यह कोई पहला कोरोना वायरस नहीं है, इससे पहले भी कोरोना वायरस के मामले दुनियाभर में देखे जा चुके हैं। 

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नोट:
यह लेख दुनियाभर के शीर्ष वैश्विक संस्था के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन की समीक्षा के आधार पर तैयार तैयार किया गया है। इस अध्ययन को प्री-प्रिंट सर्वर ज़ेनोडो पर पोस्ट किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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