दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के मामले की शुरुआत को डेढ़ साल से ज्यादा का समय बीत गया है। नोवेल कोरोना वायरस की उत्पत्ति कैसे हुए, कहीं यह वायरस मानव निर्मित तो नहीं है? इस बारे में लगातार चर्चा होती रही है, पर इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया था। इसी पहेली को सुलझाने के लिए हाल ही में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बड़ा दावा किया है। मौजूदा वैज्ञानिक साक्ष्यों की समीक्षा के आधार पर वैज्ञानिकों ने वायरस के प्रयोगशाला से लीक होने वाले एंगल की संभावना बेहद कम बताया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वायरस पशुओं से मनुष्यों में फैला है।
वैश्विक चर्चा: कोरोनावायरस प्रयोगशाला से लीक हुआ है या नहीं? अध्ययन में सामने आई यह बड़ी जानकारी
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कोरोना वायरस के स्रोत को जानने के लिए अध्ययन
घातक कोरोना वायरस की उत्पत्ति के बारे में वैश्विक बहस के बीच दुनियाभर के तमाम विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के 21 वैज्ञानिकों ने वायरस के स्रोत को जानने के लिए वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाणों की समीक्षा की। ऑस्ट्रेलिया स्थित सिडनी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एडवर्ड होम्स कहते हैं, "वर्तमान में उपलब्ध आंकड़ों का हमने सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया। हालांकि इस संबंध में हमें ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं जिससे यह स्पष्ट होता हो कि वायरस मानव जनित है या फिर किसी प्रयोगशाला से दुर्घटना स्वरूप लीक हुआ है। तमाम अध्ययनों के विश्लेषण के दौरान हमें वायरस के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से संबंधित होने के भी साक्ष्य नहीं मिले हैं।
भविष्य में आ सकती हैं कई अन्य महामारियां
दिसंबर 2019 में चीन के वुहान में नोवेल कोरोनावायरस के पहले मामले के सामने आने के बाद से यह समझने कोशिशें जारी हैं कि सार्स-सीओवी-2 वायरस इंसानों में किस तरह से पहुंचा? वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बारे में अबतक कुछ स्पष्ट नहीं हो सका है, हमें इसके लिए और अध्ययन और साक्ष्यों की आवश्यकता होगी। फिलहाल हमें दोनों विषयों (प्रयोगशाला और जानवरों से उत्पत्ति) को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ने की जरूरत है। हमें इस बात को भी ध्यान में रखना होगा कि जिस तरह से नए-नए प्रकार के वायरस मिल रहे हैं, ऐसे में दुनिया, भविष्य की महामारियों के प्रति संवेदनशील हो गई है।
तमाम देशों के शोधकर्ताओं ने किया अध्ययन
ब्रिटेन के एडिनबर्ग विश्वविद्यालय, कनाडा के सस्केचेवान विश्वविद्यालय, अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय बर्कले और पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी, न्यूजीलैंड में ओटागो विश्वविद्यालय और चीन के जियाओतोंग-लिवरपूल विश्वविद्यालय के साथ कई अन्य शीर्ष वैश्विक संस्था के शोधकर्ताओं ने मिलकर तमाम साक्ष्यों की समीक्षा की है। इस अध्ययन का अभी पीर-रिव्यू होना बाकी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का क्या कहना है?
वायरस मानव निर्मित है या किसी प्रयोगशाला में उत्पन्न किया गया है? इस बारे में जानने के लिए अमर उजाला ने वडोदरा, गुजरात में वरिष्ठ स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ माया वालेचा से बातचीत की। डॉ माया कहती हैं कि इस बारे में विचार करना गलत होगा कि कोरोना वायरस वुहान के किसी प्रयोगशाला से उत्पन्न किया गया है। हमारा विज्ञान अभी उतना भी आगे नहीं बढ़ा है जिसमें वायरस के निर्माण किया जा सके। यह कोई पहला कोरोना वायरस नहीं है, इससे पहले भी कोरोना वायरस के मामले दुनियाभर में देखे जा चुके हैं।
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नोट: यह लेख दुनियाभर के शीर्ष वैश्विक संस्था के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन की समीक्षा के आधार पर तैयार तैयार किया गया है। इस अध्ययन को प्री-प्रिंट सर्वर ज़ेनोडो पर पोस्ट किया गया है।
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