हृदय रोग, वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक माने जाते रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि यूनाइटेड स्टेट्स में हर 36 सेकेंड में एक व्यक्ति की मौत हृदय रोगों के कारण हो जाती है। जीवनशैली और गड़बड़ खानपान की आदतों ने लोगों में यह खतरा काफी अधिक बढ़ा दिया है। भारत में भी पिछले कुछ सालों में कम उम्र में हृदय रोगों के कारण मौत के मामले अधिक रिकॉर्ड किए गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर समय रहते हृदय रोगों के जोखिम और लक्षणों का पता लगाकर इलाज शुरू कर दिया जाए तो गंभीर मामलों और इससे होने वाली मौत के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। पर सबसे बड़ा सवाल कि हृदय रोगों का पहले से पता कैसे लगाया जाए?
Heart Disease Risk: ब्लड ग्रुप से जानिए आपमें हृदय रोगों का कितना खतरा? इस रक्त समूह वालों को पाया गया अधिक सुरक्षित
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ब्लड ग्रुप और हृदय रोगों का जोखिम
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित साल 2020 के एक शोध के अनुसार, ए और बी ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों में थ्रोम्बोलिक रोगों के विकास का अधिक जोखिम होता है लेकिन ओ ब्लड ग्रुप वालों की तुलना में इनमें हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम कम होता है।
वैज्ञानिकों ने पाया कि ओ ब्लड ग्रुप वालों की तुलना में ए ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों में हाइपरलिपिडिमिया, एथेरोस्क्लेरोसिस और हार्ट फेलियर का खतरा अधिक होता है। वहीं बी ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों में मायोकार्डियल इंफार्क्शन का जोखिम अधिक पाया गया। इस स्थिति में हृदय की मांसपेशियों के एक या अधिक हिस्सों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है।
ए ब्लड ग्रुप वालों में खतरा अधिक
शोध में आगे वैज्ञानिकों ने पाया कि ए ब्लड ग्रुप वालों में हार्ट फेलियर, एथेरोस्क्लेरोसिस, हाइपरलिपिडिमिया, एटोपी, स्लीप एपनिया होने का जोखिम अधिक हो सकता है। अलग-अलग ब्लड ग्रुप और हृदय रोगों के खतरे के लिंक के बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि रक्त समूहों में नॉन विलेब्रांड फैक्टर की मात्रा में अंतर के कारण यह होता है। नॉन विलेब्रांड फैक्टर, रक्त का थक्का बनाने वाला एक प्रोटीन है। रक्त के थक्कों को हृदय रोगों का प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है।
हृदय रोगों के जोखिम का कारण
विशेषज्ञों का कहना है, शोध में पाया गया है कि नॉन विलेब्रांड फैक्टर की अधिक सांद्रता के कारण नॉन ओ ब्लड ग्रुप वाले लोगों में, ओ ब्लड ग्रुप वालों की तुलना में रक्त के थक्के बनने की आशंका अधिक होती है। हालांकि इसके अलावा इस अध्ययन से यह भी पता चलता है कि नॉन ओ ब्लड ग्रुप वाले लोगों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रक्तस्राव और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा कम होता है। हृदय रोगों के अन्य कारकों को लेकर भी लोगों को ध्यान देते रहने की आवश्यकता है।
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं ने बताया कि नॉन ओ ब्लड ग्रुप वाले लोगों में हृदय रोग के जोखिम कारकों का खतरा अधिक पाया गया है। ओ ब्लड ग्रुप वालों की आयु, अन्य ब्लड ग्रुप वालों की तुलना में अधिक पाई गई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन की पुष्टि के लिए और विस्तार से तथा अलग-अलग मूल के लोगों पर शोध की आवश्यकता है, फिलहाल ओ ब्लड ग्रुप वाले लोगों को हृदय रोगों से अधिक सुरक्षित माना जा सकता है।
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स्रोत और संदर्भ
ABO Blood Group and Risk of Coronary Heart Disease in Two Prospective Cohort Studies
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