जैविक विकास के हिसाब से चिम्पांजियों को इंसानों के सबसे करीब माना जाता है।लेकिन दोनों के जैविक ढांचे पर नजर डालें, तो कई अंतर तो पहली नजर में सामने आ जाएंगे।इंसानों के शरीर में कई ऐसे अंग नहीं होंगे, जो चिम्पांजियों में होंगे और यही चीज इंसानों के साथ भी देखने को मिलेगी।जैविक ढांचे में फर्क की वजह इंसानों का सतत जैविक विकास है।लेकिन जैविक विकास की रफ़्तार बेहद धीमी होती है।इसी वजह से इंसानों के शरीर में आज भी कई ऐसी मांसपेशियां और हड्डियां पाई जाती हैं, जो किसी काम के नहीं हैं।
जानिए इंसानी शरीर के कौन से हैं वो 6 हिस्से जो अब किसी काम के नहीं
जैविक विकास के क्षेत्र में अध्ययन करने वाले डोरसा अमीर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इंसानी शरीर के उन हिस्सों का जिक्र किया है, जिनका आम जीवन में कोई इस्तेमाल नहीं बचा है।डोरसा कहते हैं, "आपका शरीर प्राकृतिक इतिहास के किसी संग्रहालय जैसा है।"ऐसे में सवाल ये उठता है कि जब इन अंगों और मांसपेशियों का इंसानी शरीर में कोई मकसद नहीं बचा है तो कई लोगों में ये मांसपेशियां क्यों पाई जाती हैं।इस सवाल का जवाब जैविक विकास की धीमी गति में है।
कुछ मामलों में ये अंग अपने लिए नए मकसद हासिल कर लेते हैं और इस प्रक्रिया को 'एक्सपेटेशन' कहते हैं।बीबीसी से बात करते हुए डोरसा कहते हैं, "आप शायद ये सोच रहे होंगे कि हमें ये कैसे पता है कि शरीर के इन हिस्सों का क्या मकसद था? इसका जवाब ये है कि इस मामले में हम सिर्फ अनुमान लगा सकते हैं। हम इन चीजों का आकलन इस आधार पर करते हैं कि ये मांसपेशियां किसी जीव के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए कितनी जरूरी थी।"आइए, बात करते हैं इंसानी शरीर के ऐसे ही कुछ हिस्सों के बारे में।
पेड़ों पर चढ़ने में मदद करने वाली मांसपेशी
इंसानी कलाई में मौजूद इस हिस्से को समझने के लिए आपको बस एक काम करना है।एक सपाट जगह पर अपने हाथ को रखिए और उसके बाद अपने अंगूठे से सबसे छोटी उंगली को छूने की कोशिश करें। क्या अपनी कलाई पर आपको दो मांसपेशियां दिखाई दीं? अगर हां तो जान लीजिए कि इसे पलमारिस लॉन्ग कहते हैं।लेकिन अगर आपकी कलाई पर ये मांसपेशी दिखाई नहीं दी हो तो परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि 18 फीसदी इंसानों में ये मांसपेशी नहीं पाई जाती है और ये किसी तरह की कमी से भी नहीं जुड़ी हुई है।
अगर पालमारिस लोन्गस नाम की इस मांसपेशी के मकसद की बात करें तो ठीक ऐसी ही मांसपेशी ओरेंगुटान जैसे जीवों में भी पाए जाती है।डोरसा कहते हैं, "इससे इस बात के संकेत मिलते हैं कि ये मांसपेशी इंसानों को पेड़ों पर चढ़ने में मददगार साबित होती होगी।लेकिन आजकल डॉक्टरों की नजर इस मांसपेशी पर रहती हैं क्योंकि रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी करते हुए वे इसका इस्तेमाल कर सकते हैं और हाथ से लिए जाने वाले कामों में भी इसकी कोई भूमिका नहीं है।"