अध्ययनों से स्पष्ट होता है कि अगर आहार में ही सुधार कर लिया जाए तो कई प्रकार की बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है। आहार में गड़बड़ी को शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सेहत के लिए गंभीर दुष्प्रभावों वाला माना जाता है। प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने से लेकर पाचन को ठीक रखने, त्वचा और मेटाबॉलिज्म को सुधारने के लिए नियमित रूप से कीवी का सेवन करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।
Kiwi Health Benefits: रोजाना दो कीवी का सेवन हर साल बचा सकता है आपके हजारों रुपये, सेहत के लिए ये बहुत लाभकारी
प्रतिरक्षा को मजबूत करती हैं कीवी
कीवी में विटामिन-सी की अधिकता होती है, 100-ग्राम कीवी से दैनिक विटामिन सी का 80% तक प्राप्त किया जा सकता है। विटामिन-सी शरीर में एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है और कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाता है। प्रतिरक्षा प्रणाली के मजबूत होने से कई प्रकार के संक्रामक रोगों का खतरा कम होता है, इसलिए रोजाना कीवी का सेवन आपके लिए बहुत लाभकारी है।
पोटेशियम का अच्छा स्रोत है कावी
हृदय, किडनी, मांसपेशियों और तंत्रिकाओं को ठीक से काम करने के लिए पोटेशियम की आवश्यकता होती है। एक कीवी में 215 मिलीग्राम तक पोटेशियम होता है, ऐसे में कीवी का सेवन करना आपके रक्तचाप और तंत्रिकाओं के लिए लाभकारी है। आहार के माध्यम से पोटेशियम की पूर्ति करना उच्च रक्तचाप और स्ट्रोक जैसी हृदय संबंधी समस्याओं को कम करने, किडनी की पथरी और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से बचाने में आपके लिए फायदेमंद है।
ब्लड क्लॉटिंग होती है कम
नसों में रक्त का थक्का जमना हृदय और मस्तिष्क में रक्त के संचार को बाधित कर सकता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा हो सकता है। कीवी, रक्त में वसा के स्तर को कम करके रक्त के थक्के को जमने से बचा सकती है। प्रतिदिन दो से तीन कीवी फल खाने से रक्त को पतला करने और समय के साथ हृदय स्वास्थ्य को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। स्ट्रोक के खतरे को कम करने में भी इसके लाभ हैं।
पाचन स्वास्थ्य में मिलता है लाभ
कीवी में अघुलनशील और घुलनशील दोनों प्रकार के फाइबर होते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि कीवी में लगभग एक-तिहाई घुलनशील और दो-तिहाई अघुलनशील फाइबर होता है। फाइबर, रक्त शर्करा के स्तर को ठीक रखने के साथ, हृदय और पाचन स्वास्थ्य को लाभ पहुंचा सकता है। फाइबर का सेवन करना आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।