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अध्ययन: कोरोना के हल्के लक्षण वाले संक्रमितों में भी इस अंग की खराबी का खतरा, नहीं दिखते हैं लक्षण

Fri, 10 Sep 2021 02:07 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 10 Sep 2021 02:07 PM IST
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kidney damage seen in people with mild Covid infection
कोरोना संक्रमितों में किडनी की बीमारी (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

कोरोना संक्रमण शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। संक्रमण से ठीक हो चुके कई लोगों में लॉन्ग कोविड के रूप में ऐसे कई गंभीर मामले देखने को मिल रहे हैं। इन्हीं खतरों को जानने के लिए शोध कर रही अध्ययनकर्ताओं की एक टीम ने बड़ा खुलासा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना संक्रमण के कारण किडनी डैमेज का खतरा सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। किडनी की खराबी की समस्या उन लोगों में भी देखी जा रही है, जिनमें कोरोना के माइल्ड यानी कि हल्के लक्षण थे। अध्ययन में वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना से ठीक हो चुके लोगों को अन्य लोगों की तुलना में किडनी ट्रांसप्लांटेशन या डायलिसिस की तीन गुना अधिक आवश्यकता हो सकती है। संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में किडनी की बीमारी से संबंधित लक्षणों पर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है।


वेटरन्स अफेयर्स सेंट लुइस हेल्थ केयर सिस्टम और वाशिंगटन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि कोरोना से ठीक हो चुके सभी लोगों को किडनी की बीमारी के मामले में अलर्ट रहना चाहिए। वैज्ञानिकों का कहना है कि कई मामलों में किडनी डैमेज की स्थिति में कोई भी लक्षण नजर नहीं आते हैं, ऐसे में यह बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। नेशनल किडनी फाउंडेशन का अनुमान है कि करीब 90 फीसदी लोगों को पता ही नहीं चल पाता है कि उन्हें किडनी से संबंधित कोई समस्या है। आइए आगे की स्लाइडों में इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।

kidney damage seen in people with mild Covid infection
संक्रमितों को हो रही हैं किडनी की बीमारियां (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

कोरोना संक्रमितों में किडनी रोग का खतरा
अमेरिकन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में किडनी की बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है, भले ही उनमें संक्रमण के दौरान हल्के लक्षण रहे हों या फिर उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत न पड़ी हो। वहीं जिन रोगियों में कोरोना के गंभीर लक्षण रह चुके हों उनमें किडनी की खराबी का खतरा अधिक हो सकता है। शोधकर्ताओं ने अमेरिका में 89, 216 लोगों में किडनी से संबंधित समस्याओं के जोखिमों का अध्ययन किया। अध्ययन में शामिल प्रतिभागी 30 दिन पहले कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके थे।

kidney damage seen in people with mild Covid infection
कोरोना संक्रमितों में किडनी का गंभीर बीमारियों का खतरा - फोटो : Pixabay

बढ़ सकता है गंभीर किडनी रोगों का खतरा
अध्ययनकर्ताओं की टीम ने बताया कि कोविड से ठीक हो चुके लोगों में अन्य लोगों की तुलना में 'एंड स्टेज किडनी डिजीज' का जोखिम तीन गुना अधिक पाया गया। अमूमन इस स्थिति में रोगियों को किडनी ट्रांसप्लांटेशन या डायलिसिस की आवश्यकता हो सकती है। अध्ययन के प्रमुख लेखक प्रोफेसर ज़ियाद अल-एली कहते हैं, इस अध्ययन के आधार पर कहा जा सकता है कि पोस्ट कोविड सिंड्रोम की समस्याओं के उपचार के दौरान डॉक्टरों को किडनी की बीमारियों की भी जांच करनी चाहिए, जिससे स्थिति का समय रहते पता चल सके।

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kidney damage seen in people with mild Covid infection
गंभीर स्थिति में पहुंच सकती है किडनी की समस्या (सांकेतिक) - फोटो : iStock

किडनी की बीमारियों को पहचानना आवश्यक
अमर उजाला से बातचीत के दौरान मुंबई में वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ मनीष बत्रा कहते हैं, किडनी की बीमारियों के लक्षण काफी छिपे हुए होते हैं। रोगियों को पता भी नहीं चलता है और उनकी किडनी 70-80 फीसदी तक खराब हो जाती है, इसका मुख्य कारण ज्यादातर मामलों में लक्षणों का नजर न आना होता है। कोविड-19 पल्मोनरी और एक्स्ट्रापल्मोनरी ऑर्गन सिस्टम से जुड़े पोस्ट-एक्यूट सीक्वेल के जोखिम से जुड़ा होता है, यही कारण है ज्यादातर लोगों में संक्रमण के बाद भी कई सारी समस्याएं बनी रहती हैं।

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kidney damage seen in people with mild Covid infection
किडनी की बीमारी के लक्षणों को पहचानना जरूरी (सांकेतिक) - फोटो : Pixabay

किडनी की बीमारियों के सामान्य लक्षण

डॉक्टर मनीष कहते हैं, पेशाब में होने वाली किसी भी तरह की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, यह किडनी की बीमारियों का संकेत हो सकते हैं। बार-बार पेशाब महसूस होना, पेशाब से असामान्य तरीके की बदबू आना, पेशाब से झाग बनना, खून आना आदि को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा जब किडनी, रक्त में खनिजों और पोषक तत्वों का उचित संतुलन नहीं बना पाती है तो ऐसी स्थिति में आपको त्वचा के सूखेपन या त्वचा में खुजली की समस्या हो सकती है। त्वचा में होने वाले किसी भी असामान्य परिवर्तन को भी ध्यान में रखने और इस बारे में डॉक्टर से सलाह लेना बेहद आवश्यक होता है।


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स्रोत और संदर्भ: 
Kidney Outcomes in Long COVID

अस्वीकरण नोट: यह लेख अमेरिकन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के निष्कर्ष के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।
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