कोरोना संक्रमण शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। संक्रमण से ठीक हो चुके कई लोगों में लॉन्ग कोविड के रूप में ऐसे कई गंभीर मामले देखने को मिल रहे हैं। इन्हीं खतरों को जानने के लिए शोध कर रही अध्ययनकर्ताओं की एक टीम ने बड़ा खुलासा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना संक्रमण के कारण किडनी डैमेज का खतरा सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। किडनी की खराबी की समस्या उन लोगों में भी देखी जा रही है, जिनमें कोरोना के माइल्ड यानी कि हल्के लक्षण थे। अध्ययन में वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना से ठीक हो चुके लोगों को अन्य लोगों की तुलना में किडनी ट्रांसप्लांटेशन या डायलिसिस की तीन गुना अधिक आवश्यकता हो सकती है। संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में किडनी की बीमारी से संबंधित लक्षणों पर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है।
अध्ययन: कोरोना के हल्के लक्षण वाले संक्रमितों में भी इस अंग की खराबी का खतरा, नहीं दिखते हैं लक्षण
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कोरोना संक्रमितों में किडनी रोग का खतरा
अमेरिकन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में किडनी की बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है, भले ही उनमें संक्रमण के दौरान हल्के लक्षण रहे हों या फिर उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत न पड़ी हो। वहीं जिन रोगियों में कोरोना के गंभीर लक्षण रह चुके हों उनमें किडनी की खराबी का खतरा अधिक हो सकता है। शोधकर्ताओं ने अमेरिका में 89, 216 लोगों में किडनी से संबंधित समस्याओं के जोखिमों का अध्ययन किया। अध्ययन में शामिल प्रतिभागी 30 दिन पहले कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके थे।
बढ़ सकता है गंभीर किडनी रोगों का खतरा
अध्ययनकर्ताओं की टीम ने बताया कि कोविड से ठीक हो चुके लोगों में अन्य लोगों की तुलना में 'एंड स्टेज किडनी डिजीज' का जोखिम तीन गुना अधिक पाया गया। अमूमन इस स्थिति में रोगियों को किडनी ट्रांसप्लांटेशन या डायलिसिस की आवश्यकता हो सकती है। अध्ययन के प्रमुख लेखक प्रोफेसर ज़ियाद अल-एली कहते हैं, इस अध्ययन के आधार पर कहा जा सकता है कि पोस्ट कोविड सिंड्रोम की समस्याओं के उपचार के दौरान डॉक्टरों को किडनी की बीमारियों की भी जांच करनी चाहिए, जिससे स्थिति का समय रहते पता चल सके।
किडनी की बीमारियों को पहचानना आवश्यक
अमर उजाला से बातचीत के दौरान मुंबई में वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ मनीष बत्रा कहते हैं, किडनी की बीमारियों के लक्षण काफी छिपे हुए होते हैं। रोगियों को पता भी नहीं चलता है और उनकी किडनी 70-80 फीसदी तक खराब हो जाती है, इसका मुख्य कारण ज्यादातर मामलों में लक्षणों का नजर न आना होता है। कोविड-19 पल्मोनरी और एक्स्ट्रापल्मोनरी ऑर्गन सिस्टम से जुड़े पोस्ट-एक्यूट सीक्वेल के जोखिम से जुड़ा होता है, यही कारण है ज्यादातर लोगों में संक्रमण के बाद भी कई सारी समस्याएं बनी रहती हैं।
किडनी की बीमारियों के सामान्य लक्षण
डॉक्टर मनीष कहते हैं, पेशाब में होने वाली किसी भी तरह की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, यह किडनी की बीमारियों का संकेत हो सकते हैं। बार-बार पेशाब महसूस होना, पेशाब से असामान्य तरीके की बदबू आना, पेशाब से झाग बनना, खून आना आदि को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा जब किडनी, रक्त में खनिजों और पोषक तत्वों का उचित संतुलन नहीं बना पाती है तो ऐसी स्थिति में आपको त्वचा के सूखेपन या त्वचा में खुजली की समस्या हो सकती है। त्वचा में होने वाले किसी भी असामान्य परिवर्तन को भी ध्यान में रखने और इस बारे में डॉक्टर से सलाह लेना बेहद आवश्यक होता है।--------------
स्रोत और संदर्भ:
Kidney Outcomes in Long COVID
अस्वीकरण नोट: यह लेख अमेरिकन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के निष्कर्ष के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।