देशभर में विवाहित महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत काफी महत्वपूर्ण होता है। भोजन और पानी के बिना 12-15 घंटे उपवास को काफी कठिन माना जाता है। वहीं यदि आप किसी बीमारी, विशेषकर डायबिटीज की शिकार हैं तो यह और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। वैसे तो डॉक्टर्स की सलाह है कि जिन लोगों डायबिटीज जैसे बीमारी हो उन्हें ज्यादा देर तक खाली पेट नहीं रहना चाहिए, इससे कई प्रकार की स्वास्थ्य जटिलताओं का खतरा हो सकता है। यदि आप फिर भी व्रत कर रही हैं तो व्रत के दौरान और इसे पूर्ण करते समय विशेष सावधानियां बरतने की जरूरत है। आपकी जरा सी भी लापरवाही सेहत के लिए मुश्किलों को बढ़ाने वाली हो सकती है।
Karwa Chauth Fast: व्रत खोलते ही तुरंत न खाएं-पिएं ये चीजें, डायबिटिक हैं तो इन बातों का रखें विशेष ध्यान
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डायबिटीज में करवा चौथ का व्रत
यदि आप डायबिटीज की शिकार हैं और व्रत कर रही हैं तो सबसे पहले ध्यान रखें, अन्य महिलाओं की तरह आपको निर्जल व्रत नहीं करना चाहिए। डायबिटीज के रोगियों को ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल में रखने के लिए थोड़ी-थोड़ी देर पर कुछ खाते और पानी पीते रहने की आवश्यकता होती है। इसके अलावा व्रत पूर्ण करते समय भी आहार को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। एक साथ अधिक मात्रा में भोजन करने से ब्लड शुगर में तेजी से बढ़ोतरी होने का जोखिम हो सकता है।
व्रत खोलते समय आहार से संबंधी सावधानियां
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मधुमेह की स्थिति में करवाचौथ के व्रत में भी नियमित अंतराल पर कुछ खाना आवश्यक होता है। शाम के समय व्रत पूरा करते समय कुछ भी खाने से पहले ग्लूकोमीटर से शुगर का लेवल जांच लें, इसके बाद ही आहार का सेवन करें। यदि शुगर लेवल कम है तो हल्के मात्रा में कुछ मीठा खा सकती हैं जिससे इसे सामान्य किया जा सके। वहीं यदि शुगर बढ़ा है तो किसी भी प्रकार के कार्बोहाइड्रेट या हाई कैलोरी वाली किसी भी चीज के सेवन से बचना चाहिए।
नारियल पानी के साथ व्रत खोलना अच्छा विकल्प हो सकता है, इससे शरीर के लिए आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स की आसानी से पूर्ति की जा सकती है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
करवा चौथ का व्रत कुछ हाइड्रेटिंग पेय जैसे नारियल पानी, नींबू पानी आदि से खोलें। व्रत पूरा करने के बाद आहार में हाई कैलोरी और फैट वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करें, इससे ब्लड शुगर बढ़ने का खतरा हो सकता है। मिठाई और तले हुए खाद्य पदार्थ बिल्कुल भी न खाएं। व्रत खोलने के बाद तुरंत चाय-कॉफी पीने से बचें इससे पाचन संबंधित दिक्कतों जैसे कब्ज और गैस की समस्या हो सकती है। रात के भोजन को हल्का ही रखें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
मधुमेह रोगियों को उपवास के दौरान और बाद में रक्त शर्करा के स्तर की निगरानी करने की सलाह दी जाती है। हाइपोग्लाइकेमिया (निम्न रक्त शर्करा), निर्जलीकरण, उल्टी, सिरदर्द जैसी किसी भी लक्षण में तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें। डायबिटीज की दवाइयों और इंसुलिन में किसी प्रकार की लापरवाही न करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।