लाइफस्टाइल और खानपान में गड़बड़ी का संपूर्ण स्वास्थ्य पर असर देखा जा रहा है। ऐसे में थायराइड और हार्मोन इंबैलेस जैसी समस्याएं काफी आम होती जा रही हैं। तेजी से वजन घटने या बढ़ने लगे, मूड में उतार-चढ़ाव और दिल की धड़कनों का असामान्य होना, ये सब संकेत हैं कि शरीर के अंदर कुछ गड़बड़ चल रहा है। अक्सर लोग इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन असल में यह थायराइड और हार्मोन इंबैलेंस की ओर इशारा हो सकता है।
Health Tips: थायराइड से परेशान हैं ये फिर हो गया है हार्मोन इंबैलेस, ये औषधि है तो फिर टेंशन की क्या बात
कंचनार गुग्गुलु आयुर्वेद की सबसे महत्वपूर्ण औषधियों में से एक है, जिसके इस्तेमाल से थायराइड की समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। आयुर्वेद में कंचनार गुग्गुलु को मुख्य औषधि का दर्जा दिया गया है।
थायरॉइड और हार्मोन इंबैलेस की समस्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, थायराइड और हार्मोन इंबैलेस जैसी समस्याओं को कंट्रोल करने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार सबसे जरूरी है।
- संतुलित आहार जिसमें आयोडीन, सेलेनियम और जिंक जैसे पोषक तत्व हों, ये थायराइड की समस्या से बचाने में मदद करते हैं।
- नियमित व्यायाम और योग करने से हार्मोन संतुलन में मदद मिलती है।
- तनाव को कम करना और पर्याप्त नींद लेना भी हार्मोन इंबैलेस को ठीक रखने के लिए जरूरी मानी जाती हैं।
कुछ प्रकार की औषधियों से भी इन समस्याओं में आराम पाया जा सकता है।
कंचनार गुग्गुलु के कई सारे लाभ
सदियों से हमारे देश में जड़ी-बूटियों से रोगों का निदान किया जा रहा है। कुछ जड़ी-बूटियां ऐसी हैं, जो संजीवनी की तरह काम करती हैं और शरीर को रोग मुक्त करने में मदद करती हैं।
- कंचनार गुग्गुलु भी आयुर्वेद की सबसे महत्वपूर्ण औषधियों में से एक है, जिसके इस्तेमाल से थायराइड की समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
- आयुर्वेद में कंचनार गुग्गुलु को मुख्य औषधि का दर्जा दिया गया है।
- यह शरीर में गांठ, पीसीओएस, गर्भाशय फाइब्रॉएड और ग्रंथियों की सूजन के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है।
- यह शरीर में कफ और मेद धातु को भी संतुलित करने में मदद करती है।
कंचनार गुग्गुलु के बारे में ये बातें जानिए
आयुर्वेद मानता है कि अगर शरीर में टॉक्सिन जमा हो रहे हैं, तो शरीर में गांठ बनने की आशंका अधिक होती है और हॉर्मोन का असंतुलन भी होता है, जिससे गर्भाशय से जुड़े रोग और थायराइड की परेशानी शरीर में बनना शुरू हो जाती है।
- ऐसे में कंचनार गुग्गुलु का सेवन किया जाए, तो शरीर से टॉक्सिन आसानी से बाहर निकल जाते हैं और कफ और वात दोष भी संतुलित रहते हैं।
- कंचनार में एंटी-इंफ्लेमेटरी और शरीर को डिटॉक्स करने वाले गुण होते हैं, और गुग्गुलु मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त बनाए रखने में मदद करता है।
- इससे शरीर का पूरा पाचन सिस्टम साफ होना शुरू कर देता है।
- हालांकि किसी भी औषधि का दवा के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए।
इन बातों का भी रखें ध्यान
कंचनार गुग्गुलु के साथ जीवनशैली में बदलाव करना भी उतना ही जरूरी है। आहार में जंक फूड और मीठे का सेवन कम करें।
- रिफाइंड चीनी से बने उत्पाद पीसीओडी और थायराइड दोनों को बुरी तरीके से प्रभावित करते हैं।
- इसके साथ ही शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाएं।
- रोजाना हल्का फुल्का वॉक करें और रात के समय हल्दी वाला दूध लेना न भलें। इससे थायराइड ग्रांथि से जुड़े हॉर्मोन संतुलित रहते हैं।
- सुबह की शुरुआत धनिए से करें, यह थायराइड के हार्मोन को संतुलित करने में मददगार हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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