मेंटल हेल्थ की समस्याएं दुनियाभर में तेजी से बढ़ती जा रही हैं। विशेषज्ञ बताते हैं, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य एक दूसरे के पूरक होते हैं, इनमें से किसी एक में भी होने वाली समस्या का असर संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य और इसके कारण होने वाली दिक्कतों का एक हालिया मामला काफी चौंकाने वाला है। ब्रिटिश-घानाई कलाकार जोसेफ अवुआ-डार्को (28 वर्ष) ने मानसिक स्वास्थ्य समस्या से परेशान होकर इच्छामृत्यु की मांग की है।
Mental Health: क्या है बायपोलर डिसऑर्डर जिससे परेशान व्यक्ति ने कर डाली इच्छामृत्यु का मांग, बयां किया दर्द
आखिर बायपोलर डिसऑर्डर होता क्या है? जिसने किसी नवयुवक को इतना परेशान कर दिया है कि अब उसे जीने के बजाय जान देना अधिक आसान लग रहा है? सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में जोसेफ ने बताया कि बायपोलर के साथ जीना काफी कष्टकारी है।
सोशल मीडिया पर बयां किया दर्द
जोसेफ ने एक इंस्टाग्राम वीडियो में कहा, "मैं बायपोलर से पीड़ित हूं और कानूनी रूप से अपना जीवन समाप्त करने के लिए नीदरलैंड आ गया हूं। उन्होंने कहा कि वह हर दिन "गंभीर दर्द" में जी रहे हैं, जिसके कारण उन्होंने चिकित्सकीय सहायता से मृत्यु का विकल्प चुना। नीदरलैंड में इच्छामृत्यु विशेषज्ञ केंद्र के साथ आधिकारिक अनुरोध दायर करने से पहले उन्होंने इस निर्णय पर पांच साल तक विचार किया।
उन्होंने कहा, "मैं यह नहीं कह रहा हूं कि जीवन जीने लायक नहीं है। मैं यह कह रहा हूं कि मेरा मानसिक बोझ पूरी तरह से असहनीय हो गया है।
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बायपोलर डिसऑर्डर क्या है?
अब सवाल उठता है कि आखिर बायपोलर डिसऑर्डर होता क्या है? जिसने किसी नवयुवक को इतना परेशान कर दिया है कि अब उसे जीने के बजाय जान देना अधिक आसान लग रहा है?
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के अनुसार, बायपोलर डिसऑर्डर एक 'मैनिक डिप्रेसिव इलनेस' है जिसमें रोगी को उसकी मनोदशा और शरीर में ऊर्जा के स्तर में अत्यधिक परिवर्तन महसूस होता रहता है। इसमें बहुत तेजी से भावनात्मक उतार-चढ़ाव होता रहता है जिन्हें उन्माद या हाइपोमेनिया भी कहा जाता है।
इसमें कभी बहुत अधिक उदासी या निराश महसूस हो सकती है, रोगी दैनिक गतिविधियों में रुचि या आनंद खो सकता है। जब मूड उन्माद या हाइपोमेनिया में बदल जाता है, तो आप बहुत उत्साहित और ऊर्जा से भरे या असामान्य रूप से चिड़चिड़ा महसूस कर सकते हैं। ये मूड स्विंग नींद, ऊर्जा के स्तर, दैनिक गतिविधि, निर्णय और व्यवहार के साथ और स्पष्ट रूप से सोचने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। बाइपोलर मानसिक स्वास्थ्य की एक गंभीर स्थिति है।
बाइपोलर डिसऑर्डर में क्या दिक्कतें होती हैं?
बाइपोलर डिसऑर्डर कई प्रकार की दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है। ज्यादातर लोग इसके कारण सामान्य से ज्यादा सक्रिय, ऊर्जावान या उत्तेजित महसूस कर सकते हैं।
- रोगी असामान्य रूप से बातूनी हो सकता हैं और तेजी से बात करने लगता है।
- रोगी कभी कभार बहुत दुखी और आनंद की गहरी कमी महसूस कर सकता है।
- मनोविकृत्ति के कारण सामान्य रूप से काम कर पाना और चीजों को बेहतर तरीके से डील करना कठिन हो सकता है।
बाइपोलर डिसऑर्डर हो जाए तो क्या करें?
बाइपोलर डिसऑर्डर के शिकार लोगों के मस्तिष्क में कुछ प्रकार के परिवर्तन देखे जाते हैं। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को ये दिक्कत रही हो उनकी अगली पीढ़ियों में इस समस्या के होने का खतरा अधिक हो सकता है।
अध्ययनों से पता चलता है कि इस विकार से बचने के लिए कोई पुख्ता तरीका ज्ञात नहीं है। हालांकि जिन लोगों को ये दिक्कत हो जाती है उन्हें मेंटल हेल्थ असेसमेंट के साथ लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। अगर आपको या किसी जानकार व्यक्ति में इसके लक्षण दिख रहे हैं तो उन्हें डॉक्टर के पास जरूर ले जाएं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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