कोरोनावायरस में लगातार जारी म्यूटेशन और इससे उत्पन्न होने वाले नए वैरिएंट्स के कारण वैश्विक स्तर पर संक्रमण के मामले अब भी कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। हाल के महीनों में देखे गए JN.1 वैरिएंट की संक्रामकता दर को लेकर अध्ययनों में विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए इससे लोगों को विशेष बचाव करते रहने की सलाह दी है। दिसंबर 2023 और जनवरी के महीने में इसके कारण कई देशों में दैनिक मामलों में काफी इजाफा दर्ज किया गया था। भारत में भी संक्रमण के मामले काफी तेजी से बढ़े थे।
Covid-19: अमेरिका में संक्रमण के 86% मामलों के लिए JN.1 वैरिएंट जिम्मेदार, अध्ययन में वैज्ञानिकों का बड़ा दावा
यूएस में ज्यादातर मामले JN.1 वैरिएंट के
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक JN.1 देश और विश्व स्तर पर SARS-CoV-2 का सबसे व्यापक रूप से प्रसारित होने वाला वैरिएंट बना हुआ है। यूएस में कोरोना के इस समय 85.7 फीसदी मामलों के लिए इसी वैरिएंट को प्रमुख कारण माना जा रहा है। यहां अस्पतालों में भी लोगों की भीड़ भी बढ़ी है। अधिकारियों ने कहा ज्यादातर लोगों में हल्के लक्षण ही देखे जा रहे हैं, पर इस वैरिएंट की संक्रामकता के कारण मामले बढ़े हैं। कोरोना और उसके म्यूटेटेड अधिकतर वैरिएंट्स के कारण संक्रमण की रफ्तार में उछाल देखा जाता रहा है।
भारत में कोरोना की स्थिति
इंडियन सार्स-सीओवी-2 कंसोर्टियम ऑन जीनोमिक्स (INSACOG) की रिपोर्ट के मुताबिक देश में JN.1 वैरिएंट के कुल 1,513 मामले हैं। कई राज्यों में JN.1 वैरिएंट के कारण संक्रमण के मामलों में उछाल दर्ज किया गया है हालांकि दैनिक मामलों में अब काफी कमी आ गई है। 31 दिसंबर को एक दिन में 840 से अधिक मामले सामने आए थे, हालांकि पिछले एक सप्ताह से दैनिक मामले घटकर प्रतिदिन 200-300 के बीच रह गए हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सोमवार के आंकड़ों के मुताबिक देश में एक दिन में 203 कोविड-19 के मामलों देखे गए, जबकि सक्रिय केसलोड 2,034 दर्ज किया गया। आंकड़ों के मुताबिक, 24 घंटे में दो मौतें भी हुई हैं, हालांकि देश में कोरोना की स्थिति अब काफी नियंत्रित है।
संक्रमण का प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर
इस बीच कोरोना और इसके कारण होने वाली समस्याओं को लेकर किए जा रहे अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया, हर बार जब आप कोविड-19 का सामना करते हैं तो इससे हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली अधिक स्मार्ट होती जाती है। टीकाकरण और संक्रमित होने के बाद, प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस के खिलाफ व्यापक सुरक्षा उत्पन्न करती है, जिसमें नए वैरिएंट भी शामिल हैं। ये आपको अगली बार संक्रमण का शिकार होने से बचाने में मददगार हो सकती है। लगभग सभी वायरस के साथ इसी तरह होता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
साइंस इम्यूनोलॉजी जर्नल में 19 जनवरी को प्रकाशित पेपर में, दक्षिण कोरिया के शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में विभिन्न ओमिक्रॉन वैरिएंट्स से संक्रमण की हिस्ट्री और वैक्सीनेशन करा चुके लोगों की प्रतिरक्षा कोशिकाओं की तुलना की। जिन लोगों ने मूल फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन ली थी और फिर वे किसी भी ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित हो गए, उनमें मेमोरी टी सेल्स कोशिकाओं का स्तर अच्छा देखा गया। जो न केवल संक्रमण पैदा करने वाले वैरिएंट से बचाव करती है, बल्कि अगली बार संक्रमण का स्थिति में इसकी आसानी से पहचान करके प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को तेज करने में भी मदद करती है।
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