दुनियाभर में कोरोना संक्रमण को अब लगभग डेढ़ साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। वायरस के म्यूटेशन के साथ आई दूसरी लहर का कई देशों पर गंभीर असर देखने को मिला। भारत के संदर्भ में बात करें कोरोना की दूसरी लहर अब लगभग धीमी पड़ चुकी है। कई रिपोर्टस में दावा किया जाता रहा है कि जून-जुलाई के महीने में जब देश में तापमान काफी अधिक हो जाता है तब इस वायरस का असर कम हो सकता है। इस संबंध में लोगों के अपने-अपने मत हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर में एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के हवाले से वायरस को लेकर एक बड़ा दावा किया जा रहा है।
{"_id":"60b8da5cff573d67895cfeb0","slug":"is-corona-seasional-virus-pib-fact-check","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"फैक्ट चेक: कोरोना के सीजनल वायरस होने का दावा, जानिए क्या वास्तव में ऐसा है?","category":{"title":"Health & Fitness","title_hn":"हेल्थ एंड फिटनेस","slug":"fitness"}}
फैक्ट चेक: कोरोना के सीजनल वायरस होने का दावा, जानिए क्या वास्तव में ऐसा है?
Thu, 03 Jun 2021 07:08 PM IST
Abhilash Srivastava
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Thu, 03 Jun 2021 07:08 PM IST
विज्ञापन
कोरोना वायरस का प्रसार (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : PIB
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबर (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : iStock
क्या है वायरल पोस्ट?
इन दिनों सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफार्म पर वायरल हो रहे एक पोस्ट में डब्ल्यूएचओ द्वारा कथित रूप से कोरोना के सीजनल वायरस होने का दावा किया जा रहा है, जिसमें शारीरिक दूरी और आइसोलेशन की जरूरत नहीं है। पोस्ट में लिखा है- डब्ल्यूएचओ ने अपनी गलती मानी और यूटर्न लेते हुए दावा किया है कि कोरोना एक सीजनल वायरस है। इसमें मौसम के बदलाव के कारण होने वाले सिरदर्द, खांसी, जुकाम और गले में खराश की दिक्कत होती है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। कोरोना के रोगी को न तो अलग रहने की जरूरत है, न ही सोशल डिस्टेंसिंग की।
इन दिनों सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफार्म पर वायरल हो रहे एक पोस्ट में डब्ल्यूएचओ द्वारा कथित रूप से कोरोना के सीजनल वायरस होने का दावा किया जा रहा है, जिसमें शारीरिक दूरी और आइसोलेशन की जरूरत नहीं है। पोस्ट में लिखा है- डब्ल्यूएचओ ने अपनी गलती मानी और यूटर्न लेते हुए दावा किया है कि कोरोना एक सीजनल वायरस है। इसमें मौसम के बदलाव के कारण होने वाले सिरदर्द, खांसी, जुकाम और गले में खराश की दिक्कत होती है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। कोरोना के रोगी को न तो अलग रहने की जरूरत है, न ही सोशल डिस्टेंसिंग की।
पीआईबी फैक्ट चेक
- फोटो : social media
क्या वास्तव में डब्ल्यूएचओ ने ऐसा दावा किया है?
इस दावे की पड़ताल के दौरान हमारी नजर भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के ट्वीट पर गई। पीआईबी ने ट्वीट के माध्यम से इस वायरल खबर का खंडन करते हुए लोगों को जागरूक किया है। ट्वीट में बताया गया है कि इस तरह का दावा पूरी तरह से झूठा है, कृप्या इनपर भरोसा न करें। डब्ल्यूएचओ ने ऐसा कोई भी बयान नहीं दिया है। कोविड एक संक्रामक बीमारी है जिसमें सभी लोगों को सामाजिक दूरी का ध्यान रखना बेहद आवश्यक होता है।
इस दावे की पड़ताल के दौरान हमारी नजर भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के ट्वीट पर गई। पीआईबी ने ट्वीट के माध्यम से इस वायरल खबर का खंडन करते हुए लोगों को जागरूक किया है। ट्वीट में बताया गया है कि इस तरह का दावा पूरी तरह से झूठा है, कृप्या इनपर भरोसा न करें। डब्ल्यूएचओ ने ऐसा कोई भी बयान नहीं दिया है। कोविड एक संक्रामक बीमारी है जिसमें सभी लोगों को सामाजिक दूरी का ध्यान रखना बेहद आवश्यक होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कोविड से बचाव के सभी उपायों को प्रयोग मे लाएं
- फोटो : pixabay
कोविड-19 से बचाव के लिए और क्या करना चाहिए?
कोविड-19 से बचाव के लिए सरकार बार-बार सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखने और मास्क पहनने पर जोर दे रही है। कोरोना से बचने के लिए इस उपायों को प्रयोग में लाना सबसे आवश्यक माना जाता है। घर से बाहर जाते समय मास्क जरूर पहनें, लोगों से उचित दूरी बनाकर रखें साथ ही समय-समय पर हाथों को धोते या सेनेटाइज करते रहें। इन सभी उपायों को प्रयोग में लाकर वायरस के खिलाफ एक सुरक्षाकवच तैयार करने में मदद मिल सकती है।
----------------------
नोट: यह लेख केंद्र सरकार के के प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा किए गए फैक्ट चेक ट्वीट के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है।
कोविड-19 से बचाव के लिए सरकार बार-बार सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखने और मास्क पहनने पर जोर दे रही है। कोरोना से बचने के लिए इस उपायों को प्रयोग में लाना सबसे आवश्यक माना जाता है। घर से बाहर जाते समय मास्क जरूर पहनें, लोगों से उचित दूरी बनाकर रखें साथ ही समय-समय पर हाथों को धोते या सेनेटाइज करते रहें। इन सभी उपायों को प्रयोग में लाकर वायरस के खिलाफ एक सुरक्षाकवच तैयार करने में मदद मिल सकती है।
----------------------
नोट: यह लेख केंद्र सरकार के के प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा किए गए फैक्ट चेक ट्वीट के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है।