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Diarrhea: कब गंभीर हो जाता है डायरिया? दस्त होने पर ये सावधानियां कम कर सकती हैं आपकी समस्या

Mon, 05 Jan 2026 08:55 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Mon, 05 Jan 2026 08:55 PM IST
सार

Indore Diarrhea Outbreak: इंदौर में इन दिनों डायरिया के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ता जा रहा है। ऐसे में बहुत से लोगों के मन में डायरिया को लेकर कई सवाल हैं, इसी कड़ी कई लोग जानना चाहते हैं कि डायरिया कब जानलेवा होता है? आइए इस लेख में इन्हीं प्रश्नों का जवाब जानते हैं।

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indore water contamination diarrhoea outbreak These precautions can help to reduce diarrhea
डायरिया - फोटो : Amar Ujala

Severe Symptoms And Identification Of Diarrhea: इंदौर में दूषित पानी के सेवन से डायरिया के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वर्तमान में 100 से अधिक मरीज अस्पतालों में उपचाराधीन हैं, जिनमें से कई की स्थिति गंभीर बनी हुई है। डायरिया जिसे सामान्य भाषा में 'दस्त' कहा जाता है, अक्सर लोग इसे मामूली मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन दूषित जल से होने वाला यह संक्रमण शरीर को अंदर से खोखला कर सकता है। 



जब शरीर से पानी और आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स (जैसे सोडियम और पोटेशियम) तेजी से बाहर निकलने लगते हैं, तो डिहाइड्रेशन की स्थिति पैदा होती है। अगर समय रहते उपचार न मिले, तो यह स्थिति गुर्दे फेल होने या 'हाइपोवोलेमिक शॉक' का कारण बन सकती है, जहां हृदय शरीर को पर्याप्त रक्त पंप करने में असमर्थ हो जाता है। 

विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों में यह संक्रमण बहुत तेजी से गंभीर रूप ले लेता है। ऐसे में यह समझना अनिवार्य है कि डायरिया कब एक मेडिकल इमरजेंसी बन जाता है और घर पर किन सावधानियों को बरतकर स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है।

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डायरिया की समस्या - फोटो : Freepik.com

कब समझें कि स्थिति गंभीर है?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक डायरिया तब गंभीर माना जाता है जब मरीज को दिन में 8 से अधिक बार पतले दस्त हों या मल के साथ खून आने लगे। अगर मरीज को तेज बुखार, लगातार उल्टी, पेट में असहनीय मरोड़, या पेशाब का आना बंद हो जाए, तो यह गंभीर डिहाइड्रेशन के संकेत हैं। ऐसे लक्षणों में घर पर उपचार के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचकर 'IV फ्लुइड्स' (ड्रिप) चढ़वाना बहुत जरूरी होता है।


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पेट की समस्या - फोटो : Adobe Stock
ORS और हाइड्रेशन का सही तरीका
दस्त शुरू होते ही शरीर में पानी की कमी को रोकना प्राथमिकता होनी चाहिए। मरीज को हर दस्त के बाद ORS (ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट) का घोल देना चाहिए। ओआरएस न केवल पानी, बल्कि शरीर के जरूरी नमक के संतुलन को भी बनाए रखता है।

अगर ओआरएस उपलब्ध न हो, तो घर पर चीनी-नमक का घोल या नारियल पानी का सेवन कराएं। सादा पानी पर्याप्त नहीं होता क्योंकि वह शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपाई नहीं कर पाता।

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केला - फोटो : Freepik.com

खान-पान में बरतें ये सावधानियां
इंदौर की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, सबसे पहली सावधानी है कि पानी उबालकर पीएं। दस्त के दौरान भारी, मसालेदार, या डेयरी उत्पादों (दूध) से परहेज करें क्योंकि ये आंतों की सूजन को बढ़ा सकते हैं। इसके बजाय केला, चावल, सेब की चटनी और टोस्ट का सेवन करें। ये खाद्य पदार्थ मल को बांधने में मदद करते हैं और पचने में बहुत हल्के होते हैं।

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पाचन - फोटो : adobe stock images
स्वच्छता ही है असली बचाव
डायरिया के प्रसार को रोकने के लिए पर्सनल हाईजिन बहुत जरूरी है। खाना बनाने या खाने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से जरूर हाथ धोएं। इंदौर के नागरिक फिलहाल खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों और बर्फ के सेवन से बचें। अगर आपके इलाके में गंदा पानी आ रहा है, तो क्लोरीन की गोलियों का उपयोग करें। ध्यान रखें जागरूकता और समय पर लिया गया निर्णय ही आपको अस्पताल पहुंचने से बचा सकता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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