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Covid-19 Vaccine: कई मामलों में खास है स्वदेशी नेजल वैक्सीन, जानिए इस बारे में क्या कहते हैं शोधकर्ता

Fri, 23 Dec 2022 01:57 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 23 Dec 2022 01:57 PM IST
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नेजल वैक्सीन को शोधकर्ताओं ने पाया असरदार - फोटो : istock

वैश्विक स्तर पर एक बार फिर से बढ़ रहे कोरोना के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश में नेजल वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। फिलहाल इसे बूस्टर डोज के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। जारी आदेश के मुताबिक अभी यह निजी अस्पतालों में उपलब्ध होगी। नेजल वैक्सीन के बारे में गुरुवार को संसद में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी चर्चा करते हुए, भारतीय शोधकर्ताओं के इस प्रयास की सराहना की थी। नेजल वैक्सीन, नाक के माध्यम से दी जाने वाली वैक्सीन है जो वायरस को शरीर में प्रवेश करने से पहले ही निष्क्रिय करने की क्षमता रखती है।



देश में जिस नेजल वैक्सीन को मंजूरी दी गई है, उसे भारत बायोटेक द्वारा तैयार किया गया है। इसी कंपनी ने कोवाक्सिन का भी निर्माण किया है। भारत बायोटेक द्वारा तैयार यह नेजल वैक्सीन iNCOVACC, कोविड के लिए दुनिया की पहली इंट्रानैसल वैक्सीन भी है। फिलहाल इसे 18 साल से ऊपर के लोगों के इस्तेमाल की मंजूरी मिली है। कई मामलों में यह वैक्सीन अलग है, आइए इस बारे में आगे विस्तार से समझते हैं।

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नेजल वैक्सीन में इंजेक्शन की जरूरत नहीं - फोटो : iStock

कैसे अलग है ये वैक्सीन

कोरोना से बचाव के लिए अब तक जो भी टीके दिए जाते रहे हैं उनके लिए इंजेक्शन को प्रयोग में लाया जाता है, ये टीके हाथ की मांसपेशियों में लगते हैं। वहीं इससे अलग iNCOVACC (BBV154) की दो बूंद बस नाक में डालनी है। इसमें इंजेक्शन की जरूरत नहीं है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया ने 18 साल से अधिक लोगों के लिए इसे आपात स्थिति में प्रयोग में लाने की मंजूरी दी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि संक्रमण के प्रसार चेन के तोड़ने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • यह वैक्सीन चूंकि नाक के माध्यम से दी जाती है जो नाक के भीतर प्रतिरक्षा प्रणाली तैयार करके वायरस के प्रवेश करते ही उसे निष्क्रिय कर देगी।  
  • अब तक दी जा रही वैक्सीन्स से अलग, इसके लिए निडिल की आवश्यकता नहीं होगी।
  • इसे उपयोग में लाना भी आसान है घर पर भी इसको प्रयोग किया जा सकेगा। इसके लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों की आवश्यकता भी नहीं है।
  • सुई से संबिधित जोखिमों जैसे संक्रमण, या वैक्सीनेशन के बाद होने वाले दर्द से मुक्ति मिलेगी। 
  • बच्चों और वयस्कों के लिए आदर्श रूप से उपयुक्त है। 
  • सबसे खास बात यह वायरस को शरीर में प्रवेश करने से पहले ही मारने की क्षमता वाली है, ऐसे में इससे शरीर के अंगों को होने वाली समस्याओं का जोखिम नहीं होगा।
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नाक में ही वायरस को कर देगी बेअसर - फोटो : Pixabay

कैसे काम करते है वैक्सीन

शोधकर्ता बताते हैं, कोरोना चूंकि श्वसन संक्रमण है जोकि नाक के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है, ऐसे में यह नेजल वैक्सीन इस वायरस को नाक में ही निष्क्रिय कर देगी, जिससे शरीर में इसके प्रवेश को रोका जा सकेगा। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) में इम्यूनोलॉजिस्ट डॉ विनीता बाल ने एक रिपोर्ट में जिक्र करते हुए बताया कि  इंट्रानेजल वैक्सीन स्थानीय स्तर (यानी ऊपरी श्वसन मार्ग में) पर एंटीबॉडी का उत्पादन करती है जो सार्स-सीओवी-2 का प्रवेश बिंदु है। एंटीबॉडीज, वायरस को प्रवेश के तुरंत बाद 'बेअसर' कर देती है। इसका मतलब है कि यह वैक्सीन वायरस को फेफड़ों और अन्य अंगों में फैलने से पहले ही निष्क्रिय कर देगी। 

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नेजल वैक्सीन को प्रयोग करना आसान - फोटो : istock

क्यों इसे खास मान रहे हैं शोधकर्ता

शोधकर्ता बताते हैं, यह नेजल वैक्सीन दो मामलों में काफी खास है। 

पहला- इसे लगाना आसान है, क्योंकि इसके लिए इंजेक्शन लगाने की आवश्यकता नहीं है। 
दूसरा- यह शरीर में प्रवेश करने से पहले ही वायरस को बेअसर करने की क्षमता रखती है, जिससे पिछले वैरिट्स की तरह फेफड़ों और अन्य अंगों की समस्याओं का जोखिम कम होगा। 

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प्रभावी हो सकती है नाक से दी जानी वाली वैक्सीन - फोटो : istock

नाक में नौ माह तक प्रभाव रहती हैं एंटीबॉडीज

द लैंसट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन से पता चलता है कि नाक में बनीं एंटीबॉडी संक्रमण के नौ महीने बाद और  रक्त में मौजूद एंटीबॉडी एक साल तक प्रभावी हो सकती हैं। इंपीरियल कॉलेज लंदन में नेशनल हार्ट एंड लंग इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर पीटर ओपेंशॉ कहते हैं "हमारे परिणाम बताते हैं कि नेजल स्प्रे वाले टीके इन स्थानीय एंटीबॉडी को बढ़ावा दे सकते हैं जो प्रभावी तरीके से वायरस को शरीर में प्रवेश से रोकने और गंभीर रोग का कारण बनने से बचाने में मददगार हो सकती है।




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स्रोत और संदर्भ
novel adenovirus vectored, intranasal vaccine for COVID-19

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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